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Archive by category "Languages" (Page 431)
आधुनिक भारतीय नारी के कर्त्तव्य और आदर्श Adhunik Bharatiya Nari ke Kartvya aur Adarsh नारी व्यापक जीवन और समाज का आधा अंग कहा जाता है। स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले तक परिस्थितिवश उसके जीवन व्यवहारों पर अनेक प्रकार के प्रतिबन्ध लगे हए थे। उसकी तनिक-सी भी चेष्टा को उड़ने का प्रयास मान कर संदेह की नजर से देखा जाता था। उसे प्रायः शिक्षा भी नहीं दी जाती थी। यदि दी भी जाती,...
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November 26, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
निरक्षरता के दुष्परिणाम Niraksharta ke Dushparinam निरक्षरता, अर्थात अक्षर तक का ज्ञान न होना, काला अक्षर भैंस बराबर होना या समझना। आज के ज्ञान-विज्ञान की चरम उन्नति वाले युग में भी किसी देश में शिक्षा का अभाव या निरक्षरता की स्थिति रहना वास्तव में बड़ी ही लज्जाजनक बात है। यों स्वतंत्र होने के बाद भारत में शिक्षा और साक्षरता का काफी प्रचार-प्रसार हुआ है, पर फिर भी संसार के विकसित...
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November 13, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
साक्षरता अभियान Saksharta Abhiyan साक्षरता अभियान अनपढ-अशिक्षित भारत में शिक्षा-प्रचार का एक प्रयास कहा जा सकता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यद्यपि भारत में शिक्षा का प्रचार और विकास काफी हुआ है। शिक्षालयों के बढ़ने के साथ-साथ पढ़-लिख सकने में समर्थ लोगों की संख्या भी काफी बढ़ी है। फिर भी जनसंख्या के अनुपात से अभी तक भारत में शिक्षितों की तो क्या, मात्र साक्षरों अर्थात् अक्षर-ज्ञान रखने वालों की संख्या...
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November 13, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
शिक्षा और बेकारी Shiksha aur Bekari शिक्षा का मूल उद्देश्य आवश्यक तौर पर किसी पढ़े-लिखे व्यक्ति के लिए रोजगार व्यवस्था करना, या बेकारी की मार को दूर भगा कर लोगों को उस से मुक्त कराना कतई नहीं है फिर भी किसी-न-किसी रूप में वह आरम्भ से ही रोजगार जुटाने और बेकारी दूर करने का साधन मानी जाती रही है, ऐसा कहने और मानने में कतई सन्देह की गुंजाईश नहीं। आरम्भ...
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November 13, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भारत की वर्तमान प्रमुख समस्याएँ Bharat ki Vartman Pramukh Samasya एक राष्ट्र को सबल बनने के लिए दूसरे राष्ट्रों से संघर्ष करना पड़ता है। इसके विकास के लिए अनेक समस्याएँ आती हैं। 15 अगस्त, 1947 ई० को जब शिशु (स्वतंत्र भारत) ने जन्म लिया, तभी से अनेक समस्याओं रूपी रोगों ने इसे घेर लिया। इनके समाधान के लिए भारतीय कर्णधारों ने पंचवर्षीय योजनाएँ बनायीं जिन में सात पंचवर्षीय योजनाएँ पूर्ण हो...
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November 13, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
निःशस्त्रीकरण Nishashtrikaran समय परिवर्तनशील है। समय के साथ ही मानव अपने जीवन को सुखी व समृद्ध बनाने का चक्र चलाता रहता है। इस चक्र को चलाने के लिए उसने विज्ञान का सहारा शान की प्रगति के साथ-साथ उसकी युगों की छिपी दानवीय प्रवृत्ति भी जागृत गई। फलतः उसने विध्वंसकारी शस्त्रों का निर्माण आरम्भ कर दिया। इस में ऐसे आणविक शस्त्र व बम भी बने जो विश्व के शक्तिशाली राष्ट्र को क्षणभर...
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November 13, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भारत में हरित क्रान्ति Bharat me Harit Kranti कषि प्रधान देश भारत में खाद्य समस्या के अनेक कारण रहे हैं। इसकी राष्टीय आय का पचास प्रतिशत भाग कृषि पर आधारित है। स्वतंत्र भारत में उसकी प्रगति के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ प्रारम्भ की गईं। उन पंचवर्षीय योजनाओं की पूर्ति के लिए विदेशों से कुछ लेना पड़ा और कुछ देना भी पड़ा। कृषि से हमें खाद्यानों की प्राप्ति हेतु अन्य उद्योगों के...
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November 13, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
वर्तमान भारत में गान्धी की अप्रासंगिकता Vartman Bharat me Gandhi ki Aprasangikta गान्धी! महात्मा गान्धी! जी हाँ, मोहन दास कर्मचन्द गान्धी, जिन का नाम सत्तारूढ़ दल द्वारा अक्सर बार-बार, भूले-बिसरे रूप में अक्सर अन्य दलों द्वारा भी कभी-कभार लिया जाता है, सोचने की बात है कि आखिर आज उनकी प्रासंगिकता क्या रह गई है? अपने खून-पसीने से सींच कर खड़ी की गई उन्हीं की संस्था राष्ट्रीय कांग्रेस ने उन का नाम...
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November 13, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment