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Hindi Essay on “Badhte Apradh” , ”बढ़ते अपराध” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

बढ़ते अपराध

Badhte Apradh

प्रस्तावना- आज बढती महंगाई, बेरोजगारी, फैशन की होड ने समाज के लोगों में काफी लोगों का कुण्ठा से भर दिया। ‘वो हमारे पास नहीं, जो पडोसी के पास है‘ इस सोच ने लोगों में मन की शान्ति छीन ली है; जिसके कारण लोग बेईमानी से धन कमाने की ओर उन्नमुख हो रहे है। बेईमानी की यह प्रवृत्ति अन्य अपराध को जन्म देती है। युवा वर्ग अपनी आवश्यकता पूर्ति के लिए महिलाओं से ‘चेन पुलिंग‘ बलात्कार चोरी, हत्या डकैती की राह बढते चले जा रहे है। आतंकवादी बनने, उग्रवाद के रास्ते पर चलने की प्रवृति भी हताश और लालसा का परिणाम है। यह रास्ता समाज और देश के भविष्य के लिए नितांत घतक है।

अपराधयुक्त समाज की अवधारणा- अपराधयुक्त समाज में प्रयासरत लोगों द्वारा अपराध पर नियन्त्रण करने की बात तो समय-समय पर की जाती है लेकिन अपराधयुक्त की सम्भावनाएं कम ही रहती है।

देश को अपराधयुक्त करने के लिए हमारी शासन व्यवस्था को सख्ती से कार्य करना होगा और अपराधिक प्रवृतियों वाले इन्सानों को कठोर दण्ड देना होगा जिससे उनमें यह भय उत्पन्न हो। जिससे यह सोच बने कि यदि हम अपराध करेंगे और भविष्य में पकडे गए तो हमारे साथ भी शासन द्वारा सख्ती से बर्ताव किया जायेगा। इस प्रकार हमारी शासन व्यवस्था को आपराधिक प्रवृति वाले इन्सानों में खौफ का वतावरण बनाना होगा तभी जाकर देश में अपराध काम होगा और जनता सुख -चैन की नींद व्यतीत कर सकेगी।

यदि समाज अपराधयुक्त होगा तो देश के कानून व्यवस्था और आर्थिक दशा सुदृढ होगी और समाज प्रगतिशील होगा।
राष्ट्र को विकसित एवं अपराधयुक्त करने के लिए ऐसी कानून व्यवस्था की आवश्यकता है जिससे देश एवं समाज अपराध से भयमुक्त हो सके।

अपराध बढने के मुख्य कारण

(1) देश की कानून व्यवस्था- किसी भी देश की अव्यवस्थित कानून व्यवस्था चुस्त-दुरूस्त रखने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है। आज जिला प्रशासन स्वयं अपराध में लिप्त हो रहा है। प्रशासन में कई बडे एवं छोटे ऐसे अफसर हैं जो अपराधियों द्वारा घूंस लेते हैं जिस कारण अपराधी नई-नई आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं; बाद में पुलिस वाले हाथ-पर-हाथ धरे बैठे रहते हैं जिस प्रकार देश अपराधमुक्त होने के स्थान पर अपराधयुक्त होता है। इसे रोकने के लिए कानून व्यवस्था में सख्ती की आवश्यकता है। प्रशासनिक अधिकारियों को ईमानदार होना आवश्यक है। ऐसा होने पर अपराध स्वतः रूकेगा।

(2) अल्प जनचेतना- कानून व्यवस्था के अतिरिक्त अल्प जनचेतना व सजगता देश को भी अपराध मुक्त करने में बाधा उत्पन्न करती है। आज हम अपनी प्रचीन गौरवशाली परम्पराओं से दूर हो रहे है। हम स्वयं को पहचान नहीं पा रहे है। हमारे स्वाभिमान व आत्मविश्वस में निरन्तर कमी आ रही है, हमारे चरित्र में दोहरापन आ गया है जो कि अपराध जैसी असामाजिक घटना को न केवल बढावा दे रहा है, अपितु इस पर नियन्त्रण में अवरोध भी पैदा कर रहा है। इस अवरोध को दूर करना आवश्यक है। जनचेतना जगाने पर अपराध रोके जा सकते है।

(3) राजनीति का अपराधीकरण- वर्तमान समय में राजनीति व अपराध में जबरदस्त सामंजस्य स्थापित हुआ है। अपराधी धीरे-धीरे राजनिति में आ रहे है तथा महत्वपूर्ण पद संभाल रहे है। इस प्रकार आज देश की शासन व्यवस्था आपराधिक लोगों के हाथ में जा रही है।

नेता और अपराधियों में गठबन्धन ने स्थिति को अत्यन्त विकृत और नारकीय बना दिया है। मतदाताओं को चाहिये कि अपराध वृत्ति या अपराधिक इतिहास रखने वाले चुनाव में उतरने वाले लोगों को वोट न देकर उनका बहिष्कार करें।

(4) भ्रष्टाचार-वर्तमान समय में देश में भ्रष्टाचार तीव्र गति से बढ रहा है। संसद के सडक तक भ्रष्टाचार के नमूने देखने को मिलते है। जगह-जगह भ्रष्टाचार अपने पांव फैला रहा है। कोर्ट-कचहरी हा या हाकिम की चैखट, सभी जगह भ्रष्टाचार का बोलबाला है। सच्चे अर्थो में भ्रष्टाचार अपराध के लिए एक मुख्य कारण बन गया है।

यह भ्रष्टाचार का नतीजा है कि जेल में अपराधियों का सभी प्रकार की सुख-सुविधाए उपलब्ध कराई जाती है। उन्हे जेल में ही अच्छा खने-पीने एवं पहनने की व्यवस्था की जाती है। फोन, मोबाइल तथा हथियारों को भी वे हासिल करके जेल से ही अपने अपराध की बादशाहत चलाते है।

उपसंहार- इस कुप्रवृति से बचाव के लिए सख्त कानून और सजगता की आवश्यकता है। अपराधियों के विरूद्ध अदालतों में शीघ्र निर्णय होना चाहिये ताकि पीडितों को न्याय और अपराधियों को कठोर दण्ड मिल सके। उपरोक्त बिन्दुओं पर ध्यान देने पर अपराध पर नियन्त्रण और अपराधमुक्त समाज की कल्पना साकार हो सकेगी।

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