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Archive by category "Languages" (Page 399)
We all agree that the growth of industries will increase our material wealth and that our needs in terms of food, clothing and housing will be adequately provided. But man has other needs too-the need for human relationship, love and sympathy, the need for a sense of dignity and worth, and the need for a sense of security. These are also basic human needs, and if they are not satisfied, there...
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February 4, 2020 evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
वृक्ष की आत्मकथा Vriksh ki Atmakatha वृक्ष, पेड, दरख्त, जैसे कई नामों से पुकारा जाता है, मुझे। याँ मेरी सत्ता व्यापक है। सारे संसार में मेरा अस्तित्व विद्यमान है। मेरी जातियाँ तो अनगिनत हैं ही, रंग-रूप और आकार-प्रकार भी अनेक हैं। मेरा कोई भाई बहुत मोटे मद-काठ (तने) वाला हुआ करता है और कोई पतले वाला। इसी तरह किसी का शरीर और बनावट खूब फैलावदार हुआ करती है और किसी की...
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January 30, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
डॉयरी की आत्मकथा Diary ki Atmakatha अजी जनाब ! यह क्या करने लगे। नहीं, किसी की डॉयरी पढ़ना कतई उचित नहीं, किसी की इजाजत के बिना उसकी डॉयरी पढना कतई सद्व्यवहार नहीं माना जाता। कोई भी समझदार और पढ़ा-लिखा व्यक्ति ऐसा करना उचित नहीं मानता। अरे, पुलिस या उस प्रकार की संस्थाओं द्वारा खोज-बीन करते समय किसी की निजी डॉयरी पढ़ना अलग बात है। वैसा करने से कई तरह की कठिन...
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January 30, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
मधुमक्खी की आत्मकथा Madhumakkhi ki Atmakatha ‘मधु!’ कितना मधुर शब्द है यह। कहते-सुनते ही मुख तथा कानों में एक तरह की स्वस्थ शहद या मिठास-सी घुलने लगती है। लेकिन भाई ‘मक्खी’ शब्द का अकेले प्रयोग या उच्चारण किया जाए, तो यह सोच कर जी मितलाने लगता है कि जैसे कुछ अयोजित एवं अस्वाभाविक निगल लिया गया हो। लेकिन मैं न तो केवल ‘मधु’ ही हूँ और न मात्र ‘मक्खी’ ही; बल्कि...
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January 30, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
पेन की आत्म-कथा Pen ki Atmakatha मैं लेखनी, अर्थात् वह साधन हूँ, जिसके द्वारा आप जो कुछ भी चाहें बड़ी सरलता से लिख सकते हैं लेखनी यानि लिखने वाली। वही, जो यह सब लिख कर आप तक पहुंचा रही हूँ। हाँ, मुझे कलम भी कहा करते थे और कुछ लोग तो आज भी मुझे इसी नाम से पुकारा करते हैं। बीच में मुझे होल्डर भी कहा जाने लगा था। तब मेरा...
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January 30, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
पक्षी की आत्मकथा Pakshi ki Atmakatha निबंध नंबर:- 01 संसार में अनगिनत प्राणी निवास करते है। उन्हें जलचर, थलचर और नभचर प्राणी जैसे तीन भागों में बाँटा जाता है। जलचर यानि पानी में रहने वाले। थलचर यानि धरती पर चलने-फिरने और रहने वाले मनुष्य और कई तरह के पशु. कीड़े-मकोडे, सौंप-बिच्छ आदि। नभचर यानि आकाश के खुलेपन में उड़ पाने में समर्थ पक्षी जाति के प्राणी। इन के पंख होते है....
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January 30, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
नौकर की आत्मकथा Naukar ki Atmakatha मैं लोगों के घरों में काम कर के अपने गरीब और अपाहिज माँ-बाप तथा दो छोटे बहन-भाई का पालन कर रहा हूँ। नहीं, मेरी अपनी आयु भी कोई बहुत अधिक नहीं है। अभी तो मात्र चौदह वर्ष का हूँ। हाँ, आप ने सच कहा। हालात की मार के कारण मेरी आयु कहीं, अधिक, बीस-पच्चीस वर्षों से कम नहीं लगती; पर वास्तविकता वही है, जो मैंने...
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January 30, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
कमीज़ की आत्मकथा Kamij ki Atmaktha ‘बहुत बढ़िया कमीज पहन रखी है आज तो।’ ‘वाह ! क्या शेड है शर्ट (कमीज) का। कहाँ से खरीदी? या फिर ‘क्या फिटिंग है…….. क्या सिलाई है……. क्या डिजाइन है। भई, कहाँ से सिलाई ?’ मुझे देख कर अक्सर चहक उठा करते हैं न आप? ऐसे-ऐसे या इसी तरह के प्रशंसात्मक वाक्य भी बोलने लगते हैं। जिस किसी ने मुझे पहन रखा होता है, अक्सर...
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January 30, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment