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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Diary ki Atmakatha”, ”डॉयरी की आत्मकथा” Complete Hindi Nibandh for Class 8, 9, 10, Class 12 and Graduation Classes

डॉयरी की आत्मकथा

Diary ki Atmakatha

अजी जनाब ! यह क्या करने लगे। नहीं, किसी की डॉयरी पढ़ना कतई उचित नहीं, किसी की इजाजत के बिना उसकी डॉयरी पढना कतई सद्व्यवहार नहीं माना जाता। कोई भी समझदार और पढ़ा-लिखा व्यक्ति ऐसा करना उचित नहीं मानता। अरे, पुलिस या उस प्रकार की संस्थाओं द्वारा खोज-बीन करते समय किसी की निजी डॉयरी पढ़ना अलग बात है। वैसा करने से कई तरह की कठिन समझी जाने वाली गुत्थियाँ सुलझ जाया करती हैं। अराजक तत्त्वों की जानकारी पाकर पकड़ा और समाज या देश-जाति को उन से पहुँचाई जा रही हानि को अवश्य रोका जा सकता है; पर यह…यह तो मैं किसी अराजक तत्त्व की डॉयरी न होकर एक अच्छे व्यक्ति की डॉयरी हैं.

हाँ, मैं डॉयरी ही हूँ। इस शक्ल-सूरत और स्थिति तक पहुँचने के लिए मुझे एक प्रकार की विशिष्ट क्रिया-प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है। जी हाँ यों, मेरा मूल स्वरूप तो उसी कागज का ही बना हुआ है जिससे बच्चों, जवानों, बुजुर्गों आदि सभी के लिखने के लिए कापियाँ आदि बनाई जाती हैं। कई तरह के रजिस्टर, कई तरह के बहीखाते आदि बनाए जाते हैं। फिर भी बनाने वालों को कई प्रकार से मुझे अप-टू-डेट यानि सम्पूर्ण बनाने के लिए कई प्रयासों और प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा है, सो मैं उन प्रयासों-प्रक्रियाओं से गुजरे बिना अपने-आप को सम्पूर्ण कैसे बना और समझ सकती थी।

आप जानते ही होंगे कि मुझ डॉयरी के अनेक रूप हुआ करते हैं-एक होती है – जेबी डॉयरी, दूसरी उस से बड़ी हुआ करती है हत्थ-डॉयरी यानि हर समय हाथों में रहने वाली डॉयरी। तीसरी हुआ करती है टेबुल डॉयरी, जो घरों-दफ्तरों में रखे टेबुल्स पर विराजमान रह कर उनकी शोभा बढ़ाया करती है। इनमें से मेरा रूप कोई भी क्यों न हो. उपयोग लगभग सभी का एक जैसा ही हुआ करता है। सामान्य रूप से क्योंकि छोटी-बड़ी प्रत्येक मुझ डॉयरी पर तिथि, तारीख, आदि लिखी रहा करती है, सो लोग उनको देखने के लिए उनके अनुसार अपना कार्यक्रम बनाने के लिए मेरा उपयोग किया करते हैं। दूसरे व्यस्त किस्म के आदमी दिन तारीखवार अपना प्रत्येक दिन का कार्यक्रम भी मुझ पर नोट कर दिया करते हैं। फिर उसी सब के अनुसार चलने का भरसक प्रयास किया करते है।

इन मुख्य बातों के अतिरिक्त प्रेमी-जन, नेतागण, साहित्यकार आदि या इन जैसे लोग जीवन में नित्य प्रति घटने वाली घटनाओं, व्यक्तिगत सम्बन्धों, विशेष प्रकार की आप बीतियो, आत्मानुभवों को भी मुझ डॉयरी में लिखने के आदि हुआ करते हैं। इस प्रकार की सभी बातों को बड़ा ही महत्त्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक दस्तावेज माना जाता है। इस दृष्टि से किसी महत्त्वपूर्ण व्यक्ति द्वारा लिखी गई, डॉयरी को लिखने वाले के मन का आईना भी कहा जाता है।

इन सब बातों के अतिरिक्त मुझ डॉयरी के पेट में और भी बहुत कुछ भरा रहता है। वार्षिक छुट्टियों की सूची, बैंक-दर, पोस्टल-दर, माप-तोल के सभी तरह के पैमाने, देश-विदेश के पिन-कोड, टेलिफोन डॉयल करने के कोड नम्बर, रेलवे की समय-सारिणी तथा और भी कुछ छपा रहता है। अपनी आवश्यकता के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति इन में से किसी भी तरह की जानकारी प्राप्त कर के घर बैठे-बैठाए अपना काम चला सकता है। लोग मेरा उपयोग अपने मित्रों, रिश्तों-नातों, व्यापारिक सम्बन्धों के पते आदि लिखने के लिए, कुछ लोग शेरो-शायरी दर्ज करने के लिए, तो कुछ लोग फिल्मी गीत लिखने के लिए करते हैं। अन्य कई तरह की जानकारियाँ भी मुझमें लिखी और नोट की जाती हैं। कॉलेज-स्कूलों के छात्रगण कक्षाओं में अध्यापकों द्वारा दिए गए भाषणों को नोट करने के लिए भी मेरा प्रयोग खूब करते हैं। इस प्रकार मेरे अनेक प्रयोग एवं उपयोग हैं।

मुझे बनाने की क्रिया-प्रक्रिया कापियाँ-पुस्तकें आदि बनाने वाली ही है। प्रत्येक पृष्ठ के ऊपर दिन, वार, तारीख, तिथि तथा अन्य आवश्यक दैनिक सूचनाएँ छापी जाती है। कई लोग इस सब के नीचे कोई सक्ति या कोई अच्छा शेर आदि छापना भी पसन्द करते हैं। पहले ऊपर बताई गई सभी तरह की सूचनाएँ छप कर लगी रहती हैं। हल्के गत्ते या कवर पेपर से बनाया और छाप कर तैयार किया गया सुन्दर-सा कवर या जिल्द भी मेरी सुरक्षा के लिए अवश्य चढाई जाती है। इस प्रकार यदि लोग मुझे सुन्दर बनाने और सुरक्षित रखने का प्रयास किया करते हैं, तो मैं डॉयरी भी तो कई तरह से मानव-जाति की सेवा-सुश्रुषा किया करती हूँ। राजनीतिक, साहित्यिक, सामाजिक और वैयक्तिक हर दृष्टि से मुझ डॉयरी का कितना अधिक मान और मूल्य है, यह बात आप की समझ में आ गई होगी।

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commentscomments

  1. Mulla Sharmina kutubuddin says:

    I wants the speech in Hindi and marathi

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