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Archive by category "Hindi (Sr. Secondary)" (Page 51)
बेसमझ लोग Besamajh Log स्वामी विवेकानन्द एक बार रेलयात्रा कर रहे थे। उन्हीं के डिब्बे में दो अंग्रेज यात्री भी थे। एक तो हिन्दुस्तानी और दूसरे गेरूआधारी स्वामी जी के बारे में दोनों जितना अनाप-शनाप हो सका, बोलते रहे। इतने में स्टेशन आया। स्वामी जी ने स्टेशन मास्टर को बुलाकर अंग्रेजी भाषा में कहा-“कृपया थोड़ा सा पानी मंगा दीजिये।” उनको अंग्रेजी में बोलते देख दोनों यात्री ज़रा क्षुब्ध हुए। उनमें से...
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January 2, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भाषा-प्रेम Bhasha-Prem एक बार ब्रह्म समाज के प्रमुख नेता केशव चन्द्र सेन इंग्लैण्ड जा रहे थे। जाने से पूर्व उन्होंने महर्षि दयानंद से भेंट की और बोले- ‘मुझे दुख है कि आप वेदों के विद्वान होकर भी अंग्रेजी नहीं जानते। वरना वैदिक संस्कृति पर प्रकाश डालने वाला, विदेश यात्रा में मेरा एक साथी और होता।’ महर्षि दयानंद मुस्कराकर बोले- ‘मुझे भी इस बात का दुःख हैं कि ब्रह्म समाज का नेता...
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January 2, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
दीनों पर दया Dino par Daya रानाडे अपने साथी बालकों से बहुत प्रेम करते थे। वे खाने-पीने की चीजें अपने साथियों में बाँटकर खाते थे। एक बार माता ने इनको दो बर्फ़ी के टुकड़े दिये। उन्होंने बड़ा टुकड़ा पास के साथी को दे दिया और छोटा स्वयं खा लिया। यह देख माता ने रानाडे से कहा-“अरे, तूने यह क्या किया ? वह बड़ा टुकड़ा तो तेरे लिये था। “ बालक रानाडे...
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January 2, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
जैसे को तैसा Jaise ko Taisa ईश्वरचन्द्र विद्यासागर कलकत्ता के प्रेसीडेन्सी कालेज के प्रिंसिपल से मिलने गए। गुलाम देश के नागरिकों से असभ्यता का व्यवहार करने वाले उस अंग्रेज प्रिंसिपल ने अपने पैर मेज़ पर रखकर ईश्वरचन्द्र जी से बातें की। उसने उन्हें बैठने को भी नहीं कहा। विद्यासागर अपमान का घूंट पी कर चले आए। कुछ समय पश्चात् वही प्रिंसिपल ईश्वरचन्द्र विद्यासागर से मिलने उनके पास आया। अब अच्छा मौका...
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January 2, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
मूर्ख और गधा Murakh aur Gadha ईश्वरचन्द्र विद्यासागर बंगाल के विख्यात विद्वान थे। बड़ी सादगी से अपना जीवन व्यतीत करते थे। एक बार उन्हें कहीं जाना था। रेलगाड़ी के एक डिब्बे में चढ़े। वहाँ देखा, एक सीट पर दो अंग्रेज बैठे थे, जिनके बीच में एक आदमी के बैठने की जगह खाली है। वे वहीं बैठ गये। अंग्रेजों को एक काले आदमी के साहस पर आश्चर्य हुआ और क्रोध भी आया।...
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January 2, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
शाकाहार Shakahar महात्मा आनन्द स्वामी सरस्वती उन दिनों लंदन प्रवास पर थे। उनके प्रवचनों में वहां के प्रसिद्ध समाचार पत्र डेली टेलीग्राफ के संपादक भी आते थे।। एक दिन स्वामी जी के स्वास्थ्य शरीर की ओर उनका ध्यान गया तो उन्होंने जिज्ञासावश पूछ ही लिया, “स्वामी जी, आपकी उम्र क्या होगी ?” स्वामी जी बोले, “तुम्ही अनुमान लगाओ।” “यही कोई 60-65 साल।” संपादक ने अनुमान लगाया। “नहीं, 60 साल का तो...
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January 2, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भिक्षा Bhiksha स्वामी स्वतन्त्रानन्द भिक्षार्थ गाँव के सभी घरों में घूमते हुए एक स्त्री के घर पहुँचे। स्त्री स्वामी जी को क्रोधित स्वरों में गाली देती हुई बोली-“क्या कमाने की शक्ति नहीं है, जो भिक्षा मांग रहे हो ?” स्वामी मौनी बने चले गये। कुछ दिनों बाद पुनः उसी स्त्री के घर आये, भिक्षा मांगी। स्त्री दोनों हाथों में राख भरकर लाई और स्वामी जी के मुंह पर डाल कर घर...
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January 2, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
क्या मैं बकरी हूँ? Kya me Bakri hu? पंडित लेखराम आर्य समाज के स्तम्भ थे। बहुत जोर देने पर वह अपने मित्र के घर भोजन करने चले गये। भोजन के बाद गृहपति ने सभ्यता के विधि-विधान का पालन करते हुए पान पेश किया। पंडित लेखराम ने डाँट लगाते हुए कहा, “क्या मैं बकरी हूँ जो पत्ते खाऊंगा।”
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January 2, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
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