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Archive by category "Languages" (Page 984)
विज्ञान और मानव-कल्याण या विज्ञान एक वरदान निबंध नंबर :- 01 शास्त्र, साहित्य, कला, सभी प्रकार के ज्ञान-विज्ञान तथा अन्य जो कुछ भी इस विश्व में अपने सूक्ष्म या स्थूल स्वरूप में विद्यमान है, उन सबका एकमात्र एंव अंतिम लक्ष्य मानव-कल्याण या हित-साधन ही है। इससे बाहर या इधर-उधर अन्य कुछ भी नहीं। इससे भटकने वाले, इधर-उधर होने वालीं प्रत्येक उपलब्धि, योजना और प्रक्रिया अपने आपमें निरर्थक और इसलिए त्याज्य है।...
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June 22, 2017 evirtualguru_ajaygoureVirtualGuru, Hindi (Sr. Secondary), Languages2 Comments
अच्छा स्वास्थ्य महावरदान या अच्छे स्वास्थ्य के लाभ अंग्रेजी में एक कहावत है स्वास्थ्य ही सच्चा धन है। ध्यान से, व्यवहार की दृष्टि से वचिार करने में स्पष्ट हो जाता है कि कहावत में कही गई बात एकदम सत्य है। अच्छे स्वास्थ्य को सच्चा धन या महावरदान मानने में कुछ भी झूठ या अतिशियोक्ति नहीं है। वह इसलिए कि स्वस्थ व्यक्ति ही इस संसार और जीवन में इच्छित कार्य पूरे कर...
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June 22, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
मजहब नहीं सिखाता आपास में बैर रखना सभी धर्म या मजहब महान मानवीय मूल्यों को महत्व देते हैं। किसी भी मजहब या धर्म का संबंध व्यक्ति के मस्तिष्क या तर्क-शक्ति के साथ नहीं, बल्कि हदय और भावना के साथ स्वीकार किया जाता है। इसी कारण भावना प्रवण व्यक्ति किसी तर्क-वितर्क पर ध्यान न दे प्राय: भावनाओं में ही बहता जाता है। भावनाओं में बहाव व्यक्ति के सतर पर तो बुरा नहीं,...
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June 22, 2017 evirtualguru_ajaygourLanguages, NCERTNo Comment
मन के हारे हार है Man ke Hare Haar Hai Best 4 Hindi Essay on ” Man Ke Hare Haar Hai” निबंध नंबर : 01 मन क्योंकि सभी इच्छाओं का केंद्र है, सभी दृश्य-अदृश्य इंद्रियों का नियामक और स्वामी है। अत: व्यवहार के स्तर पर उसकी हार के वास्तविक हार और जीत को सच्ची जीत माना जाता है। इसलिए मन पर नियंत्रण और मन की दृढ़ता की बात भी बार-बार कही...
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June 22, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
यदि मैं शिक्षक होता Yadi mein Shikshak Hota निबंध नंबर : 01 हर युग में शिक्षा का महत्व रहा है। जब तक धरती पर मनुष्य का जीवन रहेगा, तब तक शिक्षा का महत्व भी बना रहेगा। इसमें तनिक सा भी संदेह नहीं। शिक्षा को प्रकाश तो कहा ही जाता है, मनुष्य की आंख भी माना जाता है। शिक्षा देने वाले व्यक्ति को शिक्षक कहा जाता है। प्रकाश और आंख होने के...
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June 22, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages8 Comments
मेरी जीवनाकांक्षा या मेरी इच्छा बुद्धिमान और इच्छा-प्रधान होने के कारण ही मनुष्य सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी माना जाता है। स्वभावत: मनुष्य मात्र इच्छा प्रधान ही नहीं, बल्कि महत्वाकांक्षी होता है। सभी की अपनी-अपनी इच्छा-आकांक्षांए रहा करती हैं। विचित्र-विशेष। सभी की तरह ही मेरी जीवकांक्षा भी बड़ी अदभुत है। अदभुत ही नहीं वह रोमांचकारी भी है। यदि मुझे छह मास की छुट्टी मिल जाए और दस-बीस हजार रुपए मिल जांए, तो...
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June 22, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भारत में शिक्षा का प्रसार (Bharat mein Shiksha ka Prasar) शिक्षा शब्द जिस गुरुता को प्रगट करता है उसका महत्व अपरिमेय है। शिक्षा द्वारा मानव मन और वृद्धि का स्वाभाविक विकास होता है। आज के युग में इस किसी परिभाषा विशेष में बांधने का प्रयत्न चांद-तारों तक पहुंच सके। आज शिक्षा का रूप भी कुछ अजीब और अस्पष्ट है। आध्यात्मवाद से पलायनोन्मुख या अदासीन शिक्षा-शिक्षा नहीं हो सकती। एतदर्थ आज कोई...
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June 22, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
Write a letter to the SHO of your area complaining about the number of thefts in your area. The SHO Sajjanpur Police Station East UP May 28, 2006 Sub: Complaint about increasing number of thefts Sir, I want to forward you the complaint against the increasing number of thefts in our area. The vehicular thefts have suddenly increased in the past few months. Inspite of FIRs lodged, no theft has been...
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June 21, 2017 evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), Languages, Letter Writing4 Comments