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Hindi Essay on “Pratahkal ki Sair” , ”प्रातःकाल की सैर ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

प्रातःकाल की सैर 

Pratahkal ki Sair

अथवा

प्रातःकालीन भ्रमण

Pratah Kaleen Bhraman

Essay No. 01

                मनुष्य के लिए प्रातःकाल की सैर उतनी ही सुखदायक व रोमाचंकारी होती है उतनी ही स्वास्थयवर्धक भी। व्यक्ति के अच्छे स्वास्थय के लिए प्रातःकालीन भ्रमण अत्यंत आवश्यक है। यह शरीर में नवचेतना व स्फूर्ति का संचार करता है। शारीरिक व मानसिक दोनों ही रूपों मंे यह स्वास्थयवर्धक है। चिकित्सा शास्त्रियों की राय है कि बीमार, वृद्ध तथा अन्य लाचार व्यक्ति यदि व्यायामक के अन्य रूपों को नहीं अपना पाते है तो वे प्रातःकाल की सैर कर अपना काम चला सकते हंै। इस सैर से शरीर के बिगड़े हुए आंतरिक अवयवों को सही ढंग से कार्य करने में बहुत मदद मिलती है।

                                शहरों एवं महानगरों में प्रातःकालीन भ्रमण के लिए जगह-जगह पर हरे-भरे पेड़-पौधों से युक्त पार्क बनाए गए हैं। जहाँ पर पार्क की सुविधा नहीं होती है वहाँ लोग सड़कों के किनारे पर लगे वृक्षों के समीप से होकर टहलते हैं गाँवों मे इस प्रकार की समस्या नहीं होती है। वहाँ शहरों की भाँति मोटरगाड़ियाँ नहीं होती अतः जिस ओर निकल जाएँ उधर ही शुद्ध वायु प्राप्त होती है।

                                सभी जानते है कि हमारे लिए आॅक्सीजन बहुत महत्वपूर्ण है। दिन के समय तो यह मोटरगाड़ियों आदि के धुएँ से मिलकर प्रदुषित हो जाती है। दोपहर व अन्य समय में शुद्ध आॅक्सीजन का मिलना दुष्कर हो रहा है। अतः प्रातःकाल सर्वथा उपयुक्त होता है। प्रातःकालीन भ्रमण से मनुष्य अधिक मात्रा में आॅक्सीजन ग्रहण करता है। इससे शरीर में उत्पन्न अनेेक विचार स्वतः ही दूर हो जाते हैं। साथ ही साथ शरीर की माँसपेशियाँ भी कार्यरत हो जाती हैं तथा रक्त का संचार सामान्य हो जाता है। इसके फलस्वरूप मनुष्य आंतरिक रूप से अच्छे स्वास्थय एवं चैतन्यता का अनुभव करता है। उच्च रक्तचाप, पेट की समस्याएँ, मधुमेह आदि रोगियों को चिकित्सक खूब सैर करने या पैदल चलने की सलाह देते हैं। मधुमेह को नियंत्रित करने की तो यह रामबाण दवा है।

                                सुबह के समय प्रकृति की सुदंरता देखते ही बनती है। उगते हुए सूरज की लालिमा समस्त अंधकार को मिटा देती हैं। वृक्षों पर बैठी कोयल का मधुर गाना सभी के मन को मोह लेता है। आकाश में स्वच्छंद गति से उड़ते एवं चहचहाते पक्षियों का समूह नवीनता का संदेश देता है। सुबह की मंद-मंद बहती सुगंधित हवा शरीर को नई ताजगी प्रदान करती है। सुबह के समय हरी-हरी घास पर ओस की बूँदें ऐसी प्रतीत होती हैं जैसे प्रकृति ने उन बूँदों के रूप में मोती बिखेर दिए हों।

                                पार्क व बगीचों में चहल-पहल देखते ही बनती है। बच्चे, बूढ़े तथा युवा सभी वर्ग के लोग यहाँ दिखाई देते हैं। लोग भ्रमण के साथ अनेक विषयों पर बातचीत भी करते हैं जिससे नई जानकारियों के साथ परस्पर मेल भी बढ़ता है। बच्चे अनेक प्रकार के खेलों का आनंद उठाते हैं। प्रातःकालीन शुदध व सुगन्धित वायु तथा विभिन्न प्रकार के खेल उनके शारीरिक व मानसिक विकास में सहायक होते हैं। वे अन्य बच्चों की अपेक्षा स्फूर्तिवान व कुशाग्र बुद्धि के होते हैं। कुछ लोग प्रातःकालीन भ्रमण को समय का दुरूपयोग मानकर उसे जीवन भर टाल देते है। दिन चढ़ने पर उठना, फिर बिना हाथ-मुँह धोए ही चाय पीने में ही उनका समय नष्ट होता है, इसे वे समझ नहीं पाते हैं। ऐसे लोग प्रकृति के कई मूल्यवान उपहारांे से वंचित हो जाते हैं।

                                इस प्रकार हम देखते है कि प्रातःकालीन भ्रमण बच्चे, बूढ़े व युवा सभी के लिए अनिवार्य है। यह हमारे शरीर मंे नई स्फूर्ति, नई चेतना व नया उल्लास प्रदान करता है। सुबह की शुद्ध व सुगंधित वायु शरीर के अनेक विकारों को दूर करती है। प्रातःकालीन मनोरम दृश्य अत्यंत सुखद प्रतीत होता है। इस प्रकार दिन की अच्छी शुरूआत मनुष्य को अधिक स्वस्थ एवं प्रसन्न रखती है जिससे वह अपनी क्षमताओं का पूर्ण रूप से उपयोग कर सकता है।

 

प्रातः काल की सैर

Essay No. 02

सैर-सपाटा करके खुश होना मनुष्य का पैदायशी स्वभाव है। एक प्रकार का शौक भी है। इस स्वभाव और शौक को पूरा करने के लिए लोगों को महीनों अपने घरों से दूर, दुर्गम स्थानों पर भटके हुए देखा जा सकता है। सच तो यह है कि सैर-सपाटा जहाँ आनन्द प्रदान करता है, वहाँ ज्ञान भी बढ़ाता है। एक सीमा तक वह स्वास्थ्य रक्षक और वर्द्धक भी है। लेकिन हम यहाँ जिस ‘प्रातः काल की सैर’ के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं, उसका उद्देश्य मात्र मनोरंजन एवं आनन्द ही नहीं है, बल्कि मुख्य उद्देश्य एक प्रकार की व्यायाम करके तन, मन, आत्मा को स्वस्थ एवं प्रसन्न रखना है।

यह बात केवल कही ही नहीं जाती; बल्कि एक प्रकार का परीक्षित सत्य है कि पूरी तरह से स्वस्थ व्यक्ति ही हर प्रकार का इच्छित कार्य कर सकता है। वह कार्य अपना काम धन्धा करना, धर्म-कार्य करना, देश और समाज की सेवा करना, पढ़ना-लिखना आदि कोई भी, कितनी भी तरह का हो सकता है; स्वास्थ्य-रक्षा के लिए व्यायाम करना आवश्यक है। व्यायाम कई प्रकार के हैं और हो सकते हैं। खेल-कूद, दण्ड-बैठक, उछलना-कूदना, नाचना, तैरना, दौड़ना आदि अपनी इच्छानुसार किसी भी तरह का व्यायाम करके आदमी स्वस्थ रह सकता है। स्वस्थ रह कर अपना हर इच्छित कार्य पूरा सफलता के साथ पूर्ण करके जीवन को सुखी तथा आनन्दमय बना सकता है। कुछ लोग ऐसे भी हुआ करते हैं जो ऊपर बताए गए व्यायामों में से कोई भी नहीं कर सकते या करना नहीं चाहते। यह भी हो सकता है कि उनका शरीर, उन की परिस्थितियाँ वैसा कर पाने में सहायक न हों । ऐसे लोगों के लिए ‘प्रातः काल की सैर सबसे श्रेष्ठ एवं महत्त्वपूर्ण व्यायाम का व्यायाम और मनोरंजन का मनोरंजन स्वीकार किया जाता है।

प्रातः काल की सैर के अनेक लाभ माने जाते हैं। सब से मुख्य लाभ तो यह है कि सुबह-सवेरे यदि सर्योदय से सर्योदय से पहले सैर करके व्यक्ति शुद्ध ऑक्सीजन यानि प्राण वायु प्राप्त कर सकता है। प्राकृतिक नियम से उस समय वृक्ष और वनस्पतियाँ ऑक्सीजन छोडा कि जो प्रत्येक प्राणी की प्राण-रक्षा के लिए बहुत जरूरी है। शुद्ध ऑक्सीजन की राह फेफड़ों में भर कर जीवन-शक्ति को बढ़ाती है। इससे व्यक्ति का शरीर -मस्तिष्क आदि सभी तरो-ताजा हो जाया करते हैं। तन-मन-आत्मा सभी प्रसन्नता भर जाते हैं। आलस्य दूर भाग जाता है। तब आदमी दिन भर के लिए तरो-ताजा होकर अपना हर कार्य सन्तुष्टि और प्रसन्नता से कर पाता है। उसे किसी प्रकार की ऊब या निराशा से दो-चार नहीं होना पड़ता। परिश्रम से जी भी नहीं चुराना होता। इस प्रकार स्वस्थ रह कर परिश्रम करने वाला व्यक्ति अपने प्रत्येक कार्य में, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल रहा करता है, इस बात में तनिक भी सन्देह नहीं । सफलता से बड़ी कोई उपलब्धि भी नहीं, यह भी स्पष्ट है।

प्रातः काल की सैर के कुछ कायदे-कानून भी हैं। सब से पहली बात तो यह कि सैर सूर्योदय से पहले ही होनी चाहिए। सूर्य निकल आने के बाद उसका कोई महत्त्व, कोई लाभ नहीं रह जाया करता। दूसरे सैर हमेशा खुले, हरे-भरे वातावरण और वायु-मण्डल में ही की जानी चाहिए। तीसरे सैर करते समय आप को समय की चाल स कुछ तेज चलना जरूरी होता है। चलते समय पैरों के साथ-साथ बाजुओं का आगे-पीछे हिलना-डुलना आवश्यक है। साँस भी कुछ तेज़ खींच कर धीरे-धीरे छोड़नी चाहिए। यदि सम्भव हो सके, तो चलते-फिरते या कहीं रुक कर हल्का व्यायाम या थोड़ा योगासन कर लेना बड़ा लाभदायक हुआ करता है। प्रातः काल की सैर के समय अधिक बोलना या बातचीत करना तो अच्छा नहीं माना जाता, हाँ; यदि ज़ोर से खिलखिला कर हँसा जा सके, तो बहत ही अच्छा माना जाता है। इस से आदमी के फेफड़ों, सीने, कंठ आदि की भी आवश्यक व्यायाम हो जाया करती है। प्रातःकाल की सैर करने के इच्छुक लोगों को इन कायदे-कानूनों का ध्यान रखने पर दोहरा लाभ प्राप्त हो सकता है, इसमें सन्देह नहीं. सैर करते समय मन-मस्तिष्क पर किसी तरह का बोझ या दबाव रखना अच्छा नहीं माना जाता।

प्रातः काल सैर के लिए उपयुक्त स्थान का चयन भी अच्छा है। स्थान खुला और हर प्रकार से साफ-सुथरा होना चाहिए। हरी घास और उस पर पडी ओस पर नंगे पैर चलना दिल, दिमाग सभी को ताजगी और ताकत देने वाला होता है। आँखों की रोशनी भी बढ़ाता है। अतः जहाँ हरी घास, ओस आदि सुलभ हो, वहाँ सैर करनी चाहिए। इसके लिए नदियों-नहरों, खेतों का किनारा (पेड़), पार्क, बाग-बागीचे आदि भी अत्यन्त उपयोगी स्थान माने गए हैं। इनके प्राप्त न होने पर खुली सड़कों पर वृक्षों के नीचे-नीचे भी घमा-फिरा जा सकता है। यदि और कोई स्थान न हो, घर की खुली छत ही सुलभ हो, तो उसका भी लाभ उठाया जा सकता है।

इस प्रकार याद रखें कि स्वस्थ शरीर, मन-मस्तिष्क और प्रसन्न आत्मा से बढ़िया संसार में कोई वस्तु नहीं है। इन सब को प्राप्त करने का एक साधन सुबह की सैर भी है। अत्यन्त सरल, सस्ता और सुलभ उपाय-सुबह की सैर।

 

प्रातःकाल की सैर

Pratah Kal Ki Sair

Essay No. 03

मानव का शरीर एक मशीन की तरह है। इस शरीर रूपी मशीन को ठीक रखने के लिए पौष्टिक भोजन, अच्छी नींद के साथ-साथ व्यायाम भी अत्यंत आवश्यक है। व्यायामों में भी प्रात:काल की सैर अति उत्तम है। यह अत्यंत आनंददायक तो है ही साथ ही स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी है। यह हमारे जीवन को अनुशासित भी करती है। मैं भी नियमित रूप से प्रात:काल सैर को जाता हूँ। सुबह जल्दी उठकर नित्यकर्म से निवृत्त होकर मैं सैर के लिए बाहर जाता हूँ। सुबह की ठंडी हवा जब शरीर में जाती है तो दिमाग एकदम शांत हो जाता है तथा शरीर से रात भर की सारी सुस्ती चली जाती है। सुबह-सुबह चिड़ियों का कलरव अत्यंत सुहावना लगता है। प्रात:काल की सैर शरीर को इतना चुस्त एवं फुर्तीला बना देती है कि सारे दिन सुस्ती या थकान का कोई अनुभव नहीं होता है। मेरा मित्र राजेश भी मेरे साथ प्रात:काल की सैर के लिए जाता है।

सुबह के समय उगता हुआ सूर्य देखकर मन को शांति मिलती है। सुबह की ठंडी वाय हर प्रकार के प्रदूषण से मुक्त होती है। प्रात:काल की सैर व्यक्ति को मानसिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक लाभ भी पहुँचाती है। प्रात:काल की सैर मनुष्य को हृदय रोग, मधुमेह तथा गुर्दे के रोगों से दूर रखने में सहायक होती है। ये सभी बीमारियाँ शरीर में वसा की अधिकता के कारण होती हैं तथा प्रात:काल की सैर शरीर की वसा को कम करती है। साथ ही मनुष्य की देह को सुंदर तथा आकर्षक बनाती है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रात:काल की सैर अत्यंत आवश्यक है। इस भाग-दौड़ भरी दिनचर्या में से मनुष्य को अपने अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रात:काल की सैर के लिए समय अवश्य निकालना चाहिए।

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commentscomments

  1. Vanshika says:

    It will very helpful essays

  2. Aarna says:

    It was nice , my sir told me nice essay you have written

  3. Sefali Kundu says:

    Very nice I like it. Our Hindi teacher has given Holiday Home work this one.👌👌👌👌🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏👍👍👍👍👍👍

  4. Khushi says:

    Very nice 👍👍👍

  5. Very nice 👍👍👍👍

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