Home » Posts tagged "Hindi Nibandh" (Page 6)

Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Hamre Tyohar” “हमारे त्योहार” for Class 10, 12 Students.

Hindi-Essay-Hindi-Nibandh-Hindi
हमारे त्योहार (Hamre Tyohar) भारत त्योहारों का देश है। यहाँ भिन्न-भिन्न धर्म एवं जाति संप्रदाय के लोग निवास करते हैं। भारत के त्योहार इसकी संस्कृति की महानता को उजागर करते हैं। ये जीवन में सुखद परिवर्तन लाकर नई चेतना व स्फूर्ति का संचार करते हैं। हमारे त्योहार करूणा, दया, आतिथ्य सत्कार, पारस्परिक प्रेम एवं सद्भावना तथा परोपकार जैसे नैतिक गुणों का विकास करने में सहायक होते हैं। ये अधिकतर ऋतु चक्र...
Continue reading »

Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Hamara Rashtradwaj Tiranga” “हमारा राष्ट्रध्वज – तिरंगा” for Class 10, 12 Students.

Hindi-Essay-Hindi-Nibandh-Hindi
हमारा राष्ट्रध्वज – तिरंगा (Hamara Rashtradwaj Tiranga) हर देश का अपना-अपना राष्ट्रीय ध्वज होता है। हमारे भारतवर्ष का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है। इसमें शामिल केसरिया रंग वीरता एवं त्याग का प्रतीक है। सफेद रंग सुख-शांति तथा हरा रंग खुशहाली एवं हरी-भरी फसलों का प्रतीक है। तिरंगे के बीचों-बीच अशोक चक्र है जो हमें सतत् परिश्रम की प्रेरणा देता है। चक्र अशोक स्तंभ से लिया गया है और इसका रंग नीला है।...
Continue reading »

Pradushan – Ek Stat Chunauti “प्रदूषण- एक सतत चुनौती” Hindi Essay, Nibandh, Paragraph for Class 7, 8, 9 and 10 Class Students.

Hindi-Essay-Hindi-Nibandh-Hindi
प्रदूषण– एक सतत चुनौती Pradushan – Ek Stat Chunauti  (i) प्रदूषण की बढ़ती समस्या, (ii) कारण, (iii) निवारण समस्त जीवधारियों का जीवन पर्यावरण पर निर्भर है। जीव का जीवन, उसकी शक्ति एवं उसका विकास पर्यावरण की गोद में ही विकसित होता है। प्रकृति और पर्यावरण हमें विरासत में मिला है। मूल रूप में बढ़ती हुई जनसंख्या पर्यावरण प्रदूषण की मुख्य समस्या है। पर्यावरण प्रदूषण आज विभिन्न रूपों में सामने आ रहा...
Continue reading »

Ek Sainik Ki Aatmakatha “एक सैनिक की आत्मकथा” Hindi Essay, Nibandh, Paragraph for Class 7, 8, 9 and 10 Class Students.

Hindi-Essay-Hindi-Nibandh-Hindi
एक सैनिक की आत्मकथा Ek Sainik Ki Aatmakatha  (i) सैनिक की दिनचर्या, (ii) संघर्ष, (iii) चुनौतियाँ। मैं भारतीय सेना का एक सैनिक हूँ। मेरा नाम करतार सिंह है। मैं मथुरा जनपद के बलदेव कस्बे का रहने वाला हूँ तथा मधुबन (करनाल) के सैनिक स्कूल में पढ़ा हूँ। स्कूल के समय से ही मैंने सैनिक अनुशासन व कठोर दिनचर्या का पालन किया है। सुबह चार बजे जागकर परेड करना मेरे जीवन का...
Continue reading »

Mere School ka Chaprasi “मेरे स्कूल का चपरासी” Complete Hindi Essay, Nibandh for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi-Essay-Hindi-Nibandh-Hindi
मेरे स्कूल का चपरासी या स्कूल का चपरासी हमारे स्कूल में केवल एक ही चपरासी है। उसका नाम प्रेम कुमार है। वह पैन्तीस साल का जवान आदमी है। वह लम्बा और बलवान है। वह जागरुक है। वह हमेशा मुस्कराता रहता है। वह साफ वस्त्र पहनता है। विद्यालय में सब उसे जानते हैं। वह कर्त्तव्य परायण है। वह मुख्याध्यापक के कक्ष के बाहर स्टूल पर बैठता है। वह हर कार्य जो उसे...
Continue reading »

Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Adhikar hi Kartvya Hai”, “अधिकार ही कर्त्तव्य है” Complete Essay 1000 Words for Class 9, 10, 12 Students.

Hindi-Essay-Hindi-Nibandh-Hindi
अधिकार ही कर्त्तव्य है Adhikar hi Kartvya Hai “सड़कें गंदी हैं नालियाँ रुकी हुई हैं, गन्दा पानी गली-गली में फैल रहा है। बराबर चेतावनी दी जा रही है कि शहर में हैजा फैल रहा है, मलेरिया जोर पकड़ रहा है, शहर को साफ-सुथरा रखो। कटी, खुली चीजें मत खाओ। पर कौन सुनता है?” रामअवध बराबर मन ही मन बड़बड़ा रहा था। दूरभाष पर जगह-जगह, मोहल्ले-मोहल्ले से उसे यह शिकायत सुनाई जा...
Continue reading »

Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Holi Hai”, “होली है” Complete Essay 1200 Words for Class 9, 10, 12 Students.

Hindi-Essay-Hindi-Nibandh-Hindi
होली है Holi Hai   होली का पुनीत पर्व सर्वश्रेष्ठ ऋतु बसन्त में मनाया जाता है। इस पर्व का हिन्दी कवियों ने विस्तृत वर्णन किया है। कवियों की होली जन-साधारण जैसी हुल्लडबाजी की होली नहीं है। उन्होंने आत्माभिव्यक्ति एवं अपने युग के आहान को भी होली-कविता में व्यक्त किया है। अतएव हिन्दी कविता में होली का वर्णन विविध रूपों में हुआ है। जन-साधारण तो होली रंग, गलाल, केसर, कीचड़ आदि से...
Continue reading »

Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Samaj Aur Kuprathaye”, “समाज और कुप्रथाएँ” Complete Essay 1000 Words for Class 9, 10, 12 Students.

Hindi-Essay-Hindi-Nibandh-Hindi
समाज और कुप्रथाएँ Samaj Aur Kuprathaye   हम जहाँ रहते हैं, जिनके बीच में रहते हैं, वह समाज है। समाज मनुष्यों के मिल-जुलकर रहने का स्थान है। व्यक्ति अकेला नहीं रह सकता। आज व्यक्ति जो भी कुछ है, वह समाज के कारण हैं। तो व्यक्ति है, उसका विकास या पतन है। बिना समाज के व्यक्ति की कल्पना नहीं की की,जा सकती। सभ्यता, संस्कृति, भाषा आदि सब समाज की देन है। समाज...
Continue reading »