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Articles posted by evirtualguru_ajaygour (Page 989)
ताजमहल का सौंदर्य Tajmahal ka Sondarya ताजमहल अपनी अदभूत और अद्वितीय वास्तुकला के लिए जगत-प्रसित्र है। ताजमहल के निर्माण को लगभग तीन शताब्दियां बीत गई हैं, किंतु आज भी इसकी भव्यता नई सी प्रतीत होती है। प्रकृति के भीषण घात-प्रतिघात तथा मानव के निर्मम क्रिया-कलाप इसके ऊपर अपना कुछ भी प्रभाव नहीं छोड़ सके। यह आज भी शांत, मौन साधक की भांति अविचल खड़ा है। ताजमहल के अपूर्व सौंदर्य को देखने...
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August 14, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
हमारे मौलिक अधिकार और कर्तव्य Hamare Maulik Adhikar aur Kartavya व्यकित अपना विकास समाज में रहकर ही कर सकता है। समाज से बाहर हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। अब प्रश्न है कि व्यक्ति के विकास के लिए सुविधांए कौन देता है? उत्तर है-व्यक्ति को ये सुविधांए समाज देता है। समाज किसी सुविधा अथवा शक्ति को स्वीकार करता है। वैसा न करने पर उसे अधिकारों की श्रेणी में नहीं रखा...
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August 14, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
हमारा संविधान Hamara Samvidhan नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य हमारे संविधान में निहित हैं। अब प्रश्न है, संविधान क्या है? प्रत्येक देश का एक संविधान होता है। यह संविधान उस देश का कानून होता है।इसलिए उसे उस देश का आधारभूत कानून कहा जाता है। यहां यह जान लेना जरूश्री है कि सरकार के तीन अंग होते हैं। पहला अंग ‘व्यवस्थापिका’ है। इसका काम कानून बनाना है। दूसरा अंग ‘कार्यपालिका’ है। यह...
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August 14, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
जीवन में परोपकार का महत्व Jeevan me Paropkar ka mahatva परोपकार दो शब्दों के मेल से बना है-पर+उपकार, अर्थात दूसरों की भलाई करना। परोपकार ऐसी विभूति है, जो मानव को मानव कहलाने का अधिकारी बनाती है। यह मानवता की कसौटी है। परोपकार ही मानवता है, जैसा कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा है- ‘वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे।’ केवल अपने दुख-सुख की चिंता करना मानवता नहीं, पशुता...
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August 14, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
डाकिया अथवा पत्रवाहक Dakiya athva Patravahak ऐसा कोई व्यक्ति होगा, जो ‘पत्रवाहक’ को अपने घर की ओर आता हुआ देखकर प्रसन्न न होता हो। हमारे बहुत से सगे-संबंधी तथा घनिष्ठ मित्र हमसे बहुत दूर गांव में रहते हैं। उनसे संपर्क बनाए रखने के लिए हम पत्रों का सहारा लेते हैं। इसलिए हर जगह पत्रवाहक का स्वागत होता है। अपने द्वार पर डाकिया आवाज बसुनकर एक आशा मन में उठती है ‘शायद...
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August 14, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
विद्यालय का वार्षिकोत्सव Vidyalaya ka Varshik Utsav निबंध नंबर : 01 हमारे विद्यालय में प्रतिवर्ष वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। वैसे तो हमारी पाठशाला में अन्य कई उत्सव, जैसे-तुलसी जयंती, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, छात्रों की विदाई समारोह, होलिकोत्सव आदि बड़े आनंद तथा उल्लास से मनाए जाते हैं। किंतु इन समस्त उत्सवों में हम छात्र-छात्राओं के लिए वार्षिकोत्सव ही सबसे अधिक आनंददायी होता है। विद्यालय में आयोजित वार्षिकोत्सव में छात्राओं...
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August 12, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
आज के युग में विज्ञान Aaj ke yug me Vigyan आधुनिक युग को हम यदि ‘विज्ञान युग’ की संज्ञा से विभूषित करें तो अनुचित ही होगा। आज विज्ञान का क्षेत्र जितना सर्वव्यापी हो गया है और विज्ञान ने जितनी उन्नति कर ली है, उसको देखकर आश्चर्यचकित रह जाना पड़ता है। जिन वस्तुओं की हम स्वप्न में भी कल्पना नहीं कर सकते थे तथा जिन कार्यों का होना प्राय: असंभव-सा लगता था,...
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August 12, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
भारत में किसानों की स्थिति Bharat me Kisano ki Sthiti भारत कृषि-प्रधान देश है। यहां की अधिकांश जनता गांवों में रहती है। यह जनता कृषि-कार्य करके अपना ही नहीं, अपने देश का भी भरण-पोषण करती है। भारत में लगातार सात लाख गांव हैं और इन गांवों में अधिकांश किसान ही बसते हैं। यही भारत का अन्नदाता है। यदि भारत को उन्नतिशील और सबल राष्ट्र बनाना है तो पहले किसानों को समृद्ध...
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August 12, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages4 Comments