विज्ञापन के उपयोग और महत्व Vigyapan ke Upyog Aur Mahatav आज की युग-चेतना की दृष्टि से विभिन्न कलाओं के अंतर्गत विज्ञापन को भी एक उपयोगी कला कह सकते हैं। इस दृष्टि से ही आज के युग को विज्ञापन का युग भी कहा जाता है। विज्ञापन का एक खास प्रभाव और महत्व हुआ करता है। वह सामान्य को विशेष और कई बार विशेष को सामान्य बना देने की अदभुत क्षमता रखता है।...
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July 2, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
समाचार-पत्र Samachar Patra समाचार-पत्र यानी अखबार आज के जीवन के हर दिन की होने वाली सुबह की पहली महत्ती आवश्यकता है। मनुष्य एक बुद्धिमान, विचारवान, विविध प्रकार के संपर्क-सूत्रों वाला सामाजिक प्राणी है। संसार के घटना-सूत्रों, विकास क्रमों तथा अन्यान्य अनेकविध बातों से कटकर वह अकेला तो एक पल के लिए भी नहीं रह सकता। दूसरे लोगों, दूसरे ग्रामों, शहरों, प्रांतों और देशों के साथ हमेशा संपर्क बनाए रखने के लिए...
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July 1, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
निबंध नंबर : 01 मनोरंजन के साधन Manoranjan Ke Sadhan मानव स्वभाव ही आनंद-मनोरंजन प्रिय है। यों भी सुखद और स्वस्थ जीवन जीने के लिए जिस प्रकार अन्न, पानी और हवा आवश्यक है, उसी प्रकार स्वस्थ मनोरंजन के लिए सुभ क्षण भी परामावश्यक है। मनुष्य कोल्हू का बैल बना रहकर स्वस्थ-सुखी जीवन नहीं जी सकता। तन की थकान मिटाने के लिए जिस प्रकार आराम और नींद आवश्यक है, उसी प्रकार...
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July 1, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
महाविद्यालय का पहला दिन Mahavidyalaya Ka Pahla Din जब मैं स्कूल में पढ़ता था, तो महाविद्यालयों (कॉलेजों) में पढऩे वाले छात्रों को बड़ी उत्सुकता और गौर से देखा करता था। कई बार सोचता, वह दिन कब आएगा, जब मैं मनचाहे कपड़े पहन, किताबों के भारी बस्ते के बोझ से छुटकारा पाकर केवल हाथ लटकाए हुए ही महाविद्यालय में जाया करूंगा। वहां से आकर अपने छोटे बहन-भाइयों और स्कूल के जूनियर सहपाठियों...
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July 1, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
साक्षरता क्यों आवश्यक है? Saksharta Kyo Avashyak Hai? आज शिक्षा पर विशेष बल दिया जा रहा है। पूर्ण शिक्षा न भी सही, क्योंकि महंगी और विषम परिस्थितियों वाले युग में वह सभी के लिए शायद संभव भी नहीं, पर कम से कम साक्षर तो सभी हो ही समते हैं। अर्थात अक्षर-ज्ञान पाकर अपना काम तो सभी चला ही सकते हैं। इतना पढऩा-लिखना सीखना तो आज हर आदमी के लिए बहुत ही...
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July 1, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
आदर्श विद्यार्थी Adarsh Vidyarthi मनुष्य का जीवन संसार में सबसे अच्छा, ऊंचा और आदर्श माना जाता है। सामान्य रूप से इस मनुष्य जीवन के चार भाग या अवस्थांए मानी गई हैं। शैशव के सुकुमार क्षण बीतते विद्यार्थी-जीवन का आरंभ हो जाया करता है, जिसे मनुष्य जीवन की सबसे बढक़र अच्छी और आदर्श अवस्था स्वीकार किया गया है। लेकिन दुख एंव खेद के साथ मानना और कहना पड़ता है कि आज...
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June 29, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
अध्ययन के लाभ Adhyan Ke Labh मनुष्य स्वभाव से ही अध्ययनशील प्राणी माना गया है। ‘अध्ययन’ शब्द का अर्थ है-पढऩा। अध्ययन या पढऩे के मुख्य दो रूप स्वीकारे जाते हैं – एक, विशेष अध्ययन, जो किसी विशेष विषय या विशेष प्रकार की पुस्तकों तक ही सीमित हुआ करता है। दूसरा, सामान्य अध्ययन, जो सभी प्रकार के विषयों और पुस्तकों के साथ-साथ पत्र-पत्रिकांए तथा व्यापक जीवन के प्रत्येक पक्ष पढऩे तक विस्तृत...
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June 29, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
पुस्तकालय और महत्व Pustkalay Aur Mahatav पुस्तकाल, अर्थात पुस्तकों का विशाल संग्रह या घर। पुस्तकों के आगार या भंडार को, या फिर उस स्थान विशेष को कि जहां अनेक विषयों से संबंधित सभी प्रकार की पुस्तकें एकत्रित या संकलित रहती है। परिभाषित प्रचलित शब्दावली में पुस्तकालय कहा जाता है। इस प्रकार हम किसी अच्छे पुस्तकालय को युग-युगों के संचित ज्ञान का भंडार भी कह सकते हैं। क्योंकि युग-युगों से मनुष्य जो...
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June 29, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment