Home » Posts tagged "Hindi essays" (Page 36)

Hindi Moral Story, Essay “अपरिग्रह” “Aparigrah” of “संत अपुरायन” for students of Class 8, 9, 10, 12.

Hindi-Proverb-stories
अपरिग्रह Aparigrah  फारस के संत अपुरायन सीरिया में बस गए थे और एक छोटी-सी झोंपड़ी में वास करते थे। उनका रहन-सहन अत्यंत सादगीपूर्ण था । रूखी-सूखी रोटी उनका भोजन था और चटाई उनका बिस्तर। दिन-रात भगवत्-चिंतन में लगे रहते । एक बार सीरिया का राजकुमार उनसे मिलने आया। वे जब झोंपड़ी से बाहर आए, तो उसने उन्हें प्रणाम किया और कीमती वस्त्र भेंट किए। यह देख संत बोले, “राजकुमार ! यदि...
Continue reading »

Hindi Moral Story, Essay “दिव्य शिक्षा” “Divya Shiksha” for students of Class 8, 9, 10, 12.

Hindi-Proverb-stories
दिव्य शिक्षा Divya Shiksha मिस्र के संत जू-उल-नून एक बार वुजू करने के लिए एक नहर के पास गए। सामने से एक सुंदर स्त्री आ रही थी। वे वुजू करते-करते उसकी ओर देखने लगे। जब वह पास आई, तो उन्होंने महसूस किया कि वह स्त्री उनसे कुछ कहना चाहती है। आखिर उन्होंने पूछ ही लिया, “क्या तुम कुछ कहना चाहती हो?” “हाँ! जू-उल-नून!” वह स्त्री बोली, “मैं जब इधर आ रही...
Continue reading »

Hindi Moral Story, Essay “स्वर्ग और नरक” “Swarg aur Narak” of “Sant Hakuin” for students of Class 8, 9, 10, 12.

Hindi-Proverb-stories
स्वर्ग और नरक Swarg aur Narak एक बार जापान के संत हाकुइन के पास एक सैनिक आया और उसने प्रश्न किया, “महाराज ! स्वर्ग और नरक अस्तित्व में है या केवल उनका हौवा बना दिया गया है?” हाकुइन ने उसकी ओर आपादमस्तक देखकर पूछा, “तुम्हारा पेशा क्या है?” “जी, मैं सिपाही हूँ।” उसने उत्तर दिया। संत ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, “क्या कहा, तुम सिपाही हो! मगर चेहरे से तो...
Continue reading »

Hindi Moral Story, Essay “जिन खोज, तिन पाइयाँ” “Jin Khoi, Tin Paiya” of “Sant Dadu” for students of Class 8, 9, 10, 12.

Hindi-Proverb-stories
जिन खोज, तिन पाइयाँ Jin Khoi, Tin Paiya  एक बार बालक दादू अपने मित्रों के साथ खेल रहा था कि एक साधु वहाँ आया और उसने बालक दादू के मुख पर पान की पीक डाल दी। अबोध बालक की समझ में कुछ नहीं आया। बाद में संसार के प्रति उसे विरक्ति हो गई। वह संसार की अनित्यता और नश्वरता का विचार कर घर त्यागने की बात सोचता, पर उसे अमल में...
Continue reading »

Hindi Moral Story, Essay “जिस तन लागे, सो तन जाने” “Jis tan lago, So tan jane” of “Sant Namdev” for students of Class 8, 9, 10, 12.

Hindi-Proverb-stories
जिस तन लागे, सो तन जाने Jis tan lago, So tan jane “अरे नामू! तेरी धोती में तो खून लगा हुआ है! कहीं चोट तो नहीं लगी?” माँ ने बेटे से पूछा । “हाँ, माँ! मैंने अपने पैर पर कुल्हाड़ी से वार किया है।” नामू ने उत्तर दिया। माँ ने धोती सरकायी तो पाया कि बेटे के पैर की चमड़ी छिली हुई है; बोली, “मूर्ख! कहीं कोई अपने ही पैर पर...
Continue reading »

Hindi Moral Story, Essay “Jhooth Ki Kamai” “झूठ की कमाई” of “Hazrat Abu Bakr” for students of Class 8, 9, 10, 12.

Hindi-Proverb-stories
झूठ की कमाई Jhooth Ki Kamai हजरत अबूबक्र मुसलमानों के पहले खलीफा थे। हजरत मुहम्मद साहब के बाद खलीफा के रूप में उन्हें ही चुना गया था। एक बार उनके एक गुलाम ने, जो कि उनका शिष्य था, उन्हें खाने के लिए मिठाई दी। उन्होंने जब मिठाई खायी तो उन्हें वह बड़ी ही स्वादिष्ट लगी। इन्होंने गुलाम से पूछा कि उसने इतनी बढ़िया मिठाई कहाँ से पायी? गुलाम ने बताया कि...
Continue reading »

Hindi Moral Story, Essay “Hikmat” “हिकमत” of “Sant Gadge Maharaj” for students of Class 8, 9, 10, 12.

Hindi-Proverb-stories
हिकमत Hikmat महाराष्ट्र के संत गाडगे महाराज नांदेड़ जिले में स्थित एक ग्राम में गए। तब उस इलाके पर निजाम का अधिकार था और उसने हरि-कीर्तन पर पाबंदी लगा दी थी, क्योंकि उसे डर था कि कहीं इससे जाति-द्वेष न फैले; मगर इसके बावजूद गाडगे महाराज ने कीर्तन की घोषणा कर दी। उनका कीर्तन सुनने के लिए लोग झुंड के झुंड एकत्रित होने लगे । बात पुलिस तक जा पहुँची और...
Continue reading »

Vishva-Prem, “विश्व-प्रेम” Hindi Moral Story, Essay of “Swami Dayanand Saraswati” for students of Class 8, 9, 10, 12.

Hindi-Proverb-stories
विश्व-प्रेम Vishva-Prem स्वामी दयानंद ने फर्रुखाबाद में नगर के किनारे एक झोंपड़ी में अपना डेरा डाला था। कैलास नामक एक युवक की उन पर बड़ी श्रद्धा थी। एक दिन वह उनके पास आया और उसने अंदर आने की अनुमति माँगी। दयानंद हँसते हुए बोले, “यदि कैलास इस छोटे-से झोंपड़े में प्रवेश कर सकता है, तो उसे अवश्य आना चाहिए।” अंदर आते ही वह बोला, “स्वामीजी ! आज मैं आपके पास किसी...
Continue reading »