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Articles posted by evirtualguru_ajaygour (Page 1105)
मेर प्रिय कवि या तुलसीदास निबंध नंबर :- 01 तुलसीदास हिंदी साहित्य के अमर कवि होने के साथ-साथ मेरे प्रिय कवि भी हैं। भक्तिकालीन कवियों में कबीर, सूर, तुलसी, मीारा और आधुनिक कवियों में मैथलीशरण गुप्त, महादेवी वर्मा जैसे कुछ कवियों का रसास्वादन किया है। इन सबको अध्ययन करते समय जिस कवि की भक्ति भावना ने मुझे अभिभूत कर दिया उसका नाम है-महाकवि तुलसीदास। लोकनायक गोस्वामी तुलसीदास हिंदी-साहित्य-जगत की एक अमर...
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June 11, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages2 Comments
मेरे प्रिय नेता या नेताजी सुभाष चंद्रबोस ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।’ खुना के बदले आजादी देने की घोषणा करने वाले भारत माता काा अमर सपूत सुभाषचंद्र बोस का जन्म उड़ीसा राज्य के कटक नामक नगर में 23 जनवरी 1897 में हुआ था। उनके पिता राय बहादुर जानकीनाथ बोस वहां की नगरपालिका एंव जिला बोर्ड के प्रधान तो थे ही, नगर के एक प्रमुख वकील...
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June 11, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
त्यौहारों का जीवन में महत्व त्यौहार समय-समय पर आकर हमारे जीवन में नई चेतना, नई स्फूर्ति, उमंग तथा सामूहिक चेतना जगाकर हमारे जीवन को सही दिशा में प्रवृत करते हैं। ये किसी राष्ट्र एंव जाति-वर्ग की सामूहिक चेतना को उजागर करने वाले जीवित तत्व के रूप में प्रकट हुआ करते हैं। कोई राष्ट्र त्यौहारों के माध्यम से अपने सामूहिक आनंद को उजागर किया करते हैं। व्यक्ति का मन आनंद तथा मौजप्रिय...
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June 11, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
स्वंय पर विश्वास संस्कूत में कहा गया है कि मत ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है ‘मन एंव मनुष्याणां कारण बंधा न मोक्ष्यों।’ मन की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। मन ही व्यक्ति को सांसारिक बंधनों से बांधता है, मन ही उसे अन बंधनों से छुटकारा दिलाता है। मन ही मन उसे अनेक प्रकार की बुराईयों की ओर प्रवृत्त करता है, तो मन ही उसे अज्ञान से ज्ञान की...
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June 9, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
जो हुआ अच्छा हुआ अक्सर लोगों को कहते सुना है कि अपना मान-सम्मान, अपना यश-अपयश, अपना सुख-दुख और आनि लाभ आदि सभी कुछ मनुष्य के अपने हाथों ही रहा करता है। एक दृष्टि से यह मान्यता काो सत्य एंव उचित भी कहा जा सकता है। वह इस प्रकार कि मनुष्य अच्छे-बुरे जैसे भी कर्म किया करता है, उसी प्रकार से उसे हानि-लाभ तो उठाने ही पड़ते हैं। उन्हें जान-सुनकर विश्व का...
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June 9, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
सत्य की शक्ति Satya ki Shakti या सत्यमेव जयते Satyamev Jayate निबंध नंबर :01 ‘सांच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। जाके हिरदय सांच है, ताकि हिरदय आप।।’ संत कबीर द्वाारा सचे गए इस सूक्ति परक दोहे का सीधा और सरल अर्थ इस प्रकार किया जा सकता है कि इस नाशवान और तरह-तरह की बुराईयों से भरे विश्व में सच बोलना सबसे बड़ी सहज-सरल तपस्या है। सत्य बोलने, सच्चा व्यवहार करने सत्य...
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June 9, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages4 Comments
आत्मनिर्भर या स्वावलंबी ‘खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर सं पहले खुदा बंदे से ये पूछे- बता तेरी रजा क्या है?’ शायर की उपर्युक्त पंक्तियां स्वावलंबी मनुष्य के बारे में है। जिनका आशय है कि स्वावलंबी या आत्मनिर्भर व्यक्तियों के सामने ईश्वर को भी झुकना पड़ता है। ऐसे व्यक्तियों का भाज्य लिखने से पहले ईश्वर को भी उनसे पूछना पड़ता है ‘बता तेरी रजा (इच्छा) क्या है।’ परमुखापेक्षी...
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June 9, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान Karat Karat Abhyas ke Jadmati hot Sujaan Best 8 Essay on ” Karat Karat Abhyas ke Jadmati hot Sujaan” निबंध नंबर : 01 कविवर वृंद के रचे दोहे की एक पंक्ति वास्तव में निरंतर परिश्रम का महत्व बताने वाली है। साथ ही निरंतर परिश्रम करने वाला व्यक्ति के लिए अनिवार्य सफलता प्रदान करने वाली है दोहे की यह पंक्ति। पूरा दोहा इस प्रकार है...
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June 9, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages7 Comments