नर हो न निराश करो मन को Nar ho na Nirash karo Mann ko प्रस्तावना : हिन्दुओं के धार्मिक सिद्धान्तों के अनुसार 84 लाख योनियों में मानव की योनि सर्वश्रेष्ठ है जो कि बार-बार नहीं प्राप्त होती और अच्छे कर्मों के आधार पर कभी एक बार बड़ी कठिनता से प्राप्त होती है। कबीर के मतानुसार- “मनिखा जनम दुर्लभ है, देह न बारम्बार। तरुवर से फल गिरि पड़ा, बहुरि न लागै डार।”...
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April 3, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
शठ सुधरहिं सत्संगति पाई Shath Sudhrahi Satsangati Pai प्रस्तावना : यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक अरस्तु के अनुसार कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। अत: वह अकेले रहना नहीं चाहता है, उसे साथ चाहिए, वह संगति की अपेक्षा करता है। मानव को संगति चयन में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। बड़ा सोच-विचार कर साथियों का चयन बच्चे को बचपन ही से कराना चाहिए; क्योंकि एक बार जो संस्कार पड़ जाते हैं, वे फिर...
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April 3, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
मेरा प्रिय कवि Mera Priya Kavi प्रस्तावना : यह वह समय था जब कि साहित्य परिस्थितियों के हाथ की कठपुतली बना हुआ था। निर्गुणोपासक संतों की वाणी निष्प्रभावी हो चुकी थी । सब जगह एक कमी का अनुभव किया जा रहा था। इस कमी की पूर्ति तुलसीदास ने की । इनका स्थान विश्व के साहित्य मंच पर अद्वितीय है। इसी कारण मैं भी इन्हें अपना प्रिय कवि मानता हूँ। जन्म और...
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April 3, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
मेरा प्रिय लेखक प्रेमचन्द Mera Priya Lekhak Premchand निबंध नंबर :- 01 जीवन-परिचय : भारत के अमर कथाकार, उपन्यास सम्राट मुन्शी प्रेमचन्द का जन्म 31 मई सन् 1880 ई०, तद्नुसार श्रावण कृषक दशमी सं०1937 वि० शनिवार को काशी से 4 मील उत्तर पाण्डेयपुर के निकट लमही ग्राम में एक निम्न वर्ग के कुलीन कायस्थ परिवार में हुआ था। आपका बचपन का असली नाम धनपतराय था। माता का नाम आनन्दी देवी था।...
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April 3, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
उपन्यास पढ़ने से लाभ और हानि Upanyas padhne se Labh aur Hani प्रस्तावना : मनोरंजन जीवन के लिए उपयोगी हैं। वस्तुत: आज के व्यस्त जीवन में यदि मानव को एक क्षण को भी मनोरंजन न प्राप्त हो, तो उसका जीना ही भार स्वरूप हो जाएगा। मनोरंजन से मस्तिष्क को शान्ति प्राप्त होती है। वैसे वैसे मनोरंजन के साथ-ही ज्ञान प्राप्ति के साधन सत्संग और चित्रपट दर्शन आदि हैं; परन्तु ये साधन...
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April 3, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
विद्यार्थी और फैशन Vidyarthi aur Fashion Best 4 Essays on “Vidyarthi aur Fashion” निबंध नंबर :- 01 फैशन का अर्थ व कारण : शारीरिक प्रसाधनों से समाज के समक्ष आत्म-प्रदर्शन करना ही फैशन है। मनोवैज्ञानिकों के मतानुसार हीनभाव, आत्मप्रदर्शन, जिज्ञासा तथा आत्मप्रेम आदि फैशन के प्रमुख कारण हैं। इसी कारण फैशन मानव स्वभाव के लिए स्वाभाविक माना गया है। वह सौंदर्य वृद्धि तथा सौंदर्य पिपासा की संतुष्टि हेतु सदैव फैशन की...
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April 3, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
राष्ट्रभाषा Rashtrabhasha प्रस्तावना : मानव मनोवृत्तियों के विकास का साधन शिक्षा ही है। मानव की जन्मजात विशेषताएँ शिक्षा द्वारा अकुरित, पल्लवित और पुष्पित होती हैं। शिक्षा का माध्यम : शिक्षा उसी माध्यम से दी जानी चाहिए, जिसे बालक-बालिकाएँ आसानी से समझ सकें । दूसरे शब्दों में शिक्षा का सबसे उत्तम माध्यम बालक की अपनी मातृभाषा ही हो सकती है। यदि उसे किसी अन्य भाषा से शिक्षा दी जाए, तो सबसे पहले...
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April 3, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
अध्ययन का आनन्द Padhne ka Anand प्रस्तावना : हजारी प्रसाद द्विवेदी के कथनानुसार, साहित्य मनुष्य की अपनी विशेषता है। साहित्य भाषा में लिखा जाता है। वह कुछ शब्दों का आधार संघात है और ये शब्द कुछ खास अर्थों को प्रकट करते हैं।” वास्तव में देखा जाए, तो ये अर्थ ही अध्ययन का आनन्द उत्पादक शक्ति हैं। इस शक्ति को अंगीकार करने के लिए सदैव ही मनुष्य विद्यार्थी बना रहना अच्छा समझता...
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April 3, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment