Deepawali “दीपावली” Hindi Essay, Paragraph, Speech for Class 10, 12 Examination.
दीपावली
Deepawali
भूमिका, मनाने का कारण, राम का अयोध्या आना, महापुरुषों का निर्वाण दिवस, लक्ष्मी पूजन, उपसंहार
भारतीय त्योहारों में दीपावली का विशेष स्थान है। दीपावली शब्द का अर्थ है-दीपों की पंक्ति या माला। इस पर्व के दिन लोग रात को अपनी प्रसन्नता प्रकट करने के लिए दीपों की पंक्तियों जलाते हैं और प्रकाश करते हैं। नगर और गाँव दीप-पंक्तियों से जगमगाने लगते हैं। रात दिन के रूप में बदल जाती है। इसी कारण इसका नाम दीपावली पड़ा।
भगवान् राम लंकापति रावण को मार कर तथा वनवास के चौदह वर्ष समाप्त कर अयोध्या लौटे तो अयोध्यावासियों ने उनके आगमन पर हर्षोल्लास प्रकट किया और उनके स्वागत में रात को दीपक जलाए। उस दिन की पावन स्मृति में यह दिन बड़े समारोह से मनाया जाता है। इसी दिन भगवान् राम की स्मृति ताती हो जाती है।
दीपावली भारत का सबसे अधिक प्रसन्नता और मनोरंजन का द्योतक त्योहार है। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक में खुशी की लहर दौड़ उठती है। आतिशबाजी और पटाखों की ध्वनि से सारा आकाश गूंज उठता है। इसके साथ ही खूब मिठाई उड़ती है। सभी राग-रंग में मस्त हो जाते हैं।
इसी दिन जैनियों के तीर्थंकर महावीर स्वामी ने निर्वाण प्राप्त किया था। इस कारण यह दिन जैन भाइयों के लिए बड़ा महत्त्वपूर्ण है। स्वामी दयानंद तथा स्वामी रामतीर्थ भी इसी दिन निर्वाण को प्राप्त हुए थे। ऋषि निर्वाणोत्सव का दिन आर्य समाजी भाइयों के लिए विशेष महत्त्व रखता है। सिक्ख भाई भी दीवाली को बड़े समारोह से मनाते है। इस प्रकार यह दिन धार्मिक दृष्टि से बड़ा पवित्र है।
दीवाली से कई दिन पूर्व तैयारी आरंभ हो जाती है। लोग शरद ऋतु के आरंभ में ही घरों की लिपाई-पुताई करवाले हैं तथा कमरों को चित्रों से अलंकृत करते हैं। इससे मक्खी-मच्छर दूर हो जाते हैं। कमरे सोने के योग्य बन जाते हैं। इससे कुछ दिन पूर्व अहोई माता का पूजन किया जाता है। धन त्रयोदशी के दिन पुराने बर्तनों को लोग बेचते हैं और नए बर्तन खरीदते हैं। बर्तनों की दुकानें, बर्तनों से अनोखी ही शोभा देती हैं। चतुर्दशी को लोग घरों का कूड़ा-कर्कट बाहर निकालते हैं। कार्तिक मास की अमावस्या को दीपमाला का दिन बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
इस दिन लोग अपने इष्ट-बंधुओं तथा मित्रों को बधाई देते हैं और नूतन वर्ष में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। बालक-बालिकाएँ नव-वस्त्र धारण कर मिठाई बाँटते हैं। रात को आतिशबाजी चलाते हैं। बहुत-से लोग रात को लक्ष्मी की पूजा करते हैं। कहीं दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। तामसिक वृत्ति के लोग जुआ खेलकर बुद्धि नष्ट करते हैं।
दीवाली हमारा धार्मिक त्योहार है। इसे यथोचित रीति से मनाना चाहिए। इस दिन विद्वान् लोग व्याख्यान देकर जन-साधारण को शुभ मार्ग पर चला सकते हैं। जुआ और शराब का सेवन बहुत बुरा है। इनसे बचना चाहिए। आतिशबाजी पर अधिक व्यय नहीं करना चाहिए।






















