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Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Mukesh” , ”मुकेश” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

मुकेश

Mukesh

 

भारत : ‘जाने कहां गये वो दिन’

जन्म : 1923 मृत्यु : 1976

 

दर्द में डूबी मधुर आवाज के बेताज बादशाह मुकेश को अपने लाखों चाहने वालों का प्यार

नसीब हुआ। इसीलिए उनका गाया हर नग्मा, तराना लोगों के दिलों में घर कर एक व्यक्ति और एक कलाकार के रूप में उनकी याद को भुला पाना असंभव है।

मुकेश चंद्र माथुर का जन्म 22 जुलाई. 1923 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने मैट्रिक तक शिक्षा प्राप्त की। उन्हें बंबई लाने का श्रेय उस समय के मशहूर अभिनेता मोतीलाल को जाता है। प्रारंभ में मुकेश अभिनेता बनना चाहते थे। वह ‘निर्दोष’, ‘मल्हार’ ‘अनुराग’, ‘माशूका’ आदि फिल्मों में बतौर अभिनेता आए भी, लेकिन सन् 1945 में फिल्म ‘पहली नजर’ में उनके गाए गीत ‘दिल जलता है, तो जलने दे’ की अपार सफलता ने उन्हें गायकों की श्रेणी में ला खड़ा कर दिया और वे गायक के रूप में प्रतिष्ठित हो गए। उन्होंने अपना पहला गीत ‘निदोष’ (1941) में गाया था। राज कपुर के लिए उन्होंने पहले ‘नीलकमल’ फिर ‘आग’ में तथा अंतिम बार ‘धरम-करम’ में आवाज दी। ‘सत्यम शिवमं संदरम’ में उनका गाया गीत आखिरी था।

मुकेश के गाए गीतों में एक बड़ा हिस्सा राज कपूर एवं मनोजकुमार की फिल्मों का है। शंकर-जयकिशन एवं कल्याणजी-आनंदजी ने उनके गीतों को मधुर सुर दिए। वह पहले गायक थे, जिनके गीत 40 वर्ष बाद भी हिन्दुस्तान की सरहदों के पार दूर देशों में गाए जाते हैं। उन्हें चार बार ‘फिल्म फेयर एवार्ड’ प्राप्त हुआ। भारत के इस सबसे मधुर गायक व संजीदा इंसान का निधन 27 अगस्त, 1976 को अमरीका में एक कार्यक्रम के दौरान हुआ। उनके निधन पर राज कपूर ने कहा था, ‘अब तो मेरी आवाज ही चली गई है।’

‘दिल जलता है’ (पहली नजर), ‘जिंदा हूं मैं इस तरह’ (आग), ‘आवारा हूं’ (आवारा), ‘मेरा जता है जापानी’ (श्री 420), ‘सुहाना सफर और ये मौसम हसीं’ (मधुमति), ‘होंठों पे सच्चाई रहती है’ (जिस देश में गंगा बहती है), ‘ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना’ (बंदिनी). ‘दोस्त दोस्त न रहा’ (संगम), ‘जिस दिल में बसा था प्यार तेरा’ (सहेली), ‘दनिया बनाने वाले’ (तीसरी कसम), चंदन-सा बदन’ (सरस्वती चंद्र), ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए’ (आनंद), ‘जिस गली में तेरा घर (कटी पतंग), ‘जाने कहां गए वो दिन’ (मेरा नाम जोकर), ‘जबाँ पे दर्द भरी दास्तां’ (मर्यादा), ‘इक प्यार का नगमा है’ (शोर) इत्यादि मुकेश के श्रेष्ठ गीत हैं।

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