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Hindi Essay on “Paradhin Sapnehu Sukh Nahi” , ”पराधीन सपनेहु सुख नाहीं” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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पराधीन सपनेहु सुख नाहीं Paradhin Sapnehu Sukh Nahi   वैसे तो सुख का सम्बन्ध व्यक्ति की भावना और मन के साथ माना जाता है, पर सत्य यह भी है कि एक स्वतंत्र-स्वाधीन भावना से भरा मन ही वास्तविक सुख का अनुभव कर सकता है, पराधीन और परतंत्र व्यक्ति कदापि नहीं। ऐसा क्यों होता है, इसके प्रत्यक्ष और परोक्ष कारण गिनाए जा सकते हैं? पराधीन आदमी पहले तो कुछ सोचने-करने का अवसर...
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Hindi Essay on “Sanch Barabar Tap Nahi” , ”साँच बराबर तप नहीं” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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साँच बराबर तप नहीं Sanch Barabar Tap Nahi   प्रस्तुत काव्योक्ति में सत्य का ही महत्त्व स्वीकार किया गया है जो स्वतः में एक सर्वश्रेष्ठ कठोरतम तप है। सत्य बहमखी प्रतिभा का प्रतीक है और तप कठिनतम साधना का। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पर्ण विकास करने के लिए शिवं एवं सुन्दरम् से संयुक्त तपमय सत्य का सम्बल होना चाहिए। सत्य’ शब्द संस्कत के ‘अस्ति’ क्रिया का अर्थ होता है ‘है’...
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Hindi Essay on “Upanyas Padhne ke Labh aur Hani” , ”उपन्यास पढ़ने से लाभ और हानि” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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उपन्यास पढ़ने से लाभ और हानि Upanyas Padhne ke Labh aur Hani   इस यांत्रिक युग में मनोरंजन से ही मस्तिष्क को शान्ति प्राप्त होती है। वैसे मनोरंजन के साथ ही ज्ञान प्राप्ति के साधन सत्संग, चित्रपट दर्शन आदि हैं; परन्तु ये साधन सर्वथा सुलभ नहीं हैं। ऐसी स्थिति में बुद्धि विकास एवं मनोरंजन का श्रेष्ठतम साधन पुस्तक अध्ययन ही है। इसमें भी लोग कथा साहित्य या उपन्यास के पठन में...
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Hindi Essay on “Mera Priya Granth – Ramcharitmanas” , ”मेरा प्रिय ग्रन्थ – रामचरितमानस” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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मेरा प्रिय ग्रन्थ – रामचरितमानस Mera Priya Granth –  Ramcharitmanas   मेरा प्रिय ग्रन्थ रामचरितमानस है। लोकनायक तुलसीदास की इस अमर कृति में वे सभी विद्यमान हैं, जिन्होंने केवल मुझे ही नहीं; अपितु भारतीय जन-जीवन को सबसे अधिक प्रभावित किया है। इस महत्त्वपूर्ण कृति ने भारतीय आदर्श, नीति और संस्कृति की रक्षा की है। मेरे प्रिय ग्रन्थ रामचरितमानस का मुख्य उद्देश्य पुरुषोत्तम श्रीराम के लोक रक्षक चरित्र का विशद् चित्रांकन करना है।...
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Hindi Essay on “Mera Priya Kavi- Ramdhari Singh Dinkar ” , ”मेरा प्रिय कवि – रामधारी सिंह ‘दिनकर” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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मेरा प्रिय कवि – रामधारी सिंह ‘दिनकर Mera Priya Kavi- Ramdhari Singh Dinkar    आदि काल से लेकर आज तक हिन्दी-साहित्य के क्षेत्र में अनेक कवि हो गुजरे हैं। इन सभी का अपना-अपना योगदान और महत्त्व है। कोई किसी से कम नहीं। सूरदास यदि सूर्य समान है, तो गोस्वामी तुलसीदास चन्द्र समान। किसी ने कहा है कि ‘सुरनारी गंग दोऊन भए, सुकविन के सरदार। किसी ने कबीर की प्रशंसा की है,...
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Hindi Essay on “Mera Priya Upanyaskar ” , ” मेरा प्रिय उपन्यासकार” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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मेरा प्रिय उपन्यासकार Mera Priya Upanyaskar    प्रेमचंद मेरे प्रिय उपन्यासकार मुन्शी प्रेमचन्द का जन्म 31 मई सन 1880 ई० को काशी चार मील उत्तर पाण्डेयपुर के निकट लमही ग्राम में एक निम्न वर्ग के कुलीन कायस्थ रिवार में हुआ था। आपका बचपन का नाम धनपतराय था। माता का नाम आनन्दी देवी आ। पिता बाबू अजायबराय डाकखाने में बीस रुपये मासिक वेतन पर मुन्शी का कार्य करते थे। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा...
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Hindi Essay on “Hindi Kavya me Prakriti Varnan” , ”हिन्दी काव्य में प्रकृति-वर्णन” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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हिन्दी काव्य में प्रकृति-वर्णन Hindi Kavya me Prakriti Varnan ‘प्रकृति’ शब्द बड़ा व्यापक अर्थ वाला है। यह मानव स्वभाव के अर्थ में प्रयुक्त होता है। यह साख्य दर्शन के अनुसार नारी का और दूसरे मतों से माया का पर्यायवाची है, और इसके साथ ही इसके मूल गुण का भी अर्थ व्यजित होता है। काव्य में प्रकृति का इसी मुल गुण युक्त अकृत्रिम वातावरण से है जो प्रायः मानव के ही नहीं...
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Hindi Essay on “Hum Sahitya kyo Padhte Hai” , ”हम साहित्य क्यों पढ़ते हैं?” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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हम साहित्य क्यों पढ़ते हैं? Hum Sahitya kyo Padhte Hai   साहित्य को किसी भी मानव समुदाय और उसके द्वारा अर्जित की गई समृद्ध भाषा की अन्यतम उपलब्धि माना गया है। सामान्य तौर पर साहित्य के दो रूप माने गए हैंएक लोक साहित्य, जिस का लिखित रूप प्रायः नहीं होता, मुँह जबानी ही एक व्यक्ति से दूसरे के पास पहुँचा करता है। ऐसा होने से उसके मूल स्वरूप में प्रायः काफी...
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