Home » Articles posted by evirtualguru_ajaygour (Page 1046)

English Short Story and English Moral Story ”One Nut and Two Boys” Complete Story for Class 9, Class 10, Class 12 and other classes.

One Nut and Two Boys     Two little boys were playing together. One little boy saw a nut on the ground. Before he could pick it the other boy took it. The first boy demanded, “Give me the nut. It’s mine. I only saw it first”. The other boy replied, “It’s mine. I only took it”. This lead to a quarrel between these two little boys. Just then a tall...
Continue reading »

Hindi Essay on “Karm Pradhan Vishv Rachi Rakha” , ”कर्म-प्रधान विश्व रचि राखा” Complete Hindi Essay for Class 9, Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essays
कर्म-प्रधान विश्व रचि राखा Karm Pradhan Vishv Rachi Rakha ‘कर्म-प्रधान विश्व रचि राखा’ यह उक्ति श्रीमदभगवद गीता के इस सिद्धांत या कर्मवाद सिद्धांत पर आधारित है कि ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन:’ अर्थात इस संसार में बिना फल या परिणाम की चिंता किए निरंतर कर्म करते रहना ही मानव का अधिकार अथवा मानव के वश की बात है। दूसरे रूप में इस कथन की व्याख्या इस तरह भी की जा सकती है-फल...
Continue reading »

Hindi Essay on “Sada Jivan Uchch Vichar” , ”सादा जीवन उच्च विचार” Complete Hindi Essay for Class 9, Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essays
सादा जीवन उच्च विचार Sada Jivan Uchch Vichar निबन्ध नंबर :- 01 इस तरह की सहजता, स्वाभाविकता बहुत बड़ा गुण है। परंतु आज का युग प्रदर्शन और कृत्रिमता का युग बनकर रह गया है। आज तडक़-भडक़ को ही विशेष एंव अधिक महत्व दिया जाने लगा है। तन पर पहनने वाले कपड़े हों या घरों-दफ्तरों के उपकरण और उपयोगी सामान सभी जगह प्रदर्शनप्रियता के कारण कोरी चमक-दमक का बोलबाला है। सादगी और...
Continue reading »

Hindi Essay on “Bhavna se Kartavya uncha hai ” , ”भावना से कर्तव्य ऊंचा है” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essays
भावना से कर्तव्य ऊंचा है Bhavna se Kartavya uncha hai  संसार में असंख्य प्राणी हैं। उनमें सर्वाधिक और विशिष्ट महत्व केवल मनुष्य नामक प्राणी को ही प्राप्त है। इसके मुख्य दो कारण स्वीकार किए जाते या किए जा सकते हैं। एक तो यह कि केवल मनुष्य के पास ही सोचने-समझने के लिए दिमाग और उसकी शक्ति विद्यमान है, अन्य प्राणियों के पास नहीं। वे सभी कार्य प्राकृतिक चेतनाओं और कारणों से...
Continue reading »

Hindi Essay on “Mazhab nahi sikhata aapas mein bair rakhna” , ”मजहब नहीं सिखाता अपास में बैर रखना” Complete Hindi Essay for Class 9, Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi-Essay-Hindi-Nibandh-Hindi
मजहब नहीं सिखाता अपास में बैर रखना Mazhab nahi sikhata aapas mein bair rakhna निबंध नंबर :- 01  अच्छाई हमेशा अच्छाई रहती है। उसका मूल स्वरूप-स्वभाव कभी विकृत नहीं हुआ करता। उस पर किसी एक व्यक्ति या धर्म-जाति का अधिकार भी नहीं हुआ करता। अपने मूल स्वरूप में मजहब भी एक अच्छाई का ही नाम है। मजहब, धर्म, फिरका, संप्रदाय और पंथ आदि सभी भाववाचक संज्ञांए एक ही पवित्र भाव और...
Continue reading »

Hindi Essay on “Ant Bhala, to Sab Bhala” , ”अंत भला तो सब भला” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essays
अंत भला तो सब भला Ant Bhala, to Sab Bhala अक्सर कहा-सुना जाता है कि कर भला, हो भला, अंत भला तो सब भला। परंतु जीवन और संसार में क्या भला और बुरा है, क्या पुण्य है और क्या पाप है, इस संबंध में कोई भी व्यक्ति अंतिम या निर्णायक रूप से कुछ नहीं कह सकता। मेरे लिए जो वस्तु भक्ष्य है, स्वास्थ्यप्रद और हितकर है, वही दूसरे के लिए अभक्ष्य,...
Continue reading »

Hindi Essay on “Vahi Manushya hai ki jo… ” , ”वही मनुष्य है कि जो..” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essays
वही मनुष्य है कि जो.. राष्ट्र और मानवतावादी कवि स्वर्गीय राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की एक प्रसिद्ध कविता की पंक्ति है यह सूक्ति, जो इस प्रकार है : ‘वही मनुष्य है कि जो मनुश्य के लिए मरे।’ अर्थात मनुष्यता की भलाई के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर देने वाले को ही सच्चा मनुष्य कहा जा सकता है। कितनी महत्वपूर्ण बात कही है महाकवि ने अपनी इस सूक्ति में! अपने लिए तो...
Continue reading »