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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Gati Hi Jeevan Hai” , “गति ही जीवन है” Complete Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

गति ही जीवन है

Gati Hi Jeevan Hai

जिस प्रकार बहता जल ही स्वच्छ रह सकता है उसी प्रकार गतिशील जीवन ही सफल और सार्थक बन सकता है। ठहरा जल दूषित हो जाता है, उसमें काई जम जाती है, रोगाणु पनपने लगते हैं। ठहरे विचारों या परंपराओं का भी कुछ ऐसा ही हश्र होता है। जो समाज या देश समयानुसार अपनी जीवन-शैली, विचार और परंपराओं में परिवर्तन नहीं लाता, वह पिछड़ जाता है। जब हमारा देश विदेशी आक्रांताओं से आतंकित था तब अपनी स्त्रियों के सम्मान की रक्षा हेतु पर्दा-प्रथा या बाल-विवाह की परंपरा चली। लेकिन यदि आज के स्वतंत्र वातावरण में भी हम नारी को चारदीवारी में कैद रखेंगे तो देश की प्रगति में बाधा आएगा। गति का तात्पर्य मात्र परिवर्तन नहीं है-गति का तात्पर्य विकास से है। हमारे जो विचार, जो कार्य देश या समाज के विकास में बाधक बन रहे हों उन्हें त्यागे बिना विकास संभव नहीं। स्वतंत्रता के छह दशक बाद भी यदि हम पिछड़े हैं तो उसका कारण यहा ह कि आज भी हमारा देश और समाज छुआछूत, जाति-धर्म की रूढ़ियों से स्वयं को मुक्त नहीं कर सका है। जनसंख्या के आधे भाग महिलाओं को समाज ने उनके कानुनी अधिकारों से वंचित रखा है। जनता को शिक्षित और जागरूक बनाकर हम देश को गतिवान बना सकते हैं।

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