Delhi – Bharat Ka Dil “दिल्ली – भारत का दिल” Hindi Essay, Paragraph, Speech for Class 10, 12 Examination.
दिल्ली – भारत का दिल
Delhi – Bharat Ka Dil
भूमिका, दिल्ली की ऐतिहासिकता, दर्शनीय स्थल, उपसंहार
भारत एक विशाल देश है। इसमें कई प्रदेश हैं। प्रत्येक प्रदेश में कई नगर हैं। प्रत्येक नगर का अपना विशेष महत्त्व है। कोई प्राकृतिक दृष्टि से अपना महत्त्व रखता है तो कोई सांस्कृतिक दृष्टि से गरिमापूर्ण है। कोई औद्योगिक दृष्टि समृद्ध है तो कोई धार्मिक स्थान होने के कारण देशवासियों के लिए वंदनीय है। कोई ऐतिहासिक यादों को संजोए होने के कारण देश-विदेश के लोगों को आकृष्ट करता है तो कोई राजनीतिक हल-चल के कारण आकर्षण का केंद्र है। लेकिन दिल्ली भारत का ऐसा विशाल नगर है जो अनेक दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण है । यह भारत की राजधानी है । यह उसका दिल भी है और धड़कन भी। यह एक ऐसा दर्पण है जिसमें समग्र भारत का चित्र दिखाई देता है। यह राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक रंगमंच है जो अन्यत्र कहीं दिखाई नहीं देता ।
यह सोने का नगर, यह पृथ्वी की अलकापुरी, रेशम की डोरी से बंधी दिल्ली कभी फूलों की सेज पर सोई है तो कभी कांटों का ताज पहन कर रोई है। कभी दुल्हन की तरह सजी है तो कभी इसके माथे का सिंदूर भी मिटा है। ऐतिहासिक दृष्टि से इसे अनंगपाल और पृथ्वीराज की दिल्ली कहा जा सकता है। यवन बादशाहों ने भी यहां अपनी कूटनीति का जाल बिछाया है। कुछ राजवंशों ने इसे संवारा है तो शक, हूण, कुषाण, जैसे लुटेरे आक्रमणकारियों ने इसे लूटा और उजाड़ा भी है। तैमूर और नादिरशाह के जन-संहार का करुण दृश्य भी इसी दिल्ली ने देखा है।
देश-विदेश के अनेक शिल्पियों ने दिल्ली के सौंदर्य में वृद्धि की है। यहां के कण-कण में इतिहास की गूंज सुनाई देती है। जब अंग्रेज़ी साम्राज्य का सूर्य चमकता था तब उसका दरबार दिल्ली में ही सजा था। अंग्रेज़ सरकार ने यहां अपनी प्रतिमाएं सजा कर अपने गौरव को बढ़ाने का प्रयत्न किया पर वे नहीं जानते थे कि इस दिल्ली के असली स्वामी भारतवासी हैं। यहीं पर अंग्रेज़ों के विरुद्ध नारे गूंजे, हड़तालें हुईं। गांधी, जवाहर तथा अन्य देशभक्तों ने स्वतंत्रता की मांग का नारा बुलंद किया और अंत में अंग्रेज़ों को यहां से हमेशा के लिए विदा लेनी पड़ी। स्वतंत्रता के बाद हमारे नेताओं ने इस नगर का पुनरुद्धार किया है। यहां विदेशीयता के चिह्नों को
समाप्त कर भारतीयता के चिह्न स्थापित किए गए हैं। यह नगर देश-विदेश के लोगों के भ्रमण का केंद्र है । अतः भारत सरकार इसे अधिक-से-अधिक सुंदर बनाने के लिए प्रयत्नशील रहती है। यहां की सड़कें इतनी विशाल हैं कि इन पर प्रत्येक प्रकार का वाहन चल सकता है। सड़कों के दोनों ओर हरे-भरे विभिन्न फूलों के पौधे हैं। प्रत्येक सड़क एक भव्य वाटिका का दृश्य प्रस्तुत करती है। इन सड़कों पर स्कूटरों, टैक्सियों, बसों, कारों तथा ट्रामों की दौड़ हमेशा दिखाई देती है ।
इस ऐतिहासिक नगर का प्रत्येक अंग दर्शनीय है। ऐतिहासिक भवनों की दृष्टि में तो यह नगर अतुलनीय है। लाल किला, कुतुबमीनार, जंत्र-मंतर, हुमायूं का मकबरा, जामा मस्जिद, सीसगंज, बिड़ला मंदिर आदि प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। यहां के बाज़ारों का अपना आकर्षण है। इनकी साज-सज्जा पर लुब्ध होकर लोग हमेशा घूमते दिखाई देते हैं । चांदनी चौक तथा कनाट प्लेस की सज-धज देखने योग्य है। यहां के मैदानों की हरी-भरी मखमली घास आँखों तथा पैरों दोनों के लिए सुखद है। यहां का चिड़ियाघर यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां विभिन्न खेलों के खेलने के लिये भव्य तथा विशाल क्रीड़ा क्षेत्र हैं। यहां कपड़ों की मिलें तथा अन्य बड़े-बड़े उद्योग हैं। एशियाई खेलों के सफल आयोजन ने दिल्ली की सुंदरता को चार चाँद लगा दिये हैं।
दिल्ली समन्वय का पाठ भी पढ़ाती है। यह विभिन्न धर्मों, संप्रदायों तथा राजनीतिक दलों का संगम है। यहां संपन्नता और निर्धनता दोनों की चरम सीमा दिखाई देती है। दिल्ली अनेकता में एकता का सजीव उदाहरण है ।






















