लता और मणि Lata aur Mani आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी साहित्य के उत्तर छायावादी काल के युग पुरुष थे। द्विवेदी जी के एक मित्र की पुत्री उनकी विद्यार्थी थी। एक दिन उसने द्विवेदी जी से पूछा, “हम लोगों के पाठ्यक्रम में पंडित रामचंद्र शुक्ल की ‘चिंतामणि’ तथा आपकी ‘कल्पलता’ दोनों हैं। ‘चिंतामणि’ बहुत कठिन लगती है और ‘कल्पलता’ सरस। ऐसा क्यों ? आचार्य द्विवेदी बोले, ‘सीधी बात है, चिंतामणि मणि...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
सच्चा धर्म Saccha Dharam एक बार आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अपने खेतों को देखकर गाँव वापस जा रहे थे कि उन्हें एक चीख सुनाई दी। एक अछूत स्त्री को साँप ने काट लिया था। द्विवेदी जी दौड़कर उसके पास गए और कुछ और न पाकर अपना जनेऊ तोड़कर स्त्री के पैर में सांप द्वारा काटे गए स्थान में थोड़ा ऊपर कस कर बांध दिया, फिर चाकू से उस स्थान पर चीरा...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
याददास्त पुरानी और नई Yaaddasht purani aur nayi आचार्य श्याम सुन्दर दास जी की जयन्ती मनाई जा रही थी। नागर जी ने पुरानी यादों को दोहराते हुए कहा, “मुझे पूरी तरह याद है कि बाबू जी सवेरे छः बजे कम्पनी बाग में दातुन करते थे। “ बीच में ही बाबू भगवती चरण वर्मा तुरन्त बोल उठे, “मैं इस समय नागर जी की याददास्त का समर्थन करता हूँ। क्योंकि अभी साढ़े पाँच...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
ससुर की कविता Sasur ki Kavita आचार्य रामचन्द्र शुक्ल कवि भी थे। वह एक कवि सम्मेलन में शामिल हुए। शुक्ल जी की बारी आने पर एक सरस्वर कविता पाठ करने वाले ने कहा, ” अब आप असुर (स्वर रहित) की कविता सुनिए।” शुक्ल जी उस समय तो चुप रहे और कविता पढ़ने लगे। कविता समाप्त करने के बाद आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने उन्हीं कवि से कविता पढ़ने का प्रस्ताव रखते हुए...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
शक्ल Shakal हिन्दी साहित्य के महान् लेखक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल एक बार खरीदारी के लिए बाजार गये तो दुकानदार ने उनके प्रश्नों का उत्तर अंग्रेजी में दिया। आचार्य शुक्ल ने बड़ी विनम्रता से कहा, “कृपया हिन्दी में बातचीत करें, मुझे अंग्रेजी भाषा नहीं आती।” दुकानदार बोला, “पर महाशय, आपकी शक्ल देखकर ऐसा नहीं लगता कि आप अंग्रेजी नहीं जानते ?” “हाँ भाई, सच है जैसे कि आपको देखकर नहीं लगता कि...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
कब्र से बोल रहा हूँ Kabra Se Bol Raha Hu कलकत्ता में एक कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। मंच पर उपस्थित कवियों में श्री नीरज तथा श्री हरिवंश राय बच्चन भी थे ! नीरज जी ने तो अपने काव्य पाठ से पूर्व भूमिका में कहा-“अब मैं बूढ़ा हो चला हूँ। मृत्यु की छाया का क्षीण आभास होता रहता है। इसी मनोदशा की एक कविता सुनिए, “एक पांव चल रहा अलग-अलग और...
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साहित्य देवता Sahitya Devta सन् 1944 में हरिद्वार साहित्य सम्मेलन में माखन लाल चतुर्वेदी सभापति चुने गये। उन्हें हाथी पर बिठाकर जुलूस निकाला गया और चांदी के रुपयों से तौला गया। कुल चार हजार आठ सौ रुपये जमा हुए। अपने इस स्वागत से अभिभूत दादा माखनलाल चतुर्वेदी डा० रामकुमार वर्मा से बोले। “रामकुमार, इस सरस्वती देवी की कृपा तो देखो कि छठी क्लास तक पढ़ा हुआ, नांगल स्कूल का मास्टर आज...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
साहित्यकार और राजनीतिज्ञ Sahityakar aur Rajnitigya लखनऊ के एक सम्मेलन में सम्मेलन के संचालक तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमवती नन्दन बहुगुणा को माला पहनाने लगे तो बहुगुणा जी ने कहा, “मित्र, यह माला पहले अध्यक्ष पंडित सोहन लाल द्विवेदी जी को पहनाई जाए”। द्विवेदी जी ने तुरन्त माइक पर आकर कहा, “बहुगुणा जी, साहित्यकार को आगे न लाओ। राजनीति को ही पहल करने दो। साहित्यकार आगे आ गया तो राजनीति की खाट खड़ी...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment