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Archive by category "Languages" (Page 1050)
मेरी दिनचर्या मै, रमेश चन्द्र , नवम श्रेणी का विद्दार्थी हूँ, मेरे जीवन का दैनिक कार्यक्रम बहुत सामान्य सा है जो प्रात: काल उठने से पारम्भ होकर रात्रि को सोने तक का है | मै प्रतिदिन प्रात:काल बहुत शीघ्र उठ जाता हूँ | एक बार हमारे प्रधानाचार्य जी ने प्रात :काल में जल्दी उठने के महत्त्व को बताते हुए कहा था की जो ब्रह्ममुहूर्त में उठता है तथा रात्रि को शीघ्र...
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February 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
प्रौढ़शिक्षा परिपक्व आयु वाले व्यक्ति को प्रौढ़ कहा जाता है | आजकल प्राय : चालीस वर्ष की आयु वाले व्यक्ति को प्रौढ़ मान लिया जाता है , यद्दपि प्राचीन काल में जब मनुष्य की औसत आयु प्राय : सौ वर्ष होती थी तब प्रौढावस्था का कर्म पचास वर्ष से अधिक माना जाता था | जहाँ तक आयु का प्रश्न है, शिक्षा ग्रहण करने के मार्ग में यह कदापि बाधक नही हुआ...
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February 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
सहशिक्षा सहशिक्षा से अभिप्राय शिक्षा की उस व्यवस्था से है जिसमे लडके तथा लडकियाँ एक साथ शिक्षा ग्रहण करते हो | इस विषय पर कि इस प्रकार की शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए कि नही काफी समय से चर्चा होती रही है | कुछ लोग इस व्यवस्था के पक्ष में है तथा कुछ इसके पक्ष में नही है | इस प्रकार की चर्चा होते हुए भी , आजकल हमारे देश भारत...
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February 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
स्वदेश प्रेम Swadesh Prem Best 4 Essay on ” Swadesh Prem” निबंध नंबर : 01 स्वदेश का अर्थ है अपना देश अर्थात अपनी मातृभूमि | यह वह स्थान होता है जहाँ हम पैदा होते है, पलते है और बड़े होते है | जननी तथा जन्मभूमि की महिमा का स्वर्ग से बढकर बताया गया है | जिस देश में हम जन्म लेते है तथा वहाँ का अन्न, जल, फल, फूल आदि खाकर...
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February 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages31 Comments
राष्ट्रीय एकता आज से सहस्त्र वर्ष पूर्व जब भारत में पूरी तरह एकता थी तब यह देश सारे विश्व में शक्ति व शिक्षा में महान था | तब हमारा एक राष्ट्र था, एक भाषा तथा एक ही राष्ट्रीय विचारधारा थी | परन्तु जब से हमारी राष्ट्रीय एकता छिन्न-भिन्न हुई है तब से हमे दुर्दिनो का सामना करना पड़ रहा है | तभी से हम परतन्त्र हो गए है | हमारे धर्म...
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February 17, 2017 evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), Languages1 Comment
पर्वतारोहण मानव का आदि युग से प्रकृति के साथ गहरा सम्बन्ध रहा है | वह इसके साथ रहकर सदैव आनन्द की खोज में लगा रहता है | इसीलिए प्रकृति तथा मावन का आपसी सम्बन्ध अविच्छिन्न रूप से सदा के लिए जुड़ गया है | इसी कारण मानव की प्रवृत्ति घुमक्कड़ किस्म की बन गई है | पर्वतारोहण इसी प्रवृत्ति का अंग है | पर्वतारोहण से अभिप्राय है पर्वतों के शिखरों पर...
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February 17, 2017 evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
कर्त्तव्य- पालन निबंध नंबर : 01 संसार में सभी मनुष्य अपने जीवन को सफल बनाने के लिए सत्कार्य करते है | इस प्रकार के सत्कार्य ही उनके कर्त्तव्य कहलाते है | तथा इनका भी प्रकार पालन करना ही कर्त्तव्य –पालन कहलाता है | हमारे कर्त्तव्य-पालन करते रहने से संसार की व्यवस्था बनी रहती है | इनसे समाज की रीति-नीतियों बनी रहती है | कर्त्तव्य-पालन से ह हमारे जीवन में सच्चरित्र गुणों...
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February 17, 2017 evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
सदाचार – सच्चरित्रता Sadachar – Sacharitrata निबंध नंबर : 01 सच्चरित्रता व्यक्ति का वह व्यवहार होता है जो किसी को हानि नही पहुँचाता, बल्कि जो सभी का हर प्रकार से शुभ एव हितकारी होता है तथा जिसके लिए कुछ भी छिपाने व मिथ्या भाषण की आवश्यकता नही पडती | सच्चरित्र वाला व्यक्ति अपने अच्छे व्यवहार से जीवन तथा समाज में सभी को शीघ्र एव सहज ही प्रभावित कर लिया करता है...
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February 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment