Home »
Articles posted by evirtualguru_ajaygour (Page 999)
e-TYPEWRITING Introduction Computers have moved into every corner of our daily lives. Computers are at work in departmental stores, homes, offices, hospitals, banks, theaters and even coffee shops. They have become so fundamental to our modern society that without them, our economy would grind to halt. In the last few decades, computers have completely altered business practices all around the world. We are living in information age and with the concept...
Continue reading »
August 2, 2017 evirtualguru_ajaygourOffice Secretaryship, StenographyNo Comment
नारी और नौकरी Nari Aur Naukari जीवन का अर्धांग नारी आज पहले जैसी नहीं रह गई। आधुनिक भारत में ऐसा एक क्षेत्र नहीं रह गया है, जहां नारी का पदार्पण न हो चुका हो। आज नारी सामान्य से लेकर उच्चतम पदों पर सेवा-कार्य कर रही है। पुलिस और सेना में ाी नारी अपनी कार्य क्षमता और अदभुत योज्यता का परिचय दे रही है। आज कई नारियां एकदम स्वतंत्र रूप से उद्योग-धंधे,...
Continue reading »
July 29, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages2 Comments
जनसंख्या, समस्या और शिक्षा Jansankhya, Samasya aur Shiksha भारत एक विशाल देश है। आजादी के बाद से ही हमारा विकास प्रारंभ हुआ। विज्ञान और प्रोद्योगिकी कृषि और चिकित्सा तकनीकी तथा संचार के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, किंतु यह सब प्रगति जनसंख्या वृद्धि की लगातार बढ़ती गति के सामने समन्वित विकास के रूप में नहीं दिखाई देती। 11 मई सन 2000 को जनसंख्या घड़ी के अनुसार हमारी जनसंख्या...
Continue reading »
July 29, 2017 evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
फैशन-श्रंगार : आवश्यकता और उपयोग Fashion Shringar : Aavashyakta aur Upyog श्रंगार शब्द का सामान्य प्रचलित अर्थ है सजावट-अर्थात शरहर को सजा-संवारकर प्रस्तुत करना। यह सजावट विशेष प्रकार के पाउडर-क्रीम, कंघी-पट्टी, पकड़ों-परिधानों, गहनों आदि के द्वारा संभव हुआ करती है। एक शब्द है फैशन। इस शब्द का सामान्य प्रचलित अर्थ हुआ करता है-चलन या प्रचलित होना। इसइ प्रकार जब हम श्रंगार शब्द के साथ फैशन का मेल कर देते हैं, तब...
Continue reading »
July 29, 2017 evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
शहरीकरण के कुप्रभाव Shaharikaran ke Kuprabhav यह एक स्वाभाविक एंव प्राकृतिक नियम है कि क्रमश: गांव-कस्बों में और कस्बे ही विकास करके शहरों के रूप धारण कर लिया करते हैं। शहर या नगर विकास की प्रक्रिया में पडक़र महानगरों का रूप धारण कर लिया करते हैं। सृष्टि का अब तक का विकास-क्रम इसी नियम का साकार स्वरूप है। हम भारत की राजधानी दिल्ली का उदाहरण भी ले सकते हैं। सन 1947...
Continue reading »
July 29, 2017 evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
बाढ़ का एक दृश्य Badh ka ek Drishya प्रकृति और मानव के बीच संघर्ष अंनतकाल से जारी है। मानव-जीवन के विरुद्ध प्रकृति के जो अनेक प्रकार के प्रकोप सामने आते रहते और माने जाते हैं, बाढ़ का प्रकोप उनमें से अत्यंत भयावह माना गया है। वह जल, जो जीवन का पर्यायवाचक माना जाता है, पानी जो व्यक्ति की अस्मिता और इज्जत का, मान-स मान का प्रतीक स्वीकारा गया है वही जल...
Continue reading »
July 29, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
यातायात की समस्या Yatayat ki Samasya बीसवीं शताब्दी के अंतिम चरणों में और इक्कीसवीं सदी के द्वार के समीप पहुंचते-पहुंचते जब कस्बे और सामान्य नगर बड़े-बड़े नगरों का दृश्य उपस्थित करने लगे हों, तब जिन्हें पहले ही महानगर कहा जाता है, उनकी दशा का अनुमान सहज और स्वत: ही होने लगता है। जहां जाइए, मनुष्यों की भीड़ का ठाठें मारता अथाह सागर, जिसका कोई ओर-छोर नहीं-कुछ ऐसी ही स्थिति हो गई...
Continue reading »
July 28, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
ऊर्जा के स्त्रोत और समस्या Urja Ke Strot aur Samasya ऊर्जा-एक प्रकार की ज्वलनशील शक्ति, जिसका संकट निकट भविष्य में आज का मानव स्पष्ट देख एंव अनुभव कर रहा है। ऊर्जा का वास्तविक अर्थ आग या ज्वलनशील पदार्थ तो है ही, वह संचालिका शक्ति भी है कि जिसके बल से आज हमारे कल-कारखाने चल रहे हैं, रेलें तथा अन्य वाहन दौड़ रहे हैं, वायुयान उड़ रहे हैं, घरों आदि में उजाला...
Continue reading »
July 28, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment