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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Mere Pitaji”, “मेरे पिता जी” Complete Essay for Class 9, 10, 12 Students.

मेरे पिता जी

Mere Pitaji

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मेरे पिता जी का नाम श्री गोविंद प्रसाद है। उनकी आय चालीस वर्ष है। वे इंटर कॉलेज में प्रवक्ता हैं। वे एक मध्यवर्गीय व्यक्ति हैं। हमारा छोटा परिवार एक सुखी जीवन व्यतीत कर रहा है। मेरे पिता जी हमारे आदर्श हैं। वे सादा जीवन उच्च विचार में विश्वास करते हैं। जीवन की तड़क-भड़क तथा ऐशो-आराम में उन्हें कोई रुचि नहीं है। वे सदैव कुर्ता-पायजामा पहनते हैं। वे नियम तथा समय से अपने कार्य पर जाते हैं। वे छात्रों को पूरी लगन से पढ़ाते हैं। वे कमजोर तथा निर्धन छात्रों की मदद करते हैं, इसलिए वे छात्रों में काफी लोकप्रिय हैं। वे अपना व्यवहार सभी के साथ शिष्ट एवं मित्रवत् रखते हैं। उनके सभी साथी भी उनसे अत्यंत प्रसन्न रहते हैं।

मेरे पिता जी साहित्यिक रुचि वाले आदमी हैं। उनके द्वारा लिखे लेख समाचार-पत्रों तथा पत्रिकाओं में छपते रहते हैं। उन्हें कहानी लिखने का भी शौक है। उनका एक कहानी संग्रह भी छप चुका है। उन्हें हमारी शिक्षा-दीक्षा की चिंता लगी रहती है। वे इस पर कडी निगरानी करते हैं। वे हमें हमेशा अच्छी बातें समझाते रहते हैं। वे स्वयं नियमित जीवन जीने में विश्वास करते हैं। वे प्रातः जल्दी उठकर सैर पर चले जाते हैं। वे घरेलू कामों में भी हम सभी की मदद करते हैं। वे अपनी कथनी-करनी में अंतर नहीं रखते। परिवार की समस्याओं को धैर्यपूर्वक हल करते हैं। वे हमें शिक्षित और अच्छा नागरिक बनाना चाहते हैं इसलिए सदैव अनुशासन बनाए रखने का प्रयास करते है।

मैं भी उनके सपनों को पूरा करना चाहता हूँ। मेरे पिता जी वास्तव में एक आदर्श पुरुष हैं।

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