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Hindi Essay on “Sanyukt Rashtra Sangh – Vishv Shanti mein Bhumika” , ”संयुक्त राष्ट्र संघ – विश्व शान्ति में भूमिका” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

संयुक्त राष्ट्र संघ – विश्व शान्ति में भूमिका

Sanyukt Rashtra Sangh – Vishv Shanti mein Bhumika

 

 

                प्रस्तावना- बीसवीं शताब्दी का युग पूरे संसार के लिए स्पर्धा का, राजनैतिक उथल-पुथल का युग रहा। एक ओर गुलामी से आजादी के लिए अंगड़ाइयां लेते देश थे तो दूसरी ओर हथिहारों की होड़ मंे शामिल देश, हथियारों की बिक्री के लिए अपनी मण्डी बनाने के लिए प्रयासरत थे। प्रथम विश्वयुद्व के बाद द्वितीय विश्वयुद्व के बादल मंडराकर अपनी विभीषिका के चिहन छोड़ गये थे। द्वितीय विश्वयुद्व के जो जनसंहार और शहरों की तबाही हुई थी, उसे देखते हुए संसार के सभी देशों के युद्व से नफरत थी भावना उपजी और इस बात का विचार किया जाने लगा कि कोई ऐसा विश्व व्यापी संगठन बने जो निरकुंश देशों पर अंकुश लगाने के अधिकार से युक्त हो। इस तरह संयुक्त राष्ट्र (युनाइटेड नेशन्स आॅर्गेनाइजेशन) की स्थापना हुई। आरम्भ में कुछ ही देश इसमें शामिल हुए। आगे चलकर सदस्य देशों की संख्या बढ़ती गयी। आज संयुक्त राष्ट्र संघ या यू0एन0ओ0 विश्व में शान्ति का सबसे बड़ा संगठन है। भारत यू0एन0ओ0 के सदस्य देशों मे से एक है।

                                संयुक्त राष्ट्र संघ क्या है?- संयुक्त राष्ट्र संघ एक ऐसा संगठन है जिसका प्रमुख उद्देश्य अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा बनाये रखना है। संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्तुबर, 1945 को हुई थी। 1946 से इसका प्रधान कार्यालय बना जो न्यूयार्क में है। इसके सदस्यों की वर्तमान संख्या 191 है। यह संगठन अपने प्रायोजकों की कल्पना के अनुरूप सहज रूप में सार्वभौमिक संगठन है। इसके सदस्य देशों की संख्या लगातार बढ़ रही है- अनेक देशों के सदस्य बनने के आवेदन विचाराधीन है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के सिद्धान्त-सयुक्त राष्ट्र में निम्नलिखित मौलिक सिद्धान्तों का समावेश किया गया तो जो इस प्रकार हैं।

(1) इसका प्रमुख आधार सभी देशों की समानता एवं सम्प्रभुता का सिद्धान्त है।

(2) प्रत्येक सदस्य अन्तराष्ट्रीय विवादों कका निपटारा शान्तिपूर्ण ढंग से करेंगे।

(3) यह संगठन किसी भी देश के अन्दरूनी मामलें में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

स्ंायुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय- इस संगठन का मुख्यालय सं0रा0 अमंरिका स्थित न्यूयार्क में है। यह मुख्यालय मैनहटन द्वीप में बना 39 मंजिना 17 एकड़ जमीन मंे फैला हुआ है। इस मुख्यालय मंे लगभग 10,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। 1952 मंे आम सभा की पहली बैठक इसी मुख्यसलय में हुई थी।

भाषाएं-संयुक्त राष्ट्र संघ मंे निन्न छः भाषएं मान्यता प्रात्प हैं। अंग्रेजी, फें्रच, चीनी, रूसी, अरबी, स्पेनिश आदि। अंग्रेजी एंव फे्रंच इसकी कार्यकारी भाषा है।

ध्वज-हल्की नीली पृष्ठभूमि पर ऊपर से खुली दो जैतून की बक्राकार शाखाओं के बीच स्थित विश्व का मानचित्र यू0एन0ओ0 के ध्वज का प्रतीक है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख अंग- संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं, जो इस प्रकार है-

(1) आम सभ-यह संयुक्त राष्ट्र संघ का सर्वाधिक वृहत एंव महत्वपूर्ण अंग है। आप सभा को संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी सदस्यों को बुलाने प्रत्येक राष्ट्र को एकमत करने का अधिकार प्रप्त है। आय-व्यय की बैठक वर्ष में एक बार अवश्य होती है। संयुक्त राष्ट्र का आय-व्यय आम सभा द्वारा ही स्वीकृत किया जाता है।

सुरक्षा परिषद्-सुरक्षा परिषद् के अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा का परहेज माना जाता है। इसकी शक्ति आम सभा की अपेक्षा अहुत व्यापत होती है। सुरक्षा परिषद् का अस्तित्व है, तब तक इन पांचों की स्थायी सदस्यता बनी रहने का प्राविधान है।

(3) आर्थिक और समाजिक परिषद्-आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् एक स्थयी संस्था है। इसके एक-तिहाई सदस्य प्रतिवर्ष पद्मुक्त होते हैंै। इस परिषद् की बैठक वर्ष में दो बार अप्रैल एवं जुलाई में क्रमाशः न्यूयार्क एवं जेनेवा में होती है। इसे अन्तर्राष्टीय हित में आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक स्वास्थ्य तथा सम्बन्धित मामलों का अध्ययन करने का अधिकार प्राप्त है।

(4) न्याय परिषद्- न्याय परिषद् के द्वारा उन राष्ट्रों के प्रशासन एवं सुरक्षा से सम्बन्धित दायित्व पर विचार होता है जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भी स्वतन्त्र नहीं हो पाये हैं।

(5) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय-यह संयुक्त राष्ट्र संघ तथा सुरक्षा परिषद् द्वारा अलग-अलग चुने जाते है। इनका कार्यकाल 3 वर्ष का होता है। यह न्यायालय किसी विवाद के विषय पर विवादग्रस्त देशों द्वारा मामला उपस्थित किये जाने पर इसके सम्बन्ध में निर्णय देता है। इस न्यायालय का निर्णय सर्वोपरि होता है। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य विश्व के देशों की आम जनता को स्वास्थ्य की उच्चतम सम्भव दशा को सुधारना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्य कार्य विकासशील देशों के हित में छुआछूत से फैलने वाली बीमारियों एवं महामारियों की रोकथाम करना है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष- इसकी स्थापना 27 दिसम्बर, 1945 को हुई तथा। मार्च, 1947 से इसने अपना कार्यभार शुरू किया। इसका मुख्यालय वाशिंगटन डी0 सी0 में स्थित है। इसका मुख्य उद्देश्य अन्तर्राष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग को उन्नत करना, अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को बढावा देना है।

यूनेस्को- ’युनेस्को’ ’’संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन’’ का सक्षिप्त नाम है। इसकी स्थापना 14 दिसम्बर, 1946 को हुई थी। इसका मुख्यालय पेरिस (फ्रंस) में है। इसका मुख्य उद्देश्य शान्ति एवं सुरक्षा के लिये सदस्य देशों को योगदान देना है।

विश्व डाक संघ-दसकी स्थापना 1 जुलाई, 1875 को हुई तथा दसका मुख्यालय बर्न (स्विट्जरलैण्ड) में है। इसका मुख्य उद्देश्य डाक-व्यवस्था में सुधार करना तथा उसे अधिक सक्षम बनाना है।

अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन- इसकी स्थापना प्रथम विश्व युद्ध के बाद 11 अप्रैल, 1919 को हुई थी। इसका मुख्यालय जेनेवा (स्विट्जरलैण्ड) में है। यह विश्व में मौलिक और सरकार के विविध सहयोग का प्रस्ताव करने वाला सबसे बडा संगठन है। यह संगठन अन्तराष्ट्रीय सम्मेलनों द्वारा मजदूरों के हित में कार्य करता है।

विश्व शान्ति में भूमिका-संयुक्त राष्ट्र संघ विश्व में समृद्ध, सम्पन्न एवं शक्तिशाली राष्ट्रों का संगठन है। इसका गठन जिस उद्देश्य के लिए किया गया था, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, उस उद्देश्य मंे प्रभावी भूमिका निभाई गयी है। संसार की आज की पृष्ठभूमि मंे जब रूस (सोवियत रूस) के टुकडे़ हो चुके है, चीन ने तटस्थता की नीति आपना रखी है, इस स्थिति में अमेरिका, ब्रिटेन तथा फ्रांस देश अपनी शक्ति सर्वोपरि बना चुके है। ईराक पर थेपें गये अमेंरिकी युद्ध को यू0एन0ओ0 पर रह गया है। यह विश्वशान्ति प्रक्रिया में भूमिका उपरोक्त तीन रष्ट्रो की मोहताज होकर रह गयी है।

उपसंहार-शक्ति सन्तुलन के बाद भी यू0एन0ओ0 को जो अभिकरण (विभाग) पूरे संसार में जो भी कल्याणकारी कर रहे हैं उसकी मुक्त कंठ से हर देश द्वारा सराहना सरल है। विश्वशान्ति और विश्वकल्याण के लिए यह संस्था अपनी प्रभवी भूमिका निभा रही है।

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