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Archive by category "Languages" (Page 534)
जीवन में खेलों का महत्त्व Jeevan me Khelo ka Mahatva अथवा व्यायाम और खेल Vyayam aur Khel Essay No. 1 प्रस्तावना जीवन में स्वास्थ्य का ही सबसे अधिक महत्व है। शक्तिशाली मानव ही भूमण्डल पर हर प्रकार का सुख भोग सकता है। इसके लिए दुष्कर कृत्य भी सुगम हो जाते है।उससे शत्रु भी सदैव भयभीत रहता है। और उपलब्धियाँ उसके पगों में लोटती है। कार्य सिद्धि सहचरी के समान उसके पीछे...
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April 1, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages2 Comments
मनोरंजन के आधुनिक साधन Manoranjan ke Adhunik Sadhan प्रस्तावना : मनोरंजन की पृष्ठभूमि : दिवस के अवसान के समीप आते ही जीवनयापन के लिए अनेक अच्छे-बुरे धंधों में उलझा हुआ मानव, संध्या के अंचल में बैठकरशारीरिक विश्राम के साथ-साथ प्राप्ति मानसिक विश्राम की भी इच्छा रखता है। जिससे उसका क्लांत मन फिर से प्रफुल्लित हो उठे, उसके अवयव अदम्य उत्साह से भर उठे यही अच्छे मनोरंजन की पृष्ठभूमि है। यदि मानव...
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April 1, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
कम्प्यूटर के बढ़ते चरण Computer ke badhte Kadam निबंध नंबर : 01 प्रस्तावना : आधुनिक ज्ञान-विज्ञान ने आज के मानव-समाज को दैनिक उपयोग में आ सकने वाले कई तरह के महत्त्वपूर्ण आविष्कार प्रदान किए है कहा जा सकता है कि कम्प्यूटर उनमें से अभी तक का अन्तिम बहुआयामी एवं बहुपयोगी आविष्कार है। इसने आज के व्यस्त-त्रस्त मानव को कई प्रकार की सुविधाएँ-सरलताएँ प्रदान की है। पहले के मानव को जिन अनेक...
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April 1, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
विज्ञान और स्वास्थ्य Vigyan aur Swasthya प्रस्तावना : दृश्य-अदृश्य जीव-जगत में जो कुछ भी विद्यमान है। मनष्य उनमें सर्वोच्च स्थान एवं महत्व रखता है। इसमें तनिक भी सन्देह नहीं आज तक विश्व में जिस किसी भी प्रकार का और जितना निर्माण हुआ है। भविष्य में भी प्रभाव जो कुछ होते रहने की सम्भावना है। वह सब मानव के लिए ही है एवं होगा भीविश्व के सारे उपक्रम मानव को केन्द्र में...
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April 1, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
अन्तरिक्ष में मानव के बढ़ते चरण Antriksh me Manav ke Badhte Charan प्रस्तावना : लगता है आज के विज्ञानी मानव के लिए यह धरती बहुत छोटी पड़ गई है या फिर उसकी इच्छाओं का विस्तार इस सीमा तक हो गया है।कि वे धरती और आकाश को अपनी बाहों में समेट कर भी सन्तुष्ट नहीं हो पा रही है।इसी कारण तो पिछले कई दशकों से वह धरती से ऊपर उठ आकाश में...
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April 1, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
टेलीफोन : सुविधा के साथ असुविधा Telephone : Suvidha ke sath Asuvidha प्रस्तावना : आखिर मानव का व्यवहार ही तो है। वह कई बार अनियमित एवं असन्तुलित होकर स्थान, समय और स्थिति का ध्यान न रख कर किसी अच्छी वस्तु को भी बुरी सुविधापूर्ण स्थिति को भी असुविधाजनक बना दिया करता है। फलस्वरूप बेमतलब ऐसी स्थितियाँ उत्पन्न हो जाया करती है। जिन पर काबू पा सकना मानव के वश में...
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April 1, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
विज्ञान और हमारा जीवन Vigyan aur Hamara Jeevan प्रस्तावना : आज का युग ज्ञान-विज्ञान सभी प्रकार की प्रगतियों एवं विकास का युग माना गया है। आज का वैज्ञानिक मानव इस धरती पर विद्यमान सभी प्रकार के तत्त्वों को जान चुका है। समुद्र का अवगाहन एवं धरा प्रभाव का दोहन भली प्रकार से कर चुका है। इसी कारण अब उसकी दृष्टि अन्तरिक्ष में विद्यमान अन्य ग्रहों के दोहन एवं अवगाहन की...
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April 1, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
दूरदर्शन की उपयोगिता Doordarshan ki Upyogita प्रस्तावना : दूरदर्शन यंत्र पूर्णतया बीसवीं शताब्दी की देन है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में भी इस प्रकार के यंत्रों का उल्लेख मिलता है। महाभारत युग में भी संजय के पास दूरदर्शन सरीखा कोई यंत्र रहा होगा, जिस के माध्यम से वे महाराज धृतराष्ट्र को महाभारत युद्ध की सम्पूर्ण गाथा सुनाते रहे थेयदि इस बात को सत्य स्वीकार कर लिया जाए, तो यह भी सत्य है।...
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April 1, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages2 Comments