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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Mahanagro me Pakshi”, “महानगरों में पक्षी” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

महानगरों में पक्षी

Mahanagro me Pakshi

 

                महानगरों से पक्षियों की चहचहाहट गुम होती चली जा रही है। इसका कारण है बड़े शहरों अर्थात् महानगरों मे जगह का अकाल रहता है। वहाँ वृक्षों को काटकर जमीन साफ करके कंकरीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं। इस कारण पेड़ घटते जा रहे हैं और पक्षी उड़कर अन्यत्र जाने को विवश हो रहे हैं। जब प़क्षी ही नहीं रहेंगे तो भला उनकी चहचहाहट कहाँ से सुनाई देगी। हमारे स्वार्थ ने पक्षियों की स्वाभाविकता को छीन लिया है। पक्षी तो स्वतंत्रता प्रेमी होते हैं, उन्हें पिंजरे का जीवन पंसद नहीं हैं। वे शहरों का पलायन करते जा रहे हैं। अतः उनकी चहचहाहट भी गुम होती चली जा रही है। अब तो बच्चे पक्षियों को देख भी नहीं पाते। वे उनकी पहचान तक भूल गए हैं। चहचहाते पक्षी कितने अच्छे लगते हैं। इनकी आवाज हमारे कानों को कितनी प्रिय प्रतीत होती है, पर हाय रे स्वार्थ। इसने हमसे हमारा यह सुख भी छीन लिया है।

 

 

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