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Articles posted by evirtualguru_ajaygour (Page 995)
हमारा संविधान Hamara Samvidhan नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य हमारे संविधान में निहित हैं। अब प्रश्न है, संविधान क्या है? प्रत्येक देश का एक संविधान होता है। यह संविधान उस देश का कानून होता है।इसलिए उसे उस देश का आधारभूत कानून कहा जाता है। यहां यह जान लेना जरूश्री है कि सरकार के तीन अंग होते हैं। पहला अंग ‘व्यवस्थापिका’ है। इसका काम कानून बनाना है। दूसरा अंग ‘कार्यपालिका’ है। यह...
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August 14, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
जीवन में परोपकार का महत्व Jeevan me Paropkar ka mahatva परोपकार दो शब्दों के मेल से बना है-पर+उपकार, अर्थात दूसरों की भलाई करना। परोपकार ऐसी विभूति है, जो मानव को मानव कहलाने का अधिकारी बनाती है। यह मानवता की कसौटी है। परोपकार ही मानवता है, जैसा कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा है- ‘वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे।’ केवल अपने दुख-सुख की चिंता करना मानवता नहीं, पशुता...
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August 14, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
डाकिया अथवा पत्रवाहक Dakiya athva Patravahak ऐसा कोई व्यक्ति होगा, जो ‘पत्रवाहक’ को अपने घर की ओर आता हुआ देखकर प्रसन्न न होता हो। हमारे बहुत से सगे-संबंधी तथा घनिष्ठ मित्र हमसे बहुत दूर गांव में रहते हैं। उनसे संपर्क बनाए रखने के लिए हम पत्रों का सहारा लेते हैं। इसलिए हर जगह पत्रवाहक का स्वागत होता है। अपने द्वार पर डाकिया आवाज बसुनकर एक आशा मन में उठती है ‘शायद...
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August 14, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
विद्यालय का वार्षिकोत्सव Vidyalaya ka Varshik Utsav निबंध नंबर : 01 हमारे विद्यालय में प्रतिवर्ष वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। वैसे तो हमारी पाठशाला में अन्य कई उत्सव, जैसे-तुलसी जयंती, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, छात्रों की विदाई समारोह, होलिकोत्सव आदि बड़े आनंद तथा उल्लास से मनाए जाते हैं। किंतु इन समस्त उत्सवों में हम छात्र-छात्राओं के लिए वार्षिकोत्सव ही सबसे अधिक आनंददायी होता है। विद्यालय में आयोजित वार्षिकोत्सव में छात्राओं...
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August 12, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
आज के युग में विज्ञान Aaj ke yug me Vigyan आधुनिक युग को हम यदि ‘विज्ञान युग’ की संज्ञा से विभूषित करें तो अनुचित ही होगा। आज विज्ञान का क्षेत्र जितना सर्वव्यापी हो गया है और विज्ञान ने जितनी उन्नति कर ली है, उसको देखकर आश्चर्यचकित रह जाना पड़ता है। जिन वस्तुओं की हम स्वप्न में भी कल्पना नहीं कर सकते थे तथा जिन कार्यों का होना प्राय: असंभव-सा लगता था,...
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August 12, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
भारत में किसानों की स्थिति Bharat me Kisano ki Sthiti भारत कृषि-प्रधान देश है। यहां की अधिकांश जनता गांवों में रहती है। यह जनता कृषि-कार्य करके अपना ही नहीं, अपने देश का भी भरण-पोषण करती है। भारत में लगातार सात लाख गांव हैं और इन गांवों में अधिकांश किसान ही बसते हैं। यही भारत का अन्नदाता है। यदि भारत को उन्नतिशील और सबल राष्ट्र बनाना है तो पहले किसानों को समृद्ध...
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August 12, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages4 Comments
हमारा राष्ट्रध्वज Hamara Rashtriya Dhwaj निबंध नंबर:- 01 प्रत्येक राष्ट्र की नीति राष्ट्रों से पृथक और विशिष्ट होती है। उसमें कई बातें ऐसी भी होती हैं, जो केवल उसी राष्ट्र की नीति में पाई जाती हैं। प्रत्येक राष्ट्र का प्रतीक राष्ट्रध्वज अन्य सब राष्ट्रों से पृथक और विशिष्ट होता है। किसी भी देश का राष्ट्रध्वज अपने पूरे देश का प्रतीक होता है। किसी राष्ट्रध्वज में राष्ट्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक...
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August 12, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
विद्या-धन सबसे बड़ा धन है Vidya dhan sabse bada dhan he ‘विद्या के सम धन नहीं, जग में कहत सुजान। विद्या से अनुज लघु, होते भूप समान।।’ मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। खान-पान और रहन-सहन के अतिरिक्त उसकी कुछ अन्य आवश्यकतांए भी हैं। इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उसे साधन ढूंढने पड़ते हैं। साधनों का मूल है-धन, ज्ञान, चातुर्य और इनका आधार ‘विद्या’ है। इसलिए यह विद्या एक अनोखा धन...
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August 12, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages3 Comments