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Archive by category "Languages" (Page 402)
गणतन्त्र दिवस (26 जनवरी) भारत में नवोदित स्वतन्त्रता के उपलक्ष्य में जो राष्ट्रीय पर्व मनाये जाते हैं उनमें 26 जनवरी का विशेष महत्त्व है। यह राष्ट्रीय पर्व हर वर्ष हमें स्वतन्त्र सत्ता का भान कराकर चला जाता है। भारत का प्रत्येक नागरिक इसे बिना किसी भेद भाव के हर्षोल्लास के साथ मनाता है। इतिहास अभी साक्षी है। सन् 1929 ई० को रावी नदी के तट पर कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में...
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January 25, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
एशियाई खेल Asian Games जीवन के प्रत्येक कार्य को खेल मान कर हार-जीत की चिन्ता किए बिना महज बनते जाने में ही नश्वर जीवन की सार्थकता है, ऐसा भारतीय जीवन-दर्शन का परम्परागत मत एवं मान्यता रही है। एशियाई खेलों का समारंभ भी एक तो इस भावना से, दूसरे एशिया महाद्वीप के समस्त देशों को एक-दूसरे के निकट लाने के उद्देश्य से ओलिम्पिक खेलों की तर्ज पर एशियाई खेलों का आरम्भ सन्...
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January 25, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
राजधानी दिल्ली दर्शनीय स्थल दिल्ली आज भी भारत की राजधानी नहीं बनी, बल्कि पाण्डवों के काल से यह गौरव से मण्डित होती आ रही है। हाँ, आज जिस स्थान पर यह स्थित है, राजधानी के रूप में यह स्थान और नाम अवश्य कई बार बदल चुकी है। कहा जा सकता है कि मेरठ या रोपड़ आदि के आस-पास स्थित हस्तिनापुर गाँव से लेकर महरौली और छतरपुर तक के इलाके में इस...
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January 25, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
आज के लोकप्रिय खेल Aaj ke Lokpriya Khel खिलाड़ी होना मनुष्य का सहजात स्वभाव है। तभी तो जन्म लेने के बाद कुछ होश सम्हालने पर बच्चा खेल-कूद को ही सब से अधिक महत्त्व दिया करता है। अन्य सभी कुछ भूल कर उसका ध्यान भी अधिकतर खेल-कूद में ही रमा और केन्द्रित रहा करता है। उसे अन्य कुछ सूझता ही नहीं। आरम्भ से ही शिक्षा के साथ खेल-कूद को दो प्रमुख कारणों...
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January 25, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
पुस्तक प्रदर्शनी राजधानी दिल्ली का प्रगति मैदान एक ऐसा स्थान है, जहाँ अक्सर एक-न-एक प्रदर्शनी चलती ही रहती है। इस कारण वहाँ अक्सर भीड़-भाड का बने रहना भी ना स्वाभाविक है। प्रदर्शनी कोई हो या न हो; पर वहाँ अक्सर कई तरह के साँस्कृतिक कार्यक्रम नाटक, फिल्म शो, रंगारंग कार्यक्रम तो होते ही रहते हैं। फिर साथ ही बच्चों के लिए मनोरंजन पार्क अप्पू घर भी है। इसलिए मैं कई बार...
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January 23, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
नारी शिक्षा पुरुष हो या नारी, शिक्षा पाना सभी का समान अधिकार तो है ही सही, सभी के लिए आवश्यक भी है। शिक्षा आदमी के मन-मस्तिष्क के विकास का सभी उचित अवसर प्रदान करती है। शिक्षा आदमी की आँख के समान कही जानी चाहिए। जिस प्रकार सही आँख वाला व्यक्ति हर वस्तु को ठीक प्रकार से देख कर पहचान सकता है, उसी प्रकार शिक्षित स्त्री-पुरुष जीवन समाज की प्रत्येक वस्तु को,...
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January 23, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
मानवता Manavta मानवता की प्राप्ति धन, मकान, आभूषण और विद्या से नहीं होती है। इसकी प्राप्ति तो आत्मा की स्वच्छता, आचरण की शुद्धता और हृदय की उदारता से होती है। काइ भी मनुष्य कुत्सित भावनाओं को रखकर, दूसरे के ऐश्वर्यों को लूटकर और किसी आत्मा को सता कर इस आभूषण से अपनी देह को अलंकृत नही कर सकता है. आज ज्यों-ज्यों हम त्यों-त्यों हम मनुष्यता आपस में वैमनस्य विश्वासकर टुस आभूषण...
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January 23, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
आत्म-सम्मान Atmasamman निबंध संख्या:- 01 प्राचीन युग में सभी भारतीयों में आत्म-सम्मान की भावना कूट-कूट कर भरी थी। पर कुछ काल तक पराधीन अवस्था के कारण वह प्रायः लुप्त-सी हो गई थी। अब हम स्वतंत्र हैं। हमें इस भावना को जगाना है। यही मनुष्यता की सीढ़ी है। इसको न पाकर हम पशु के समान ही रह जाते हैं। आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए आत्म-विश्वास को आगे रखना पड़ता है। इसी के...
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January 23, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment