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Hindi Essay, Moral Story “Angoor Khatte hai” “अंगूर खट्टे हैं” Story on Hindi Kahavat for Students of Class 9, 10 and 12.

अंगूर खट्टे हैं

Angoor Khatte hai

गाँव से लगा हुआ एक जंगल था। जंगल में जगह-जगह चौरस जमीन थी, जिस पर खेती होती थी। बाग-बगीचे थे। उसी जंगल में एक लोमड़ी रहती थी। एक दिन वह हिरन की तरह चौकड़ी भरती हुई मेड़ों और खेतों को पार करती चली जा रही थी। जब वह एक बाग के पास से निकली, तो थोडा ठिठकी। वहां उसे लगा कि बाग से मीठी-मीठी महक आ रही है। थोड़ी देर रुककर वह उस महक का आनंद लेने लगी। लोमड़ी ने आंखें भिचमिचाई और उस ओर चल पड़ी, जिधर से मीठी महक आ रही थी।

चलते-चलते वह एक पेड़ के नीचे आकर रुक गई। उसने देखा कि पेड़ के चारों ओर अंगूर की लताएं चढ़ी हुई हैं, और पेड़ की निचली डालियों पर फैली हुई हैं। चारों तरफ तेज मीठी गंध फैली है। उसने ऊपर देखा, तो उसके मुंह में पानी भर आया। लताओं में रस भरे अंगूरों के बहुत-से गुच्छे लटक रहे थे। वह ललचाई आंखों से देखती रही।

वह एक ऐसे गुच्छे की तलाश में इधर से उधर घूमती रही, जिसको वह आसानी से तोड़ सके। वह एक गुच्छे के नीचे आकर रुक गई। लोमड़ी ने उस गुच्छे को तोड़ने के लिए एक के बाद एक उछालें लगाना शुरू कर दीं। गुच्छा ऊंचा था, इसलिए वह तोड़ नहीं पाई। वह थककर बैठ गई।

थोड़ी देर सुस्ताने के बाद उसकी जान में जान आई। उसने अंगूरों को तोड़ने के लिए फिर उछालें लगाना शुरू कर दी। इस बार भी उसे निराशा हाथ लगी। अंत में वह थककर चूर-चूर हो गई। वह समझ गई थी कि अब अंगूर नहीं मिल पाएंगे। फिर भी वह अंगूरों को लगातार देखे जा रही थी।

वहीं पास के एक झुरमुट की आड़ में एक सियार बैठा था। वह लोमड़ी की उछल-कूद को देख रहा था। लोमडी अब बैठी-बैठी अंगूरों को देख रही थी। सियार दबे-पांव निकलकर लोमड़ी के सामने खड़ा हो गया। सियार ने पूछा, “मौसी क्या बात है? उदास-उदास-सी बैठी हो। ऊपर क्या देख रही हो? अंगूर बहुत मीठे हैं। तुम खा चुकी हो क्या?”

लोमड़ी थोड़ा झिझकते हुए बोली, “अरे तुझे क्या पता। अंगूर खट्टे हैं? तुझे महक से नहीं लगता? मैं तो सुस्ताने के लिए छाया में बैठी हूं।”

सियार ने लोमड़ी की आंखों में झांका, तो वह सिटपिटा गई और उठकर धीरे-धीरे चलने लगी। सियार मुस्कराया और सोचने लगा-कितनी देर से तो उछल-कूद कर रही थी। जब अंगूर नहीं तोड़ सकी, तो कहती है, ‘अंगूर खट्टे हैं’। समझती है, किसी ने कुछ देखा ही नहीं।

सियार भी मुस्कराता हुआ दूसरी ओर चल दिया।

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