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Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Rajiv Gandhi” , ”राजीव गांधी” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

राजीव गांधी

Rajiv Gandhi

भारत : देश की धड़कन देश का सपना

जन्म : 1944 मृत्यु : 1991

सबसे कम उम्र में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री बनने का गौरव पाने वाले राजीव गांधी का व्यक्तित्व सज्जनता, मित्रता और प्रगतिशीलता का प्रतीक था। राजनैतिक क्षितिज में उनका उदय अप्रत्याशित तो अवश्य था, परंतु इतने बड़े देश के प्रधानमंत्रित्व का भार अपने युवा कंधों पर लेते ही राजीव गांधी ने साहसिक कदम उठाकर और ज्वलंत समस्याओं के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाकर अपनी छवि एक विवेकशील और गतिशील राजनेता के रूप में प्रतिष्ठित की। उनकी स्पष्टवादिता और आधुनिक विचारों ने उन्हें शीघ्र ही ‘मिस्टर क्लीन’ की संज्ञा दे दी।

सन् 1985 के आम चुनावों में मिले प्रचंड बहुमत के पीछे जनता-जनार्दन की सहानुभूति एक महत्त्वपूर्ण कारण तो थी ही, मगर प्रधानमंत्री के पद पर राजीव गांधी के आरोहण का एक अन्य मुख्य कारण विभिन्न मसलों पर उनका आधुनिक दृष्टिकोण और युवा उत्साह था। भारतीय लोकतंत्र को सत्ता के दलालों से मुक्त कराने की बात कहने वाले वे पहले प्रधानमंत्री थे। भ्रष्ट नौकरशाही को भी उन्होंने आड़े हाथों लिया। उन्होंने ही सबसे पहले देश को एक समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में ‘इक्कीसवीं सदी की ओर’ ले जाने का नारा देकर जनमानस में नई आशाएं जगाई। प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने नयी शिक्षा नीति की घोषणा की। देश के औद्योगिक विकास के लिए तरह-तरह के आयोग गठित हुए। विज्ञान और प्रौद्योगिकी को नई गति और दिशा देने के लिए प्रयास तेज किए गए और देश में पहली बार ‘टैक्नोलॉजी मिशन’ एक संस्थागत प्रणाली के रूप में अस्तित्व में आया। राजीव गांधी की पहल पर हुए ऐतिहासिक पंजाब, आसाम, मिजोरम समझौतों ने उनकी राजनीतिक सझ-बूझ का परिचय दिया। देश की राजनीति में ये समझौते महत्त्वपूर्ण पड़ाव थे।

उधर अंतरराष्ट्रीय क्षितिज में भी राजीव गांधी एक सशक्त और कुशल राजनेता के रूप में उभरे। अपने शासन्काल में उन्होंने कई देशों की यात्रा की और उनसे भारत के राजनयिक, आर्थिक व सांस्कृतिक संबंध बढाए। सन् 1986 में गट-निरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व भारत के पास आने पर कई अंतरराष्ट्रीय मसलों पर स्पष्ट और बेबाक नीति देकर राजीव गांधी ने भारत को एक सम्मानजनक स्थान दिलाया। फिलीस्तीनी संघर्ष, रंगभेद के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका लोगों के संघर्ष, स्वापो आंदोलन, नामीबिया की स्वतंत्रता के समर्थन तथा अफ्रीकी देशों की सहायता के लिए अफ्रीका फंड की स्थापना में भारत की पहल आधुनिक विश्व इतिहास का स्वर्णिम दस्तावेज बन गई हैं। राजीव गांधी ने माले में हुए विद्रोह को दबाकर और श्रीलंका की जातीय समस्या के निदान के लिए स्वतंत्र पहल पर समझौता कर हिंद महासागर में अमरीका, पाक तथा अन्य देशों के बढ़ते सामरिक हस्तक्षेप पर अंकुश तो लगाया ही, साथ ही विश्व को यह भी अहसास करा दिया कि भारत इस क्षेत्र में एक महती शक्ति है. जिसे विश्व की कोई भी ताकत अनदेखा नहीं कर सकती। इससे विश्व राजनीति में भारत की एक विशिष्ट पहचान बनी। साथ-साथ राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित हुए।

मगर प्रधानमंत्रित्व काल के अंतिम दो वर्षों में अपने निजी सलाहकारों की कारगुजारियों की वजह से राजीव गांधी कुछ ऐसे विवादों से आ घिरे. जिससे उनकी प्रतिष्ठा को गहरा धक्का लगा। ‘मिस्टर क्लीन’ की उनकी छवि भी धूमिल हुई। वे कड़ी आलोचना का केंद्र बन गए और परिणामतः सन् 1989 के आम चुनावों में उनकी पार्टी पूर्ण बहुमत नहीं पा सकी।

चुनावों को सन्निकट देखकर राजीव गांधी एक बार फिर से जनता का विश्वास जीतने में जुट गए। इस बार उनका नारा ‘देश को स्थायित्व’ देना था। उन्हें विश्वास था कि सन् 1991 के चुनावों में जनता उन्हें फिर से बहुमत से विजयी बनाएगी। इस विश्वास और जनता से मिले समर्थन-स्नेह से अभिभूत हो राजीव गांधी ने अपनी सुरक्षा का घेरा भी तोड़ दिया। मगर विधि की विडम्बना देखिए कि जनता से उनकी करीबी ही उनकी जान ले बैठी। 21 मई, 1991 को मद्रास से 50 किमी. दूर स्थित श्री पेरुंबदुर में एक चुनाव सभा में लोगों से मिलते समय श्री गांधी एक भयंकर बम विस्फोट का शिकार हो गए। इस सुनियोजित षड्यंत्र ने देश की राजनीति से एक युवा युग और आकांक्षा का सदा के लिए पटाक्षेप कर दिया, जिसने भारतीय ही, नहीं समूचे विश्व जनमानस को भीतर तक झकझोर कर रख दिया।

राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त, 1944 के दिन बम्बई में हुआ था। पिता फिरोज गांधी और मां इंदिरा से उन्हें हर दृष्टि से संपन्न परंपरा विरासत में मिली। कैम्ब्रिज छात्र जीवन में उनकी भेंट सोनिया से हुई जो आगे चलकर उनकी अर्धागिनी बनीं। अनुज संजय धी की एक विमान दुर्घटना में असामयिक मृत्यु के बाद ही वे भारतीय राजनीति में आए। इससे पहले वे इंडियन एयरलाइंस में विमानचालक थे। सन् 1981 में उन्होंने अमेठी से संसद सदस्य का चुनाव जीता और सन् 1983 में वे कांग्रेस (इ) पार्टी के महासचिव नियुक्त हुए। अक्टूबर, 1984 के दिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नृशंस हत्या के बाद उन्होंने कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। फिर सन् 1985 के आम चुनावों में प्रचंड जनमत प्राप्त कर ल्होंने विधिवत प्रधानमंत्री का पदभार संभाला। लगभग एक दशक के छोटे से राजनैतिक जीवन राजीव गांधी एक अमिट छाप छोड़कर अपने देश भारत से हमेशा के लिए विदा हो गए।

भारत सरकार ने देश के इस दिवंगत नेता को सर्वोच्च सम्मान ‘भारत-रत्न’ से विभूषित कर यथेष्ट श्रद्धांजलि दी है।

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