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Posts tagged "Hindi Essay" (Page 33)
हिन्दी के विकास में योगदान Hindi ke Vikas mein Yogdaan हिन्दी के इतिहास के अध्ययन करने पर यह तथ्य स्पष्ट हो जाता है कि विगत हजार वर्षों से ऐसे लेखकों ने हिन्दी में श्रेष्ठ रचनाएँ प्रस्तुत की हैं जिनकी मातृभाषा हिन्दी नहीं थी। पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, बंगाल, आंध्र और कर्नाटक तक के लोगों का हिन्दी के प्रति विशिष्ट अवदान रहा है। हिन्दी के आदिकाल से आज तक ऐसे लोग हिन्दी में...
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March 1, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
साहित्य और धर्म Sahitya aur Dharam साहित्य को मानव-जीवन की कोमल-कान्त आन्तरिक भावनाओं का वाहक माना गया है, हालाँकि उनका आधार जीवन का ऊबड़-खाबड़, कठोर और यथार्थ धरातल ही हुआ करता है। इसके विपरीत धर्म का सम्बन्ध भी वस्तुतः मानव मन की कोमल, भावुक और एक सीमा तक चमत्कार प्रिय भावनाओं से ही हुआ करता है, यद्यपि वे भावनाएँ जागतिक धरातल पर आधारित न होकर तरह-तरह के आलौकिक या पारलौकिक विश्वासों,...
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March 1, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी Rashtrapita Mahatma Ghandi भारतीय संस्कृति की ‘धर्मपरायणता’ अपनी विशेषता है। इसी की आस्था से प्रत्येक भारतीय के अन्तस् में गीता का श्लोक यदा यदा हि धर्मस्य… गूँजता है। अब धरा पर अन्याय होता है, मानव-आत्मा उससे चीत्कार कर उठती ह, तभी प्रभु किसी महापुरुष के रूप में अवतरित होते है। राष्ट्रपिता गांधी जी ऐसे ही महापुरुष के अवतार थे। अपने जीवन-काल में अपने जिस मार्ग का भारतीयों को...
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March 1, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
रवीन्द्रनाथ ठाकुर Rabindranath Thakur भारत की पावन भूमि सदैव ऋषि-महर्षि, कलाकार, साहित्यकार, दर्शन-वेत्ता और युगीन महापुरुषों की जन्म-भूमि रही है। आधुनिक युग में कवीन्द्र रवीन्द्रनाथ का वही स्थान है। जहाँ महात्मा गांधी ने राजनीति को अपना क्षेत्र बनाकर अपने महान् व्यक्तिव से संसार के गर्व का खण्डन किया है वहीं कवीन्द रवीन्द्रनाथ ने गीत साहित्य के रूप में उसे आश्चर्य निमग्न किया है। पं. नेहरू के शब्दों में “भारत के ये...
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March 1, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
रामधारी सिंह दिनकर Ramdhari Singh Dinkar कोई भी साहित्य अपने युग का प्रतिनिधि होता है और साहित्यकार अपने भावों की अभिव्यक्ति उसी के अनुकूल अपनी कृति में करता है। यही कारण है कि प्रत्येक युग के साहित्य तथा उसके रूप-चित्रण में कुछ-न-कुछ अन्तर अवश्य रहता है। बदलती हुई मानवीय विचारधारा के साथ उसके कलेवर में भी परिवर्तन हो जाता है। जब यह बदलती प्रवृत्ति किन्ही सीमित व्यक्तियों तक ही उफन...
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March 1, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
मुंशी प्रेमचन्द Munshi Premchand सच्चा साहित्यकार चाहे वह कवि हो या गद्यकार अपने युग का प्रतिनिधि होता है। उस काल की सभी सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और राजनैतिक परिस्थितियों एवं समस्याओं का उसकी कृतियों में पूर्ण विवरण होता है। लेकिन वह अपने कर्म की यहीं इतिश्री नहीं कर देता, उन समस्याओं का हल भी प्रस्तुत करता है, यथार्थ की भूमि पर आदर्श के सहारे जीवन में एक दिव्य ज्योति को छिटकाता है।...
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March 1, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र Bharatendu Harishchandra अंग्रेजों के भारत आगमन से ही जैसे हिन्दी भाषा और साहित्य का पतन प्रारम्भ हो गया था। दीन भारतीय पेट की खातिर अंग्रेजी पढ़ने लगे थे। इससे पूर्व भी उर्दू-फारसी का ही अत्यधिक प्रयोग होता था। एक नवीन भाषा के रूप का प्रयोग अंग्रेजों ने आरम्भ किया, जिसे ‘हिन्दुस्तानी’ कहा जाता था। जो न पूर्णतः उर्दू-फारसी वाला रूप था न हिन्दी का। परन्तु राज-काज हिन्दी में होने...
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March 1, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
हिन्दी भाषा पर अंग्रेजी का प्रभाव Hindi Bhasha par English ka Prabhav मनुष्य स्वभावतः अन्य लोगों से कुछ-न-कुछ सीखने का आकांक्षी होता है। इसके लिए वह उनकी भाषा तथा साहित्य के सम्पर्क में आता है। इस प्रकार वह जहाँ कुछ ग्रहण करता है वहाँ कुछ प्रदान भी करता है। इसके अतिरिक्त जब दो जातियां राजनीति आदि के माध्यम से परस्पर एक-दूसरे के सम्पर्क में आती हैं तब उनकी भाषा तथा साहित्य...
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