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Hindi Essay on “Jeevan me Anushasan ka Mahatva ”, “जीवन में अनुशासन का महत्त्व” Complete Essay, Paragraph, Speech for Class 7, 8, 9, 10, 12 Students.

जीवन में अनुशासन का महत्त्व

Jeevan me Anushasan ka Mahatva 

 

नियमबद्ध और नियन्त्रण में रह कर कार्य करना अनुशासन कहलाता है। अनुशासन मानव जीवन का एक परम आवश्यक और महत्वपूर्ण अंग है। मानव जीवन में अनुशासन का होना अति आवश्यक है। समाज का कोई भी अंग जब अनुशासनहीन हो जाता है तो अव्यवस्था फैल जाती है। विद्यार्थी में अनुशासन का होना तो परमावश्यक है।

जो विद्यार्थी या व्यक्ति अनुशासन में नहीं रह सकता वह जीवन का निर्माण नहीं कर सकता । अनुशासनहीन व्यक्ति जीवन में असफल हो जाता है। जो समाज में अनुशासन में नहीं रहता वह भी अव्यवस्थित हो कर अपनी सत्ता को स्थिर नहीं रख सकता । जिस सेना में अव्यवस्था हो वह सेना भी देश की रक्षा करने में असफल हो जाती है। जिस उद्योगिक केन्द्र के मज़दूर अनुशासनहीन हो जाते हैं, वह भी शीघ्र अवनति की ओर उन्मुख हो कर समाप्त हो जाता है।

संसार में प्रत्येक प्राकतिक वस्तु नियमानुसार अनुशासन में रह कर चल रहा है। सूर्य प्रभात में उदय हो कर सायं अस्ताचल की ओर अग्रसर हो जाता है। रजनी चन्द्रिका से विभषित हो तारों से अपने शरीर को सजा कर आती है और प्रभात काल में उषाकाल की लाली में डूब जाती है। समुद्र अनुशासन में रह कर ही सीमोमलंघन नहीं करता। वायु क्षण भर के लिए भी अनुशासनहीन नहीं होती । ऋत के अनसार पृष्प प्रफुलित हो कर संसार की शोभा बढ़ाते हैं।

आज भारत में जीवन के प्रत्येक पहलू में अनुशासनहीनता दृष्टिगोचर हो रही है। विद्यार्थी की रूचि पढाई की ओर नहीं रही । कभी एक विश्वविद्यालय में कभी दूसरे विश्वविद्यालय में कभी एक परीक्षा केन्द्र में कभी दूसरे परीक्षा केन्द्र में हड़ताल, मार-मीट आदि के समाचार प्रति-दिन का विषय बने हुए हैं। केवल विद्यार्थी ही नहीं समाज के अन्य अंग भी अनुशासनहीनता के केन्द्र बने हुए हैं। प्रति-दिन कारखानों में हड़ताल और सरकार के नियमों का उल्लंघन आदि के समाचार छपते हैं।

मनुष्य जीवन एक अनमोल हीरा होता है। उसे यदि अनुशासन के सांचे में ढाला जायेगा तो यह और भी चमक उठेगा । वैसे भी अनुशासन की लगाम जीवन को नियंत्रित करती है। संयम से आत्म-निष्ठा पनपती है जो उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। अतः यह कहना पूर्णतया उपयुक्त है कि अनुशासन समस्त संसार के मनुष्यों का आधार है, इस के बिना जीना निरर्थक है।

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