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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Educational Yatra”, ”शैक्षणिक यात्राएँ” Complete Hindi Anuched for Class 8, 9, 10, Class 12 and Graduation Classes

शैक्षणिक यात्राएँ

Educational Yatra 

 

शिक्षा में यात्राओं का वही महत्व है जो विज्ञान की शिक्षा में प्रयोगों का है। मनोविज्ञान हमें बताता है कि सुनने से जो शिक्षा प्राप्त होती है, उसका प्रभाव उतना स्थायी नहीं होता, जितना प्रत्यक्ष देखे हुए का।

शिक्षा में इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए शिक्षा यात्राओं की व्यवस्था की जाती है। इसके अतिरिक्त भी शिक्षा यात्राओं से अनेक प्रकार के लाभ भी साथ साथ प्राप्त हो जाते हैं।

इतिहास से हमें बहुत सी जानकारी मिलती है। किलों को युद्ध के लिए कैसे प्रयोग में लाया जाता है। कौन सा राजा लोकप्रिय था, उसने प्रजा की भलाई के लिए क्या क्या काम किए। इनका वर्णन इतिहास में मिलता है। मुगल काल में देशी संस्कृति की कला कृतियों को नष्ट किया गया। मूर्तियों, भवनों, मंदिरों को तोड़ा गया इन सब का प्रामाणिक ज्ञान हम उन स्थानों की यात्रा करके प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रत्यक्ष ज्ञान की छाप हमारे मस्तिष्क पर स्थायी रहती है।

भूगोल की शिक्षा में भी हमको शैक्षणिक यात्राएँ महत्वपूर्ण योग देती है। नदियों के उद्गम, उनसे लाभान्वित भूभाग, नदियों के किनारे ही महत्व पूर्ण नगरों की स्थिति आदि का हमें पता चलता है। प्रत्यक्ष दर्शन से हमारा भौगोलिक ज्ञान स्थायी रहता है। किस प्रदेश में क्या उत्पादन है। वहाँ का जीवन कैसा है। रेगिस्तान के निवासियों की । क्या समस्याएँ हैं – आदि के विषय में शैक्षणिक यात्राएँ हमारे मौखिक ज्ञान की पुष्टि करती है।

अजंता एलोरा, ताजमहल, राजधानी दिल्ली, भाखरा नांगल बांध, नागार्जुनसागर बांध अथवा बड़े बड़े कारखानों को देखने के लिए। पाठशालाओं अथवा अन्य शिक्षण संस्थाओं द्वारा शैक्षणिक यात्राओं का आयोजन किया जाता रहा है। भविष्य में इस क्षेत्र में और भी उन्नति होने की संभावनाएँ हैं।

आजकल बहुधा केन्द्रीय एवं प्रान्तीय सरकारों के मंत्री विदेश यात्राएँ करते रहते हैं। वर्ष में करोड़ों रुपए उनकी विदेश यात्राओं पर व्यय होते हैं। वे विदेशों में अपने विभाग के कार्य संबंधी ज्ञान की अभिवृद्धि के लिए यात्राएँ करते हैं। विदेशों की कार्य प्रणाली समझकर वे उसमें से अपने देश के लिए उपयोगी का प्रयोग अपने विभागों में करते हैं। ये यात्राएँ भी शैक्षणिक यात्राओं की श्रेणी में ही आती हैं।

ज्ञान प्राप्ति के अतिरिक्त इन यात्राओं का अन्य प्रकार से भी लाभ होता है। व्यक्ति चाहे जितनी भी उच्चशिक्षा प्राप्त हो, यदि वह भिन्न भिन्न स्वभावों, सामाजिक रीति रिवाजों आदि वाले लोगों के बीच घूमा फिरा न हो, तो उसका दृष्टिकोण संकीर्ण ही रहता है। उसे कूप-मण्डूक ही कहा जा सकता है। उसके विचारों में उदारता की कमी होती है, दुष्टिकोण में कट्टरता रहती है। इसके विपरीत यदि वह व्यापक यात्रा कर चुका हो, विभिन्न प्रकार के लोगों के सम्पर्क में आया हो तो सामान्यतः अधिक उदार दृष्टिकोण अपनाता है। उसके विचारों और निर्णयों में परिपक्वता पाई जाती है।

इसमें संदेह नहीं कि यात्रा करने में व्यय होता है। खाने पीने की असुविधा होती है। पर मन को उदार बनाने, संकीर्णता दूर करने तथा अंतर्राष्ट्रीय संस्कृति का विकास करने के लिए देश एंव विदेश की यात्रा अत्यंतावश्यक है। यात्रा करने में विभिन्न मनोरम दृश्यों का आनन्द उठाने के अतिरिक्त दूसरे लोगों से मिलने और नवीन स्थानों को देखने का आनन्द भी मिलता है।

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