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Archive by category "Languages" (Page 289)
घर में काम करने वाली परिचारिका कमला और मालकिन प्रमिला के बीच वेतन वृद्धि को लेकर संवाद कमला – माँ जी, अगले महीने से पगार 200 रुपए बढ़ा दो नहीं तो दूसरी कामवाली ढूँढ़ लो। प्रमिला – पैसे पेड पर नहीं उगते। एकदम 200 रु० ? 100-50 कहे तो बढ़ा दूंगी। कमला – मँहगाई का हाल तो देखो। कमरे का किराया 100 रुपए बढ़ गया। आटा-चावल सब्जी सब कितने महँगे हो...
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October 31, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
दादी और प्रगतिशील विचारों वाली पोती नेहा के बीच संवाद दादी- अरी नेहा, सुबह-सुबह कहाँ जा रही है ? नेहा- आपको बताया तो था, आज स्कूल से हमें ‘हरिजन बस्ती’ ले जा रहे हैं। वहाँ हम औरतों को घर-बाहर और स्वयं की साफ़-सफ़ाई की बातें बताएँगे। कंम्प्यूटर द्वारा वहाँ के स्कूली बच्चों का अपने बच्चों से संपर्क करवाएँगे। दादी – ऐं! तुम क्यों जाओगी इतनी गर्मी में। धूल-धक्कड़ भरी बस्ती में...
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October 31, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
हरे भरे वृक्ष और काट दिए वृक्ष के बीच संवाद हरा वृक्ष – क्या हाल बना दिया तुम्हारा इन इंसानों ने ? कटा वृक्ष – इंसान ? उन्हें इंसान कहेंगे तो ‘इंसानियत’ की परिभाषा बदलनी पड़ेगी। हरा वृक्ष – सच कहा तुमने ? कैसे हरे-भरे थे तुम कल तक! पक्षी तुम्हारी डाल से मेरी डाल पर फुदक-फुदक कर कैसे खेलते थे। वह बेचारी चिड़िया कितना रोई जिसका नीड़ उजड़ गया, अंडे...
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October 31, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
माँ के बीमार हो जाने पर भाई–बहन के बीच संवाद शैलेश – नीतू, तुमने न अपना बिस्तर ठीक किया है और ना ही कपड़े अलमारी में रखे हैं। नीतू – भैया, अभी कर दूँगी सब। मैं माँ के लिए दलिया बना रही थी। जब तक माँ ठीक नहीं हो जाती हम दोनों को मिलकर सारे काम करने होगे। शैलेश – वाह मेरी बहना! तू इतनी समझदार कैसे हो गई ? अब...
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October 31, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
पेड़ पर अंकुरित पल्लव और भूमि पर गिरे सूखे पत्ते के बीच वार्तालाप नव पल्लव- आहा! क्या मस्त हवा है। मुझे प्यार से दुलराती है, झुलाती है। है न प्यारी ? सूखा पत्ता – समय-समय की बात है। यही हवा मुझे असहाय जान इधर-उधर फेंकती रहती है। मैं विवश हो यहाँ-वहाँ ठोकरें खाता फिरता हूँ। नव पल्लव- तुम्हें पेड़ ने नीचे क्यों गिरा दिया? तुम इतने सूखे-पीले क्यों हो ? सूखा...
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October 31, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
शहर में महिलाओं के साथ बढ़ती छेड़छाड़ आदि की घटनाओं के संबंध में दो सखियों के बीच वार्तालाप शोभना– रेखा, आज शाम नेहरूपार्क में अनुष्का शंकर का कार्यक्रम है, चलोगी ? रेखा- मन तो बहुत है, पर माँ ने शाम के 6 बजे के बाद कहीं भी बाहर जाने पर रोक लगा दी है। शोभना- सच, दिल्ली हम महिलाओं के लिए कितनी असुरक्षित होती जा रही है। नारी मुक्ति के नारे...
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October 31, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
जहाँ सुमति तहँ संपत्ति नाना Jahan Sumati Tahan Sampati Nana सुमति अर्थात अच्छी बुद्धि। बुद्धि ही हमें सुमार्ग या कुमार्ग की ओर ले जाती है। चोर, लुटेरे, डाकुओं की बुद्धि तीव्र हो सकती है किंतु उनकी सोच की दिशा गलत होती है। ऐसी बुद्धि काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह के वशीभूत होकर कुकर्मों की ओर प्रेरित करती है। परिणामतः पूरा जीवन नष्ट हो जाता है। इसके विपूरीत जिनकी बुद्धि सही-गलत, उचित-अनुचित...
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October 31, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
सब दिन रहत न एक समान Sab Din Rahat Na Ek Saman समय नदी की धारा के समान है जो निरंतर आगे बढ़ता जाता है। बीते समय को किसी कीमत पर भी लौटाया नहीं जा सकता। समय की इस परिवर्तनशीलता को समझना जीवन को सही ढंग से जीने के लिए परम आवश्यक है। जो यह सच जान लेता है वह सुख आने पर अहंकारी नहीं बनता और दुख आने पर निराशा...
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October 31, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment