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Hindi Moral Story, Essay “गुरुनिष्ठा” “Gurunishtha” of “Sant Dadu” for students of Class 8, 9, 10, 12.

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गुरुनिष्ठा Gurunishtha एक बार संत दादू, संत रज्जब अन्य शिष्यों के साथ परिभ्रमण कर रहे थे कि रास्ते में एक नदी पड़ी। वैसे नदी में पानी तो कम था, किन्तु कीचड़ इतना जम गया था कि नदी पार करना बड़ा कठिन था। तब शिष्य लोग पत्थर एकत्र करने लगे, किन्तु रज्जब बोले, “गुरुदेव, आप मेरे शरीर पर पैर रखकर उस पार हो जाइए,” और वे सचमुच वहाँ लेट गए। संत दादू...
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Hindi Moral Story, Essay “निर्बाधिता” “Nirbalta” of “Sant Mahipati” for students of Class 8, 9, 10, 12.

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निर्बाधिता Nirbalta ‘भक्तिविजय’ के रचयिता संत महीपति पहले ग्रामप्रधान का काम करते थे। एक बार वे पूजा कर रहे थे कि जागीरदार का सिपाही उन्हें बुलाने आया। इससे पूजा में व्यवधान आया। सिपाही ने कहा कि कोई आवश्यक काम है और उन्हें शीघ्र चलने को कहा गया है। महीपति के लिए समस्या उत्पन्न हो गई । यदि उठते हैं, तो पूरी पूजा हुई नहीं है और न जाएँ, तो जागीरदार नाराज...
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Hindi Moral Story, Essay “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते” “Where women are worshipped” of “Mahabharat” for students of Class 8, 9, 10, 12.

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यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते Where women are worshipped एक बार भीम को पता चला कि धर्मराज युधिष्ठिर ने द्रौपदी के पैर दबाए हैं, तो उसे बड़ी ग्लानि हुई । वह सोचने लगा कि अब तो उलटा ही होने लगा है। जहाँ पत्नी को पति की सेवा करनी चाहिए, वहाँ पति पत्नी की सेवा करने लगा है। यह काम युधिष्ठिर ही कर सकते हैं। मैं तो ऐसा कदापि नहीं करूँगा । बात श्रीकृष्ण...
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Hindi Moral Story, Essay “अपराधो हि दंडनीयम्” “Apradho hi Dandniyam” of “Arjuna” for students of Class 8, 9, 10, 12.

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अपराधो हि दंडनीयम् Apradho hi Dandniyam पाँचों पांडवों की पत्नी एक ही (द्रौपदी) होने के कारण उन्होंने आपस में यह नियम बना लिया था कि जब वह उनमें से किसी एक के साथ हो, तो अन्य चार भाइयों में से कोई भी वहाँ न जाए, अन्यथा नियम-भंग करने के कारण उसे बारह वर्ष का वनवास भोगना होगा। एक बार एक ब्राह्मण अर्जुन के पास आया और बोला कि एक चोर उसकी...
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Hindi Moral Story, Essay “दया धर्म का मूल है” “Daya Dharam ka Mool hai” of “Sant Rangdas” for students of Class 8, 9, 10, 12.

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दया धर्म का मूल है Daya Dharam ka Mool hai पिता ने बालक को पैसे देकर बाजार से फल लाने को कहा। उसे रास्ते में कुछ लोग ऐसे दिखाई दिए, जिनके बदन पर पूरे वस्त्र भी न थे और जिनके चेहरों से साफ दिखाई देता था कि उन्हें बहुत दिनों से भोजन नसीब नहीं हुआ है। बालक का हृदय पसीज उठा और उसने पैसे बाँट डाले। इससे उसे बड़ा ही आत्मसंतोष...
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Hindi Moral Story, Essay “बुरा जो देखन मैं चला” “Bura jo dekhan mein chala ” of “Sheikh Saadi” for students of Class 8, 9, 10, 12.

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बुरा जो देखन मैं चला Bura jo dekhan mein chala  शेख सादी बचपन में पढ़ने में बड़े तेज थे और कक्षा में उनका हमेशा पहला नंबर रहता था। एक दिन उन्होंने अपने शिक्षक से शिकायत की, “उस्तादजी! मेरा जमाती मुझसे जलता है। जब मैं ‘हदीस’ के मुश्किल शब्दों का आसान मतलब निकालता हूँ, तो वह मुझसे जल जाता है। अगर उसकी यही हालत रही, तो सचमुच उसे नरक ही मिलेगा।” उस्ताद...
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Hindi Moral Story, Essay “मन की शुद्धि” “Mann ki Shudhi” of “Saint Martinus” for students of Class 8, 9, 10, 12.

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मन की शुद्धि Mann ki Shudhi एक युवक संसार से विरक्त हो फिलस्तीन के संत मरटिनियस के पास आया और बोला, “भगवन्! मैं आपकी सेवा में आ गया हूँ। कृपया मुझे आश्रय दें।” संत बोले, “जाओ, पहले शुद्ध होकर आओ।” युवक स्नान करने गया। संत ने एक भंगिन को बुलाकर युवक के आने पर इस प्रकार झाड़ू लगाने को कहा, जिससे धूल युवक के शरीर पर उड़े। भंगिन ने वैसा ही...
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Hindi Moral Story, Essay “झूठे रिश्ते” “Jhuthe Rishte” of “Saint Francis” for students of Class 8, 9, 10, 12.

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झूठे रिश्ते Jhuthe Rishte एक बार इटली के संत फ्रांसिस के पास एक सत्संगी युवक आया। संत ने उससे हाल-चाल पूछा, तो उसने स्वयं को अत्यंत सुखी बताया ! वह बोला, “मुझे अपने परिवार के सभी सदस्यों पर बड़ा गर्व है। उनके व्यवहार से मैं संतुष्ट हूँ।” संत बोले, “तुम्हें अपने परिवार के प्रति ऐसी धारणा नहीं बनानी चाहिए। इस दुनिया में अपना कोई नहीं होता। जहाँ तक माँ-बाप की सेवा...
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