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Hindi Essay on “Vaisakhi” , ”वैसाखी” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

वैसाखी

Vaisakhi 

निबंध नंबर :- 01

वैसाखी पंजाब प्रांत का प्रमुख पर्व है। सिक्खों का यह विशेष पर्व है। वैसाखी का पर्व प्रत्येक 13 अप्रैल को मनाया जाता है। इस समय तक रबी की फसल पककर तैयार हो जाती है। खेतों में सरसराती बालियों को किसान देखता है तब खुशी के मारे झूमने लगता है।

लंबे समय से इस पर्व के साथ भांगड़ा-नृत्य की परंपरा भी जुड़ी है। ‘भांगड़ा’ पंजाब का लोक नृत्य है। ढोल की थाप पड़ते ही बच्चे-बूढ़े, वृद्ध नर-नारियों के पांव खुद-ब-खुद थिरकने लगते हैं।

वैसाखी के दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। इस दिन नदियों के किनारे बड़े-बड़े मेले लगते हैं। नवयुवक वैसाखी की मस्ती में आकर तूतियां बजाते हैं। वे अपने सिरों पर जोकरों की टोपियां रखे मुसकराते चलते हैं। इस दिन मंदिरों में बड़ी भीड़ होती है।

पंजाब में किसान इस दिन पौ फटने से पहले ही उठकर गुरुद्वारों की ओर जाते हुए दिखाई देते हैं। इस दिन सिक्खों के दसवें गुरु गोविंद सिंह ने हिंदु धर्म की रक्षा के लिए एक संगठन बनाया था। उन्होंने ‘खालसा’ नामक पंथ का गठन किया था। उन्होंने खालसा को पांच ककारों से सुसज्जित किया था। वे ककार हैं-केश, कंघा, कड़ा, कृपाण और कच्छा।

वैशखी के पीछे एक पौराणिक प्रसंद भी मिलता है-

पांडवों का वनवास-काल चल रहा था। वे ‘कटराज ताल’ पहुंचे। इस स्थान पर उन्हें बड़े जोर की प्यास लगी। युधिष्ठिर को छोडक़र चारों भाई क्रमश: जल की तलाश में एक सरोवर पर पहुंचे। यक्ष के मना करने पर भी उन्होंने जल पीने की कोशिश की। इस कारण उन चारों की मृत्यु हो गई। युधिष्ठिर को अपने भाइयों की चिंता हुई। वे उनकी तलाश में निकल पड़े। उस सरोवर के पास पहुंचकर वह पानी पीने के लिए जैसे ही झुक, यक्ष ने कहा, पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दें, तब जल का सेवन करें। यक्ष युधिष्ठिर से प्रश्न करता रहा। युधिष्ठिर उसके प्रश्नों का सटीम उत्तर देते रहे। उनके सारे उत्तरों से यक्ष प्रसन्न हो गया। उसने उससे चारों भाइयों में से किसी एक भाई को जीवित करने को कहा।

इस पर युधिष्ठिर ने कहा ‘आप मेरे भाई सहदेव को पुनरुज्जीवन दजिए।’

यक्ष ने आश्चर्य से पूछा ‘आपके मन में अपने सगे भाईयों की जगह सौतेले भाई को जीवित करने का विचार कैसे आया?’

युधिष्ठिर का उत्तर था ‘माता कुंती के दो पुत्र तो जीवित रहेंगे, किंतु माता माद्री का एक भी पुत्र नहीं बच पाएगा।’

युधिष्ठिर की न्यायप्रियता को देखकर यक्ष बहुत ही प्रसन्न हुआ। उसने चारों भाइयों को जीवित कर दिया।

इस पौराणिक घटना की स्मृति में यहां प्रतिवर्ष वैसाखी के दिन विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इसस अवसर पर एक भव्य जुलूस निकलता है। जूलूस में गुरुग्रथ साहित के आगे पंच प्यारे नंगे पांव आगे-आगे चलते हैं।

निबंध नंबर :- 02

वैशाखी

Vaisakhi

 

वैशाखी पंजाब और पंजाबियों का गौरव है, यह एक महापर्व है जो सारे भारतवर्ष मे विशेषकर पंजाब में बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। लहलहाती अपनी फसल को देखकर कौन किसान ऐसा न होगा जिसका भंगड़ा डालने को दिल न करता होगा। इसी लह लहाती फसल को देखकर भंगड़ा डालने का पर्व है वैशाखी। गुरु गोबिन्द सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना भी इसी पण्य दिवस पर की थी। जलियांवाला बाग दर्दनाक हत्याकाण्ड भी इसी दिन ताज़ा हो जाता है और आँखें नम हो जाती हैं।

यह प्रतिवर्ष वैशाख महीने की संक्रान्ति को सारे भारत वर्ष में मनाया जाता है। वैशाखी का धर्म भावना से गहरा सम्बन्ध है। सूर्य 12 राशियों की परिक्रमा करके पुन: मेष राशि में आता है। इससे यह समझा जाता है कि पुराना वर्ष तो मंगलमय बीत गया और नववर्ष का आगमन भी मंगलमय हो। इस दिन ब्राह्मण अपने यजमानों के घर जाकर स्वस्तिवाचन करते हैं, नवग्रह पूजन करते हैं और यजमान को यज्ञोपवीत देते हैं। यजमान भी यथाशक्ति अपने पुरोहित को सन्तुष्ट करता है। वैशाखी के दिन उत्तर भारत की नदियों एवं सरोवरों में स्नान करना उत्तम समझा जाता है। यदि ऐसा न बन पडे तो कछ लोग गंगा जल पानी में डाल कर स्नान कर लेते हैं। गुरुद्वारों और मन्दिरों में दर्शन किए जाते हैं। इस प्रकार वैशाखी का पर्व धार्मिक लोगों के लिए एक पुण्य का भी पर्व है।

वैशाखी का त्यौहार मनाने के कुछ धार्मिक एवं ऐतिहासिक कारण भी हैं। सबसे बड़ा कारण तो यह है कि इस दिन श्री गुरू गोबिन्द राय ने 1699 ई० में केशगढ़ आनन्दपुर साहिब में विशाल चण्डी यज्ञ करने के पश्चात् शिष्यों के संगठन को नियमित सैन्य पद्धति में ढालने के लिए खालसा पंथ की स्थापना की। इसके लिए सर्वप्रथम उन्होंने पांच बलिदानी वीरों का पता लगाकर उन्हें ‘पंज प्यारे’ की संज्ञा दी। उनको अमृत छकाया फिर स्वयं उनके हाथों से ‘अमृत’ (पानी भरे कड़ाहे में तलवार से शक्कर घोलकर बनाया हुआ) छका, सभी अमृतधारियों को नाम के आगे ‘सिंह’ शब्द जोड़ने तथा पंज ककार (कृपाण, कड़ा, केश, कंघा और कच्छा) धारण करने का निर्देश दिया।

इसी दिन अर्थात् 13 अप्रैल सन् 1919 में वैशाखी वाले दिन जलियांवाले बाग अमृतसर में स्वतन्त्रता सेनानियों द्वारा आयोजित शान्तिपूर्वक सभा पर, निहत्थे लोगों पर जनरल डायर ने गोलियां चलानी शुरू कर दी। सभा में शामिल लोगों से न भागने बना न निकलते देखते ही देखते सरकारी आंकड़ों के अनुसार 379 लोग मौत के घाट उतर गए और 1200 से अधिक गम्भीर रूप से घायल हुए। लगभग 2007 ऊपर लोगों ने कुएँ में छलांग लगाकर अपनी जानें दे दी। इस प्रकार वैशाखी का यह त्यौहार हमें उन अनगिनत शहीदों की याद दिलाता है जिन्होंने ब्रिटिश सरकार से अपनी जान पर खेलकर लोहा लिया। जलियाँवाला बाग भारत का गौरव है और वहां के शहीद हमारे स्वाभिमान के प्रतीक। उन्हें शत-शत नमन।

वास्तव में यह त्यौहार किसानों का ही उत्सव है। जब किसान अपनी गेहूँ की फसल को पकी हुई देखता है तो मन बल्लियों उछलने लगता है क्योंकि उसकी वर्ष भर की मेहनत इस दिन सफल होती है। वे मस्ती में झूमते हुए ढोल और नगाड़ों की ताल पर भंगडा डालते हैं और स्त्रियां भी ख़ुशी के गीत गाती हैं।

जगह-जगह पर वैशाखी का मेला लगता है जिसमें भंगड़ा, नाच, दंगल, कुश्ती, कबड्डी आदि के खेल आयोजित होते हैं जो हर किसी का भरपूर मनोरंजन करते हैं। सभी लोग इस पर्व को बड़े ही हर्षोल्लास से मनाते हैं। इस प्रकार यह त्यौहार हमें देश की एकता का भी संदेश देता है।

इस दिन बाजारों में भी चहल-पहल देखने को मिलती है। बाजार खूब सजे होते हैं। रेहड़ी एवं छाबड़ी वालों की भी जगह-जगह भीड़ लगी रहती है। अमृतसर का वैशाखी का मेला तो पंजाब भर में प्रसिद्ध है; अनेक धार्मिक लोग इस दिन स्वर्ण मन्दिर तथा दाना मन्दिर जाते हैं जिनकी शोभा रात को देखते ही बनती हैं। दोनों ही मन्दिर रात को अपनी सुनहरी रोशनी द्वारा सबका मन अपनी ओर आकर्षित करते हैं। ऐसा लगता है जैसे ये मन्दिर सुनहरी रोशनी मे नहाए हुए हो।

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