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Hindi Essay on “Pradushan ki Samasiya”, “प्रदूषण की समस्या” Complete Paragraph, Nibandh for Students

प्रदूषण की समस्या

Pradushan Ki Samasiya

संकेत बिंदुभूमिकाविकट समस्याकारणनिवारण

आज प्रदूषण की समस्या अत्यंत विकराल होती जा रही है। अब हमें शुद्ध वायु तक उपलब्ध नहीं है। वैज्ञानिक आविष्कार्य और बदलते हुए औद्योगीकरण के फलस्वरूप वायु सर्वाधिक दूषित और विषैली हो चली है। बेशुमार धुंआ उगलते कल-कारखाने, सड़कों पर पेट्राल और डीजल का विशाल धुओं सारे पर्यावरण को रुग्ण, विषैला और निर्जीव बना रहा है। कल-कारखानों से निकलने वाले कचरे के ढेर नदी-नालों और जलाशयों के निर्मल जल को प्रदूषित और जहरीला बना रहे हैं। कचरे के बचे-खुचे ढेर से खुली भूमि पर सड़ते हुए जहरीले रसायनों और उनसे निकलने वाली विषैली गैसों से हवा, पानी और मिट्टी प्रदूषित हो रही है। अनवरत दौड़ती बसों, रेलगाड़ियों, मोटरकारों और स्कूटरों का निरंतर भवता उमड़ता हुआ भारी शोर कल-कारखानों के शोर को दुगुना करता हुआ धीरे-धीरे बधिर बनाने पर गुला हुआ है। यदि इसी गति से हमारे पर्यावरण की स्थिति बद से बदतर होती गई तो मानव जीवन की समस्त आशापद संभावनाएं विनष्ट हो जाएंगी। अतएव आवश्यक है कि कल-कारखानों की चिमनियों को न केवल ऊँचा उठाया जाए, गरिक उसकी गंदगी को रोकने का प्रयास किया जाए। यातायात के साधनों से भी कम-से-कम निकले, विषैले पदार्थ और कहा-कचरा नदियों तथा जलाशयों में प्रवाहित न किया जाए। अधिकाधिक वृक्ष लगाए जाएं। हमारा पर्यावरण और उसके संरक्षण का प्राण ही हमारे लिए महत्वपूर्ण है।

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