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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Bal Shramik ki Samasya”, “बाल श्रमिक की समस्या” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

बाल श्रमिक की समस्या Bal Shramik ki Samasya                                   बाल श्रमिक की समस्या अत्यंत विकट है। यद्यपि कानून बनाकर बाल-मजदूरी पर रोक लगा दी गई है, पर व्यवहार में कुछ और ही हो रहा है। आज भी ढाबों पर, घरेलू उद्योगों में इन बाल श्रमिकों को देखा जा सकता है। इन बच्चों से इनका बचपन छीना जा रहा है। यह आयु उनके पढ़ने-लिखने की है, पर उन्हें काम पर जाने...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Shahro ka Vatavaran”, “शहरों का वातावरण” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

शहरों का वातावरण Shahro ka Vatavaran   आज का शहरी वातावरण दमघोंटू प्रतीत होता है। शहरों में बाहरी चमक-दमक तो बहुत है, पर यहाँ के वातावरण में खुलेपन का अभाव है। यहाँ हमें अपना दम घुटता हुआ प्रतीत होता है। इस प्रकार का वातावरण क्यों बना है। इस पर विचार करना आवश्यक हो गया है।                 शहर कंकरीट के जंगल बनकर रह गए हैं। यहाँ से हरियाली गायब होती जा रही...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Kisano me Aatmhatya ki Samasya”, “किसानो में आत्महत्या की समस्या” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

किसानो में आत्महत्या की समस्या Kisano me Aatmhatya ki Samasya                 भारत के कृषकों में आत्महत्या की प्रवृति निरंतर बढ़ती जा रही है, विशेषकर महाराष्ट्र और विदर्भ के किसानों में। विगत एक दशक में भारत ने भले ही अन्य क्षेत्रों में प्रगति की हो, पर कृषि के क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय सफलता नहीं मिली है। आज भी किसानों को बैकों और साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता है जो चुकाने का नाम...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Palayan ki Samasya”, “पलायन की समस्या” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

पलायन की समस्या Palayan ki Samasya                 आज गाँवों तथा छोटे नगरों में यह प्रवृति पनपती जा रही है कि महानगर की ओर चला जाए। अब लोगों का गाँवों के जीवन के प्रति कोई लगाव नहीं रह गया है। गाँव के लोगों का शहरी जीवन लुभाता है। अब उनका मन भी शहरी सुख-सुविधाएँ भोगने को उतावला हो रहा है। हमे इस प्रवृति की तह में जाकर इसके कारणो को जानना-समझना होगा।...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Baste ka Badhta Bojh”, “बस्ते का बढ़ते बोझ ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

बस्ते का बढ़ते बोझ  Baste ka Badhta Bojh                   वर्तमान समय में विद्यार्थी पर बस्ते का बोझ बढ़ता चला जा रहा है। अब यह बोझ उनकी सहनशक्ति से बाहर हो गया है। बस्ते के बढ़ते बोझ ने बालक के स्वाभाविक विकास पर बड़ा प्रतिकूल प्रभाव डाला है। पुस्तको की संख्या इतनी होती जा रही है कि उनको सँभाल पाना उनके लिए कठिन हो गया है। यद्यपि राष्ट्रीय शैक्षिक एवं अनुसंधान...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Foot Path par sote Log”, “फुटपाथ पर सोते लोग” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

फुटपाथ पर सोते लोग Foot Path par sote Log  आज भी फुटपाथों पर सोते लोग देखने को मिल जाते हैं। यद्यपि भारत अपनी आजादी की साठवीं सालगिरह मनाकर फूला नहीं समा पा रहा, पर इन अभागों को क्या पता कि आजादी किस चिड़िया का नाम है। इन्हें तो किसी प्रकार का परिवर्तन दिखाई नहीं देता ये तो दो जून की रोटी के लिए सारे दिन खटते हैं, किसी तंदूर पर सस्ती...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Mahanagro me Pakshi”, “महानगरों में पक्षी” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

महानगरों में पक्षी Mahanagro me Pakshi                   महानगरों से पक्षियों की चहचहाहट गुम होती चली जा रही है। इसका कारण है बड़े शहरों अर्थात् महानगरों मे जगह का अकाल रहता है। वहाँ वृक्षों को काटकर जमीन साफ करके कंकरीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं। इस कारण पेड़ घटते जा रहे हैं और पक्षी उड़कर अन्यत्र जाने को विवश हो रहे हैं। जब प़क्षी ही नहीं रहेंगे तो भला...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Jal Pradushan”, “जल प्रदुषण” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

जल प्रदुषण Jal Pradushan                  धरती तवे के समान बिक रही है। जेठ मास की धूप और झुलसाने वाली लू के साथ आई तेज गरमी पूरे शवाब पर है। पसीना, उमस और चिपचिपाहट ने मन को व्याकुल कर रखा है। प्यास के मारे सूखता गला दुनिया भर का पानी पी जाता है। गर्मी से बेहाल व्यक्ति छाया और शीतल जल की तलाश में इधर-उधर नजर दौड़ता है। तब उसकी दृष्टि ठंडे...
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