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Articles posted by evirtualguru_ajaygour (Page 1102)
A Good Leader Essay No. 01 Leaders are needed at every level and in every venue. Leadership is the quality of providing direction to a group of individuals working towards a common goal. There are some attributes that can help you become an outstanding leader. Start small. Try teaching a fellow student one of your strengths. Take on extra responsibility when given the opportunity. Let others see that you are someone...
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June 18, 2017 evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
दूरदर्शन और शिक्षा दूरदर्शन विज्ञान की एक सशक्त देन है। माध्यम के क्षेत्र में दूरदर्शन का प्रभाव निस्संदेह अत्याधिक प्रभवी सिद्ध हो रह है। भारत में भी यह माध्यम अधिक प्रभावी और सक्रिय है। माध्यम तो माध्यम मात्र है। उसकी उपयोगिता इस माध्यम से प्रस्तुत होने वाले कार्यक्रमों पर निर्भर है। समाचार-पत्र, आकाशवाणी, पत्रिकांए आदि की अपेक्षा इस माध्यम में दृश्य पक्ष प्रबल है। इससे यह महत्वपूर्ण और सशक्त भूमिका निभाने...
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June 18, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
स्वरोजगार या युवा स्वरोजगार योजना आज बेरोजगारी बढ़ती हुई महंगाई की तरह एक भयानक स्वस्या है। जीवन-स्तर लगभग तय हो चुका है। लोकतं9 ने आम आदमी को स्वप्नों से संबंध कियाहै, उनमें परिकल्पनाओं का स्वर्ग महाकाया और जीने की महती अकांक्षांए पैदा की है। उसके लिए रोजगार चाहिए। नई पीढ़ी तो स्वप्नों की पीढ़ी है जो बहुत कुछ करना चाहती है। उसमें जोश है, कुछ कर पाने की तमन्ना है...
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June 18, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
बचत ‘बात कीजिए और सुंदर और सुरक्षित भविष्य बनाइए।’ यह नारा आज के युग का है यों तो मनुष्य शुरू से ही बचत करता आ रहा है। लेकिन पूर्व काल में की गई बचत से आज की बचत के अर्थ में बहुत बड़ा परिवर्तन आ गया है। भूखा या अधपेट रहकर बचत नहीं करनी है, परंतु फिजूलखर्ची पर अवश्य रोग लगानी है। आजकल तो बिजली और पानी की बचत की ओर...
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June 18, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages2 Comments
समाज और कुप्रथांए हम जहां रहते हैं, जिनके बीच रहते हैं, वह समाज है। समाज मनुष्यों के मिल-जुलकर रहने का स्थान है। व्यक्ति अकेला नहीं रहा सकता। आज व्यक्ति जो भी कुछहै , वह समाज के कारण है। तो व्यक्ति है, उसकाविकास यापतन है। बिना समाज के व्यक्ति की कल्पना नहीं की जा सकती। सभ्यता, संस्कृति, भाषा आदि सब समाज की देन है। समाज में फैली हुई कुरीतियां या कुप्रथांए भी...
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June 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
निबंध नंबर : 01 कल का भारत या 21वीं सदी का भारत बीसवीं शताब्दी का अंत होने को है और इक्कीसवीं शताब्दी के स्वागत की तैयारी की जा रही है। हर शताब्दी के साथ ही हुआ है। शताब्दियां ऐसे ही बीती हैं। हर शताब्दी का इतिहास रोमांच से भरा होता है। इतिहास इसका गवाह है। मनुष्य को हमेशा आने वाले समय की चिंता रहती है। चिंतकों को आने वाले कल की...
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June 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
विवाह एक सामाजिक संस्था विवाह एक सामाजिक व्यवस्था है। स्वस्थ तथा भागतिक समाज की स्थापना में उसका सर्वाधिक महत्वपूर्ण योगदान है। वह समाज का महोत्सव है। विवाह बिना समाज की कल्पना बिखर जाएगी और समाज पशुवत हो जाएगा। समाज मानव जाति के हजारों वर्षों के अनवरत प्रयत्नों, संघर्षों, उपलब्धियों, अविष्कारों आदि का परिणाम है। वह जंगल-दर्शन से हटकर समूह में रहने के लिए विवाह आवश्यक है। लेकिन आज विवाह अभिशाप बन...
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June 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
आतंकवाद और समाज नात्सीज्म और फासीज्म आतंक समर्थक विचाराधाराएं थीं। व्यक्ति और समाज को भय तोड़ता है, खोखला करता है और आतंक की ओर खींच ले जाता है। आतंक भयानक वन है, जो हिंसक वन्य पशुओं के रहने का स्थान है। उस भयावह वन को हमने शहरों में उगा दिया है। उसकी जड़े मन में गहरी उतर चुकी हैं। आतंक घनेवन की तरह स्याह होता है और चीत्कारों से भरा रहता...
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June 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment