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Archive by category "Hindi (Sr. Secondary)" (Page 54)
निरुत्तर Niruttar सन् 1958 में ज्योतिषियों के अनुसार बहुत बड़ा बवंडर, वज्रपात होने की आशंका थी। इसका सबसे अधिक प्रभाव मकर राशि पर बताया गया था। डॉ० सम्पूर्णानंद ज्योतिष व संस्कृत के प्रकांड पंडित थे। वह नेहरू जी के पास गए और उन्हें बताया, आपका नाम ‘ज’ शब्द से आरम्भ होता है, इसलिए आपको विशेष पूजा, अनुष्ठान करना चाहिए। जवाहर लाल जी इन बातों को नहीं मानते थे। उन्होंने डॉ० साहब...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
उपमाएँ Upmayen एक बाद हिन्दी साहित्य सम्मेलन में उपन्यासकार गोस्वामी किशोरी लाल के विषय में बोलते हुए प्रेमचन्द जी ने उन्हें ‘उपन्यास साहित्य का पर्वत’ कहा। इस पर हास्य-व्यंग्य के सुप्रसिद्ध लेखक बेढब बनारसी ने अपने एक अखबारी स्तम्भ में चुटीली टिप्पणी की- “उपन्यास सम्राट ने भौगोलिक उपमा दी है। इसी तरह कहा जा सकता है कि हरिऔध काव्य के जंगल है, राय कृष्णदास कला के टापू और श्री सुमित्रानन्दन पंत...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भूख का महत्त्व Bhookh ka Mahatva एक बार महापंडित राहुल सांकृत्यायन अपने मित्र के घर गए। मित्र के घर दो अन्य सज्जन भी ठहरे हुए थे। मित्र ने सभी के लिए खिचड़ी बनाई। खिचड़ी सबसे पहले राहुल जी ने खाई। जब अन्य सज्जनों ने खिचड़ी खाई तो ज्ञात हुआ कि खिचड़ी में नमक बिल्कुल भी नहीं है। सभी को इस बात पर आश्चर्य हुआ कि राहुल जी ने बिना नमक वाली...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
आधा दुःख Aadha Dukh सुप्रसिद्ध विद्वान और लेखक राहुल सांकृत्यायन की पत्नी की घड़ी खो गई। वह बहुत दु:खी हुई। उन्हें दुःखी देखकर राहुल सांकृत्यायन ने पूछा- “क्यों, घड़ी कितने की थी ?” पत्नी ने तत्काल उत्तर दिया, ‘अस्सी रुपये की ।’ राहुल सांकृत्यायन ने कुछ विचारते हुए कहा, “अच्छा ! तुम तो जानती हो कि किसी वस्तु को खरीदने के पश्चात् उसका मूल्य आधा रह जाता है। इसलिए तुम...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
कलम के मज़दूर Kalam Ke Mazdoor बहुत से लेखकों के विषय में प्रसिद्ध है कि वे कागज़ विशेष पर लिखते हैं, फलां मूड में लिखते हैं, तो फलां किस्म की कलम से लिखते हैं। मगर उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचन्द इस लिखावटी ताम-झाम से सर्वथा दूर थे। एक बार किसी ने उनसे पूछा- “मुंशी जी, आप कैसे कागज़ और कैसे पेन से लिखते हैं। “ मुंशी जी ने यह सवाल सुनकर पहले...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
अभिलाषा Abhilasha उपन्यासकार मुंशी प्रेमचन्द बड़े हंसमुख, जिन्दादिल व मज़ाकिया प्रवृत्ति के थे। उनके सम्पर्क में आने वाला कोई उदास नहीं रहता था। एक बार उन्हें प्रयाग विश्वविद्यालय की साहित्य परिषद् ने अध्यक्ष पद हेतु बुलाया। आते ही मुंशी प्रेमचन्द ने अपने चुटकीले वाक्यों से हास्य बिखेरना शुरू कर दिया। तभी उनसे एक छात्र ने प्रश्न किया-‘ हुजूर, जीवन में आपकी सबसे बड़ी अभिलाषा क्या है ?’ हंसी-मजाक के लहज़े में...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
शाप Shaap आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी काशी हिंदू विश्वविद्यालय में रैक्टर थे। विद्यार्थियों ने किसी मांग को लेकर उनका घेराव किया और अपनी बात मनवाने के लिए ज़िद करने लगे। छात्रों ने शोरगुल भी किया। द्विवेदी जी ने सबको शांत करते हुए संक्षिप्त वक्तव्य दिया और अंत मैं कहा, “तुम सबने मेरी अवमानना की, अतः मैं तुम्हें शाप देता हूँ कि तुममें से हर कोई इस जन्म में या अगले जन्म...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
लता और मणि Lata aur Mani आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी साहित्य के उत्तर छायावादी काल के युग पुरुष थे। द्विवेदी जी के एक मित्र की पुत्री उनकी विद्यार्थी थी। एक दिन उसने द्विवेदी जी से पूछा, “हम लोगों के पाठ्यक्रम में पंडित रामचंद्र शुक्ल की ‘चिंतामणि’ तथा आपकी ‘कल्पलता’ दोनों हैं। ‘चिंतामणि’ बहुत कठिन लगती है और ‘कल्पलता’ सरस। ऐसा क्यों ? आचार्य द्विवेदी बोले, ‘सीधी बात है, चिंतामणि मणि...
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