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Hindi Essay on “Manushya ho Manushya ko Pyar do” , ”मनुष्य हो, मनुष्यता को प्यार दो” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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मनुष्य हो, मनुष्यता को प्यार दो Manushya ho Manushya ko Pyar do   मनुष्य सृष्टि के सभी प्राणियों में से श्रेष्ठ माना जाता है। इस का कारण स्पष्ट है। वह यह कि मनुष्य सोच-समझ सकता है। अच्छे-बुरे की पहचान और दोनों में विवेक कर सकता है। अन्य समस्त प्राणियों की तुलना में केवल मनुष्य ही अच्छे को अच्छा, बुरे को बुरा कह सकने की बुद्धि और क्षमता रखता है। संसार में...
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Hindi Essay on “Gaya Waqt phir hath aata nahi” , ”गया वक्त फिर हाथ आता नहीं” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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गया वक्त फिर हाथ आता नहीं Gaya Waqt phir hath aata nahi   वक्त-अर्थात् समय, गया-अर्थात् बीता या समाप्त हो गया। यदि धन समाप्त या नष्ट हो जाए, उसे दुबारा पाया-कमाया जा सकता है। किसी कारणवश यदि मान-सम्मान भी जाता रहे (हालाँकि जाने देना बहुत ठीक नहीं), तो प्रयत्न करके, अच्छे कार्य करके उसे दुबारा पाया या बनाया जा सकता है। ऊँचे से ऊँचा भवन यदि ढह जाए, निःसंदेह दुबारा खड़ा...
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Hindi Essay on “Sajjanta Manav ka Abhushan” , ”सज्जनता मानव का आभूषण है” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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सज्जनता मानव का आभूषण है Sajjanta Manav ka Abhushan   भूषण का अर्थ होता है-गहना। गहने शरीर को सजाने, उसकी बाहरी सुन्दरता बढ़ाने के काम आया करते हैं। इसके लिए मनुष्य जाति हर वर्ष, बल्कि हर दिन लाखों-करोड़ों रुपया खर्च कर दिया करती है। फिर भी अपनेपन की सुन्दरता को शायद पाती, जैसा कि वह चाहती है। इस कारण तन को सजाने वाले गहने आकार, रंग-ढंग हर दिन बदलता रहता है।...
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Hindi Essay on “Swasthya hi Sampatti hai” , ”स्वास्थ्य ही सम्पत्ति है” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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स्वास्थ्य ही सम्पत्ति है Swasthya hi Sampatti hai   प्रसिद्ध कहावत है कि अगर मनुष्य की धन-सम्पत्ति नष्ट हो जाए, तो समझो  कुछ भी नष्ट नहीं हुआ या फिर कोई बड़ी बात नहीं। एक स्वस्थ व्यक्ति लगातार परिश्रम सम्पत्ति दुबारा कमा और बना सकता है। लेकिन अगर उस का स्वास्थ्य ही रण नष्ट हो गया, तो समझो कि सभी कुछ गया, नष्ट हो गया। क्योंकि उस का अवस्था में व्यक्ति कुछ...
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Hindi Essay on “Apni karni Paar Utarni” , ”अपनी करनी पार उतरनी” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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अपनी करनी पार उतरनी Apni karni Paar Utarni   आज क्या, किसी भी युग में व्यक्ति का अपना कर्म ही सब से बढ़कर उसका विश्वसनीय सहायक रहा और हमेशा रहेगा भी। आज के युग में तो अपने कर्म पर और भी भरोसा इस कारण आवश्यक है कि आज हर व्यक्ति केवल अपने लिए जी रहा है। उसे दूसरों के जीने-मरने की कतई कोई चिन्ता नहीं। वैसे भी जमाना आत्मविश्वासी और स्वावलम्बी...
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Hindi Essay on “Pani kera Budbuda as Manush ki Jaat” , ”पानी केरा बुदबुदा अस मानुष की जात” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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पानी केरा बुदबुदा अस मानुष की जात Pani kera Budbuda as Manush ki Jaat संसार की प्रत्येक वस्तु, यहाँ तक कि उन वस्तुओं को बनाने और उपयोग करने वाला सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी मनुष्य भी हमेशा रहने वाला नहीं। देखने में जो कुछ भी सुन्दर और स्थायी लगता है, मन को आकर्षित करता है, अच्छे-बुरे कर्म करके उसे पा लेने की मन को प्रेरणा दिया करता है; वह सब भी नाशवान...
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Hindi Essay on “Jaisa Karam Karoge Wesa Phal Milega” , ”जैसा कर्म करोगे वैसा फल मिलेगा” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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जैसा कर्म करोगे वैसा फल मिलेगा Jaisa Karam Karoge Wesa Phal Milega   जिस प्रकार चन्दन जैसा जड़ भूरुह अपनी शीतलता के स्वभाव को नहीं त्यागता। उसी प्रकार हमें भी अपनी कल्याणकारी महान् प्रवृत्ति का त्याग नहीं करना चाहिए और हमारे प्रति भले ही कोई व्यक्ति दुर्व्यवहार करे; किन्तु हमें उसके साथ भी सद्व्यवहार ही करना चाहिये, यही इस सूक्ति की सीख है। फलतः जो व्यक्ति दूसरों के प्रति दुर्व्यवहार करता...
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Hindi Essay on “Hani Labh, Jeevan Maran Vidhi Hath” , ”हानि-लाभ, जीवन-मरण विधि हाथ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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हानि-लाभ, जीवन-मरण विधि हाथ Hani Labh, Jeevan Maran Vidhi Hath   इस वैज्ञानिक युग का मानव हृदय प्रधान नहीं अपितु बुद्धि प्रधान है। वह प्रत्येक कार्य को अपने बुद्धि कौशल के द्वारा पूर्ण करना चाहता है। आज वह चन्द्रलोक में सुख-वैभव के उपभोग के स्वप्न देख रहा है। आज वह प्रत्येक कार्य को अपने अधीन मानता है। इस काव्योक्ति के अनुसार किसी भी कर्म को करने के पश्चात् उस कार्य के...
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