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Articles posted by evirtualguru_ajaygour (Page 1192)
आत्मनिर्भरता Atamnirbharta Best 4 Hindi Essay on ” Atmanirbharta” निबंध नंबर :01 स्वावलम्बन अथवा आत्मनिर्भरता दोनों का वास्तविक अर्थ एक ही है – अपने सहारे रहना अर्थात अपने आप पर निर्भर रहना | ये दोनों शब्द स्वय परिश्रम करके, सब प्रकार के दुःख –कष्ट श कर भी अपने पैरो पर खड़े रहने की शिक्षा और प्रेरणा देने वाले शब्द है | यह हमारी विजय का प्रथम सोपान है | इस पर...
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February 8, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
जीवन में खेलो का महत्त्व किसी ने सत्य ही कहा है – “Health is Wealth” अर्थात अच्छा स्वास्थ्य ही सच्ची सम्पत्ति है | जीवन में अच्छे स्वास्थ्य का विशेष महत्त्व है | स्वस्थ व्यक्ति ही भूमण्डल पर सभी प्रकार के सुख भोग सकता है | बिना अच्छे स्वास्थ्य के जीवन नरक के सदृश्य है | स्वस्थ व्यक्ति में स्वय ही अदम्य साहस और धैर्य आ जाता है | शरीर को स्वस्थ...
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February 8, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
परोपकार परोपकार शब्द का अर्थ है दुसरो का भला करना | अपनी चिन्ता किए बिना, शेष सभी (सामान्य-विशेष) के भले की बात सोचना, आवश्यकतानुसार तथा यथाशक्ति उनकी भलाई के उप्पे करना ही परोपकार कहलाता है | परोपकार के लिए मनुष्य को कुछ-न-कुछ त्याग करना पड़ता है | परोपकार की यह शिक्षा हमे प्रकृति से मिली है | प्रकृति के प्रत्येक कार्य में हमे सदैव परोपकार की भावना निहित दिखाई पडती है...
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February 8, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
एकता में शक्ति संगठन में शक्ति मिलजुल कर कार्य करने की शक्ति को ही संगठन या एकता कहते है | संगठन सब प्रकार की शक्तियों का मूल है | कोई भी व्यक्ति चाहे वह कितना भी समृद्ध हो , शक्तिशाली हो अथवा बुद्धिमान हो , अकेले अपनी आवश्यकताओ की पूर्ति नही कर सकता है | वह केवल दुसरो के सहयोग से ही अपनी आवश्यकताओ को पूरा कर सकता है | कोई भी...
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February 8, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages9 Comments
ब्रह्मचर्य ब्रह्मचर्य, एक विशेष प्रकार के रहन-सहन, संयम-अनुशासनपूर्ण जीवन जीने की एक प्रकिया का नाम है | इस दृष्टि से तो कोई भी व्यक्ति आजीवन ब्रह्मचर्य –व्रत का पालन करते हुए, ब्रह्मचारी बन कर रह सकता है | पहले के समय में तो लोग प्राय ; ऐसा जीवन बिताया करते थे | आज भी साधु-महात्माओं के रूप में अनेक लोग ऐसा ब्रह्मचर्य जीवन जीने वाले है | भारतीय परम्परा में मनुष्य...
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February 8, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
नारी शिक्षा नारी शिक्षा का महत्त्व जहाँ तक शिक्षा का प्रश्न है यह तो नारी हो या पुरुष दोनों के लिए समान रूप से महत्त्वपूर्ण है | शिक्षा का कार्य तो व्यक्ति के विवेक को जगाकर उसे सही दिशा प्रदान करना है | शिक्षा सभी का समान रूप से हित –साधन किया करती है | परन्तु फिर भी भारत जैसे विकासशील देश में नारी की शिक्षा का महत्त्व इसलिए अधिक है...
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February 8, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
समय का महत्त्व (सदुपयोग) संसार में समय को सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण एव मूल्यवान धन माना गया है | अंत हमे इस मूल्यवान धन अर्थात समय को व्यर्थ ही नष्ट नही करना चाहिए | क्योकि बिता हुआ समय वापस नही लौट पाता | इसके विषय में एक कहावत प्रसिद्ध है – “गया वक्त फिर हाथ आता नही | समय किसी की प्रतीक्षा नही करता”| समय का महत्त्व इस बात से भी स्पष्ट...
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February 8, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages3 Comments
सत्संगति Satsangati या सत्संग के लाभ Satsang ke Labh निबंध नंबर :01 सत्संगति से तात्पर्य है सज्जनों की संगति में रहना , उनके गुणों को अपनाना तथा उनके अच्छे विचारों को अपने जीवन में उतारना | सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य को किसी-न- किसी का संग अवश्य चाहिए | यह संगति जो वह पाता है अच्छी भी हो सकती है और बुरी भी | यदि उसकी संगति अच्छी है तो...
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February 8, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment