Home »
Posts tagged "Hindi essays" (Page 37)
सच्ची उपासना Sachi Upasana एक बार गुरु नानक सुल्तानपुर पहुँचे। वहाँ उनके प्रति लोगों की श्रद्धा देख वहाँ के काजी को ईर्ष्या हुई। उसने सूबेदार दौलतखाँ के खूब कान भरे और शिकायत की कि वह कोई पाखंडी है, इसीलिए आज तक नमाज पढ़ने कभी नहीं आया।” सूबेदार ने नानकदेव को बुलावा भेजा, किन्तु उन्होंने उस ओर ध्यान नहीं दिया। जब सिपाही दुबारा बुलाने आया, तो वे उसके पास गए। उन्हें देखते...
Continue reading »
January 24, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
व्यर्थ की जिज्ञासा Vyarth ki Jiggyasa एक बार मलुक्यपुत्र गौतम बुद्ध के पास आकर बोला, “भगवन् ! आपने आज तक यह कभी नहीं बताया कि मृत्यु के उपरांत पूर्ण बुद्ध रहते हैं या नहीं?” इस पर बुद्धदेव बोले, “हे मलुक्यपुत्र! मुझे यह बताओ कि भिक्षु होते समय क्या मैंने तुमसे यह कहा था कि तुम मेरे ही शिष्य बनना ?” मलुक्यपुत्र ने नकारात्मक उत्तर दिया । तब बुद्धदेव बोले, “यदि किसी...
Continue reading »
January 24, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
गला सत्य का घोटिन, खुसामद बचन न उतारो Gala Satya ka Ghotin, Khusamad Bachan na Utaro कवि श्रीपति निर्धन थे, मगर निर्भीक और आत्मसम्मानी थे। भिक्षा में जो कुछ पाते, उसी से अपना जीवन-निर्वाह करते थे। पत्नी गरीबी से त्रस्त हो चुकी थी। उसने अकबर की प्रशंसा सुनी, तो पति को उनके पास भेजा। उनकी भक्तिपरक रचनाओं से बादशाह संतुष्ट हो गया और उसने उन्हें अपने दरबार में रख लिया। उनकी...
Continue reading »
January 24, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
दोस्ती के हाथ Dosti Ke Haath स्वामी रामतीर्थ जहाज द्वारा जापान से अमेरिका जा रहे थे। जब सैनफ्रांसिस्को बंदरगाह आया, तो सब लोग उतरने लगे, लेकिन स्वामीजी निश्चित भाव से डेक पर टहलने लगे। एक अमरीकी का जब उनकी ओर ध्यान गया, तो उसने पूछा, “महाशय ! आपका सामान कहाँ है?” “मेरे पास कोई सामान नहीं है, जो कुछ है, मेरे शरीर पर ही है।” “क्या आपके पास पैसे भी नहीं...
Continue reading »
January 24, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
जाकी रही भावना जैसी Jaki rahi bhawna jaisi एक बार संगीताचार्य तानसेन ने एक भजन गाया- जसुदा बार बार यों भाखै । है कोउ ब्राज में हितू हमारो, चलत गोपालहिं राखै ॥ इस पद का अर्थ अकबर की समझ में नहीं आया। उसने दरबारियों से इसका अर्थ पूछा। तब तानसेन ने कहा, “यशोदा बार-बार कहती है- क्या ब्रज में हमारा कोई ऐसा हितैषी है, जो गोपाल को मथुरा जाने से...
Continue reading »
January 24, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
आत्म-विश्वास Atmavishwas ब्रिटिश हुकूमत ने वीर सावरकर को काले पानी की सज़ा देकर अंडमान भेज दिया। पहले दो जन्मों (तकरीबन 40 वर्ष) की सश्रम कारावास की सजा दी गयी। उनके गले में 40 वर्ष कारावास का पट्टा देखकर जेलर ने उनसे पूछा – “क्या’ तुम 40 वर्ष की सजा काटने तक जीवित रह सकोगे ?” वीर सावरकर ने बिना विचलित हुए कहा-“मैं तो जरूर जीवित रहूंगा पर यह भी तय है...
Continue reading »
January 2, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
सज्जनता की पहचान Sajjanta ki Pehchan गेरूए वस्त्र, सिर पर पगड़ी, कन्धों पर चादर डाले स्वामी विवेकानन्द शिकागों की सड़कों से गुजर रहे थे। उनकी यह वेषे-भूषा अमेरिका निवासियों के लिए एक कौतूहल की वस्तु थी। पीछे-पीछे चलने वाली एक महिला ने अपने साथ के पुरुष से कहा- “जरा इन महाशय को तो देखो, कैसी अनोखी पौशाक है ?” स्वामी जी को समझते देर न लगी कि ये अमेरिका निवासी उनकी...
Continue reading »
January 2, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
बेसमझ लोग Besamajh Log स्वामी विवेकानन्द एक बार रेलयात्रा कर रहे थे। उन्हीं के डिब्बे में दो अंग्रेज यात्री भी थे। एक तो हिन्दुस्तानी और दूसरे गेरूआधारी स्वामी जी के बारे में दोनों जितना अनाप-शनाप हो सका, बोलते रहे। इतने में स्टेशन आया। स्वामी जी ने स्टेशन मास्टर को बुलाकर अंग्रेजी भाषा में कहा-“कृपया थोड़ा सा पानी मंगा दीजिये।” उनको अंग्रेजी में बोलते देख दोनों यात्री ज़रा क्षुब्ध हुए। उनमें से...
Continue reading »
January 2, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
Page 37 of 254« Prev
1
…
34
35
36
37
38
39
40
…
254
Next »