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Doordarshan Ki Upyogita “दूरदर्शन की उपयोगिता” Hindi Essay, Paragraph, Speech for Class 10, 12 Examination.

दूरदर्शन की उपयोगिता

Doordarshan Ki Upyogita

भूमिका, सिद्धांत, प्रचलन, उपयोग, हानियां, उपसंहार

दूरदर्शन आज का महत्त्वपूर्ण आविष्कार है । यह मनोरंजन का साधन है। इससे शिक्षा भी प्राप्त होती है । मनुष्य के मन में दूर की चीज़ों को देखने की बहुत प्रबल इच्छा रहती है। चित्रकला, फोटोग्राफी और छपाई के विकास से दूर की वस्तुओं, स्थानों और व्यक्तियों के चित्र सुलभ होने लगे हैं। दूरदर्शन (टेलीविज़न) दूर की घटनाओं को हमारी आँखों के सामने पेश कर देता है ।

टेलीविज़न का सिद्धांत रेडियो के सिद्धांत से बहुत अंशों में मिलता है। रेडियो प्रसारण में बोलने वाला या गायक स्टूडियो में अपनी वार्ता या गायन पेश करता है। इसकी आवाज़ से हवा में तरंगें उत्पन्न होती हैं, जिन्हें उसके सामने रखा हुआ माइक्रोफोन बिजली की तरंगों में बदल देता है। इन बिजली की तरंगों को भूमिगत तारों के द्वारा शक्तिशाली ट्रांसमीटर तक पहुँचाया जाता है, जो उन्हें रेडियो तरंग में बदल देता है। इन तरंगों को टेलीविज़न एरियल पकड़ लेता है।

दूरदर्शन के पर्दे पर हम वे ही दृश्य देख सकते हैं जिन्हें किसी स्थान पर टेलीविजन कैमरे द्वारा चित्रित किया जा रहा हो और उनके चित्रों को रेडियो तरंगों के द्वारा दूर के स्थानों पर भेजा जा रहा हो। इसके लिए दूरदर्शन के विशेष स्टूडियो बनाए जाते हैं जहाँ गाने वाला गायक, नर्तक आदि अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं।

दूरदर्शन का पहला प्रयोग सन् 1925 में ब्रिटेन के जॉन एल० बेयर्ड ने किया था। इतने थोड़े समय में ही संसार के देशों में दूरदर्शन का प्रचार इतना अधिक बढ़ गया कि प्रत्येक खुशहाल घर में टेलीविज़न सैट रहना आम बात हो गई है। भारत में दूरदर्शन का प्रसारण दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, श्रीनगर, चेन्नई, जालंधर तथा अन्य बहुत- केंद्रों से किया जा रहा है। अब केबल द्वारा विभिन्न चैनलों के कार्यक्रम घर बैठे देख सकते हैं।

दूरदर्शन के अनेक उपयोग हैं-लगभग उतने ही जितने हमारी आँखों के। नाटक, संगीत सभा, खेल-कूद आदि के दृश्य दूरदर्शन के पर्दे पर देखकर हम अपना मनोरंजन कर सकते हैं। राजनीतिक नेता दूरदर्शन के द्वारा अपना संदेश अधिक प्रभावशाली ढंग से जनता तक पहुँचा सकते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी दूरदर्शन का प्रयोग सफलता के साथ किया जा रहा है। आज हज़ारों-लाखों विद्यार्थी अपनी-अपनी कक्षा में बैठे किसी अच्छे अध्यापक को पढ़ाते हुए देख और सुन सकते हैं। समुद्र के अंदर खोज करने के लिए टेलीविज़न का प्रयोग होता है। यदि किसी डूबे हुए जहाज़ की स्थिति का सही-सही पता लगाना हो तो जंज़ीर के सहारे टेलीविज़न कैमरे को समुद्र के जल के अंदर उतारते हैं। उसके द्वारा भेजे गए चित्रों में समुद्र तल की जानकारी ऊपर के लोगों को मिल जाती है। अंतरिक्ष की जानकारी भी टेलीविज़न द्वारा प्राप्त की जा सकती है।

दुरदर्शन विज्ञान की महान् देन है, परंतु किसी भी पदार्थ का दुरुपयोग संभव है। यदि लोग अपने कर्त्तव्य को भूलकर टी० वी० कार्यक्रमों में खोए रहेंगे तो घर के सारे काम रुक जाएँगे। न गृहिणी समय पर भोजन बनाएगी और न ही बच्चे पढ़ने की पुस्तकों को हाथ लगाएँगे। घटिया कार्यक्रम बच्चों की मानसिकता खराब कर सकते हैं। बच्चे कामचोर और सुस्त बन सकते हैं। घर में तनाव का वातावरण बन सकता है। दूरदर्शन का सबसे बुरा प्रभाव आँखों पर पड़ता है। शहर के छोटे-छोटे घरों में टी० वी० निकट से ही देखना पड़ता है जिससे आँखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बिजली का खर्चा तो बढ़ेगा ही।

दूरदर्शन के लाभों को देखते हुए कहा जा सकता है कि दूरदर्शन विज्ञान का अमूल्य उपहार है और आज के युग का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण दिल- बहलाव का साधन है। इसका उपयोग देश की प्रगति के लिए किया जाना चाहिए ।

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