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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Bharatiya Cinema ”, ”भरतीय सिनेमा” Complete Hindi Anuched for Class 8, 9, 10, Class 12 and Graduation Classes

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भरतीय सिनेमा Bharatiya Cinema  भारतीय चलचित्र जगत् या सिनेमा का आरम्भ या सिनेमा का आरम्भ मूक चित्र निर्माण से हुआ था। यह आरम्भ सोद्देश्य तो था ही, आदर्शमय भी था अर्थात् तब मनोरंजन की स्वस्थ सामग्री प्रदान करना इस का मुख्य एवं मूल उद्देश्य था। ऐसा करते समय जीवन और समाज से सम्बन्ध रखने वाली तरह-तरह की बातें, प्रश्न और समस्याएँ, मानवीय उदात भावनाएँ, देशभक्ति, जैसी बातें भी उसमें अपने आप...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Bhrashtachar ke Badhte Charan”, ”भ्रष्टाचार के बढ़ते चरण” Complete Hindi Anuched for Class 8, 9, 10, Class 12 and Graduation Classes

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भ्रष्टाचार के बढ़ते चरण Bhrashtachar ke Badhte Charan भ्रष्टाचार, तेरे रूप अनेक। दूसरे शब्दों में आज अनेक क्या प्रत्येक स्तर पर और अनेक रूपों में जीवन- समाज में भ्रष्टाचार का विस्तार हो चुका है, निरन्तर होता ही जा रहा है। कोई भी कोना बचा नहीं रहना चाहता। सरकार और सरकारी प्रतिष्ठानों जन सेवा से सम्बन्धित प्रतिष्ठानों का तो सीधा-सादा अर्थ ही भ्रष्टाचार का संवैधानिक अड्डा या दूसरों की जेबो पर डाका...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Bharat South Africa Sambandh”, ”भारत-दक्षिण अफ्रीका सम्बन्ध” Complete Hindi Anuched for Class 8, 9, 10, Class 12 and Graduation Classes

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भारत-दक्षिण अफ्रीका सम्बन्ध Bharat South Africa Sambandh राष्ट्रों में परस्पर हितों का ध्यान तो रखना ही पड़ता है, राष्ट्र-हितों का ध्यान उस से भी पहले रखा जाता है। वस्तु सत्य तो यह है कि दो राष्ट्रों में प्रगाढ सम्बन्धों का ने राष्ट्र का हित ही हुआ करता है, पारस्परिक हितों की बात उसके आ पाती है। अफ्रीका युगों तक गोरी संस्कृति के अधीन रहा है। वहाँ के मूल निवासी इसी कारण...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Bharat Arab Sambandh”, ”भारत-अरब सम्बन्ध” Complete Hindi Anuched for Class 8, 9, 10, Class 12 and Graduation Classes

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भारत-अरब सम्बन्ध Bharat Arab Sambandh अभी कुछ वर्षों तक भारत के अरब देशों के साथ सम्बन्ध प्राय: अच्छे ही रहे हैं। अरब देश भारत की रीति-नीतियों का प्रायः खुलकर समर्थन किया करते थे, जब कि भारत राष्ट्रीय हितों की परवाह किए बिना अरब जगत् की हर उचित-अनुचित बात समर्थन किया करता था। यहाँ तक कि कई बार यह देखकर भी किसी अरब देश के आचरण और व्यवहार भारत की नीतियों के...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Bharat Bangladesh Sambandh”, ”भारत-बाँग्लादेश सम्बन्ध” Complete Hindi Anuched for Class 8, 9, 10, Class 12 and Graduation Classes

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भारत-बाँग्लादेश सम्बन्ध Bharat Bangladesh Sambandh आज जिसे बांग्ला देश कहा जाता है, सन् 1971 तक वह उस पाकिस्तान का एक भाग था, जिस का निर्माण धर्म और जाति के आधार पर विशाल भारत को तोड़ कर किया गया था। वह विभाजन और उसका आधार गलत था, पाकिस्तान से अलग हो कर बांग्लादेश के अस्तित्व में आने की घटना से यह तथ्य स्पष्ट हो जाता है। यदि धर्म और जाति का आधार...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Bharat Russia Sambandh”, ”भारत-रूस सम्बन्ध” Complete Hindi Anuched for Class 8, 9, 10, Class 12 and Graduation Classes

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भारत-रूस सम्बन्ध Bharat Russia Sambandh रुस सोवियत संघ के रूप में मान्यता प्राप्त एक शक्ति-सन्तुलन बनाए रख हमें समर्थ अलग शक्ति-गुट था; तब भारत राष्ट्र के साथ उसके सम्बन्ध बड़े ही सुदृढ एवं अच्छे थे। संयुक्त राष्ट्र संघ में सोवियत रूस भारत का सब से बड़ा समर्थक एवं को शक्ति के रूप में संरक्षक तो था ही, उससे बाहर भी वह भारत का एक मात्र विश्वसनीय मित्र एवं साथी था। संकट...
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Hindi Essay on “Chota Parivar Sukhi Parivar”, ”छोटे परिवार सुखी परिवार” Complete Hindi Anuched for Class 8, 9, 10, Class 12 and Graduation Classes

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छोटे परिवार सुखी परिवार Chota Parivar Sukhi Parivar जमानव-सभ्यता संकट के जिन क्षणों से गुजर रही है, जीवन जीना जिस तरह कठिन होता जा रहा है, विशेष कर आम आदमी को जिस प्रकार के अभाव अभियोगों जीने को विवश होना पड़ रहा है; उस सब का मूल कारण है जीवन जीने के साधनों नित्य प्रति महँगे और दुर्लभ होते जाना। इस महँगाई और दुर्लभता का मुख्य कारण यह माना जाता है...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Van-Sanrakshan ”, ”वन-संरक्षण” Complete Hindi Anuched for Class 8, 9, 10, Class 12 and Graduation Classes

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वन-संरक्षण Van-Sanrakshan  निबंध संख्या:- 01 वन अरण्य, जंगल, विपिन, कानन आदि सभी शब्द प्रकृति की एक ही अनुपम देन समर्थ भाव और स्वरूप को प्रकट करने वाले हैं। आदि मानव का जन्म उस की माता-सस्कति का विकास इन वनों में पल-पुसकर ही हुआ था। उस की खाद्य आवास आदि सभी समस्याओं का समाधान करने वाले तो वन थे ही, उसकी रक्षा भी वन ही किया करते थे। वेदों, उपनिषदों की रचना...
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