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Archive by category "Languages" (Page 138)
पादुका पुराण Paduka Puraan बंग्ला के प्रसिद्ध उपन्यासकार शरत चन्द्र किसी साहित्यिक समारोह में जा रहे थे। कहीं जूते चोरी न हो जायें, इस डर से उन्होंने द्वार पर आते ही अखबार में जूते लपेटकर बगल में दबा लिये। इस विषय की जानकारी किसी प्रकार रवीन्द्रनाथ ठाकुर को हो गई। शरत् बाबू जैसे ही मंच पर आये कि रवि बाबू ने पूछा, “बगल में क्या दबा रखा है ?” “एक बहुमूल्य...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
नाम-कथा Naam-Nath यशस्वी बंग्ला कथाकार सुकुमार ने प्रसिद्ध हिन्दी कवि विरेन्द्र मिश्र को छेड़ते हुए कहा, “प्राचीन काल में जो वेद पढ़ने वाले ब्राह्मण थे, उन्हें वेदी कहा गया। जैसे द्विवेदी, त्रिवेदी, चतुर्वेदी इत्यादि। जो पढ़ाते थे वे उपाध्याय, जो न पढ़ते थे और न पढ़ाते थे वे मिश्र कहलाए अर्थात् मिला-जुला कर काम चलाते थे। विरेन्द्र मिश्र भी कहाँ चूकने वाले थे, उन्होंने चटर्जी महाशय को जवाब दिया, “पहले ब्राह्मण...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
दे हैं तो दे De hein to de सुप्रसिद्ध बंग्ला साहित्यकार प्यारी चन्द्र मित्र बड़े मज़ाकिया थे। उनके एक घनिष्ठ मित्र देव नारायण दे के पुत्र के विवाह के सिलसिले में खर्च का हिसाब लगाया जा रहा था। प्यारे बाबू पर ही दे साहब ने खर्च की राशि निश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। प्यारी बाबू ने खूब बड़ा-चढ़ा कर सूची पेश कर दी। देव नारायण बौखला कर बोले, ‘इतने रुपये...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भूल का दण्ड Bhool Ka Dand एक बार अन्तरायण में शान्ति निकेतन के अध्यापकों की सभा थी, गुरूदेव रवीन्द्र नाथ भी उस सभा में आने वाले थे। अध्यापक खुशी में बातचीत कर रहे थे। गुरूदेव सहसा कक्ष में आए और गम्भीर भाव से कहा, “नेपाल बाबू, आजकल आप काम में बहुत भूलें करते हैं। इसके लिए आपको दण्ड लेना होगा।” गुरूदेव को उस ढंग से बातें करते देख सभी एक दूसरे...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
कष्ट मेरे पैर Kasht mere pair गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर के पैर में एक बार बिच्छू ने काट लिया था। इधर-उधर से जो सुनता दौड़ा चला आता। कई डॉक्टर भी आये लेकिन गुरूदेव शान्त भाव से मुस्करा रहे थे। वेदना का रंचमात्र भी आभास उनके चेहरे पर नहीं था। उनसे जब पूछा गया, “गुरूदेव आपको क्या कष्ट नहीं है ?” “कष्ट मेरे पैर को है, मुझे नहीं।” सहज उत्तर था।
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
मेरे बड़े भाई Mere Bade Bhai एक बार चीन यात्रा के दौरान गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर की आम खाने की बहुत इच्छा हुई। मेहमानों ने आम मंगाये तो गुरूदेव बड़ी अभिलाषा से खाने बैठ गये। पर आमों में रेशे बहुत थे और उन्हें चाकू से काटकर खाना भी मुश्किल हो रहा था। गुरूदेव आमों की ढेरी के सामने करबद्ध नमस्कार कर बैठ गए। जब वहाँ उपस्थित लोगों ने उनसे पूछा-“गुरूदेव, यह...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
थाली Thali संतराम (बी०ए०) गवर्नमेंट कालेज, लाहौर में बी०ए० के छात्र थे। एक दिन भोजन कक्ष में भोजन करने बैठे और एक साथी से जानबूझ कर छू गए। वह भी भोजन कर रहा था। बस फिर क्या था ? वह छात्र तो आग-बबूला हो उठा। अपनी थाली वहीं छोड़ते हुए रसोइए से बोला, ‘सांतु, मुझ से छू गया है, मेरी थाली का खर्च इसके नाम लिखना। दुष्ट कहीं का।’ संतराम ने...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
निरुत्तर Niruttar सन् 1958 में ज्योतिषियों के अनुसार बहुत बड़ा बवंडर, वज्रपात होने की आशंका थी। इसका सबसे अधिक प्रभाव मकर राशि पर बताया गया था। डॉ० सम्पूर्णानंद ज्योतिष व संस्कृत के प्रकांड पंडित थे। वह नेहरू जी के पास गए और उन्हें बताया, आपका नाम ‘ज’ शब्द से आरम्भ होता है, इसलिए आपको विशेष पूजा, अनुष्ठान करना चाहिए। जवाहर लाल जी इन बातों को नहीं मानते थे। उन्होंने डॉ० साहब...
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December 31, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment