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Articles posted by evirtualguru_ajaygour (Page 1053)
परमाणु अप्रसार संधि और भारत Parmanu Aprasar Sandhi aur Bharat ज्ञान-विज्ञान प्रगति और अनवरत विकास की राह पर चलते हुए आज परमाणु-युग में पहुंच चुका है। परमाणु प्रकृति का अत्यंत सूक्ष्म तत्व तो है ही, बड़ा शक्तिशाली तत्व भी है। परमाणुओं के संगठन से ही संसार की सभी वस्तुओं की रचना और निर्माण हुआ है, ऐसा वैज्ञानिकों और शास्त्रों का स्पष्ट मानना है। परमाणुओं में विद्यमान शक्ति का विकास और...
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July 17, 2017 evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
बिजली : आधुनिक जीवन की रीढ़ Bijli : Adhunik Jeevan ki Ridh आज बिजली के अभाव में एक पल भी बिता पाना कष्टकर हो जाया करता है। बिजली! हाय बिजली! एक क्षण के लिए भी यदि कहीं बिजली गुल हो जाती है, तो चारों तरफ हाय-तोबा मच जाती है। लगता है, जैसे तेज गति से भाग रही गाड़ी को अचानक ब्रेक लग जाने से वह एक झटके के साथ रुक गई...
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July 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
निरस्त्रीकरण Nirastrikaran शस्त्रास्त्रों की दौड़ और उसके फलस्वरूप होने वाले युद्धों से मुक्त समाज का निर्माण ही निरस्त्रीकरण का मूल लक्ष्य है। निरस्त्रीकरण का सामान्य और व्यावहारिक अर्थ है, आज जो भयानकटतम मारक शस्त्रास्त्र बन रहे हैं, उनका निर्माण रोकना और विनाशक युद्धों का भय टालना। इसके सथ यह बात भी जुड़ी हुई है कि आज तक जिते भी आणविक शस्त्रास्त्र बन चुके हैं, सभी निर्माता राष्ट्र एक साथ मिलकर उन्हें...
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July 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
युद्ध के लाभ और हानियां Yudh ke Labh aur Haniya युद्ध और लाभ! नहीं, युद्ध का तो नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। युद्ध मूल रूप से कोई अच्दी बात नहीं है। यों स्वभाव से भी मनुष्य शांतिप्रिय प्राणी है और युद्धों से बचा ही रहना चाहता है, फिर भी कई बार उसे युद्ध करने की विवशता ढोनी ही पड़ती है। हानि उठाकर भी तब उसका प्रयोजन राष्ट्रीय...
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July 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
विज्ञान और युद्ध Vigyan Aur Yudh विज्ञान और युद्ध यानी दो विपरीत धु्रव, फिर भी आज एक-दूसरे का पर्याय बनते जा रहे हैं। युद्ध! अपने-आप में ही एक बहुत बड़ी विभीषिका, मृत्यु एंव सर्वनाश को दिया जाने वाला निमंत्रण हुआ करता है यह युद्ध। फिर भी सदियों से, शायद उसी दिन से कि जब तनधारी जीवों ने धरती पर पदार्पण किया होगा, ये युद्ध लड़े जा रहे हैं। युद्ध लड़े...
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July 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भारत की वैज्ञानिक प्रगति Bharat Ki Vegyanik Pragati ज्ञान-विज्ञान की अनवरत प्रगतियों वाले आज के विश्व में किसी भी देश की प्रगति का मानदंड उन्नत वैज्ञानिक संसाधन ही माने जाते हैं। 15 अगस्त 1947 में जब भारत विभाजन होकर स्वतंत्र हुआ था, तब देश की आवश्यकतांए पूर्ण करने के लिए सामान्य सुई औश्र ऑलपिन तक का आयोजन किया जाता था। इसके विपरीत आज भारत प्राय: उस सब-कुछ का निर्यात करने लगा...
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July 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
विज्ञान और मानवता का भविष्य Vigyan aur Manavta ka Bhavishya संसार में कोई वस्तु नई हो या पुरानी, हर प्रकार से मानव-सापेक्ष हुआ करती है। विज्ञान भी इसका अपवाद नहीं कहा जा सकता। किसी पुस्तक में पढ़ा था, गाय के स्तनों पर यदि जोंग को चिपका दिया जाए, तो दूध पीने के स्थान पर वह उसका खून चूसने लगेगी। जल्द ही वह गाय निचुडक़र समाप्त हो जाएगी। ठीक वही स्थिति...
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July 17, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
Amartya Sen Amartya Sen is one of the leading economists of the world. For many years his policies dominated in US economy. He gave many theories about poverty-alleviation programmes, for the developing countries like Sri Lanka, Banladesh, India, etc. He authored many famous books. He is the winner of the much-coveted Nobel Prize for economics was born on November 3, 1993, in the vast Shantiniketan, on the campus of Rabindranath Tagore’s...
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July 13, 2017 evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), Languages3 Comments