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Hindi Essay on “Mera Priya Kavi Kabirdas” , ”मेरा प्रिय कवि कबीरदास” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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मेरा प्रिय कवि कबीरदास Mera Priya Kavi Kabirdas निबंध नंबर:- 01                  हिन्दी साहित्य के अथाह समुद्र में अनेंक रत्न भरे पड़े है, पसन्द अपने-अपने मन की बात है। मैं जब कभी भक्तिकालीन संत कवि कबीरदास को पढ़ता हुँ तो मेरा मस्तक उनके सम्मुख श्रद्वा से नत हो जाता है तब मुझे वही संत सबसे अधिक प्रकाशवान् प्रतीत होता है। मेरे प्रिय कवि उस समय ज्ञान का दीपक लेकर अवतरित हुए,...
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Hindi Essay on “Nasha Mukti” , ”नशा मुक्ति” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

नशा मुक्ति Nasha Mukti                   मादक द्रव्य सेवन की पृवति हजारों वर्ष पुरानी है। अनुसंधान एवं वस्तु-निर्माण की शक्ति से युक्त मानवों ने सभ्यता के विकास के साथ एक से बढ़कर एक उपयोगी चीजें खोज लीं, उपकरण बना लिए, वस्तुएँ निर्मित कर लीं। इस क्रम में उन्होने मादक द्रव्य ढूँढ निकाले एवं उनका प्रयोग करना सीख लिया। भारत के प्राचीन ग्रंथों में ’सोम और सुरा’ का उल्लेख इस बात का...
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Hindi Essay on “Bhartiya Sanskriti” , ”भारतीय सँस्कृति” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

भारतीय सँस्कृति Bhartiya Sanskriti                 भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्व है। बहुत-से लोग, विशेषतः विदेशी, स्वार्थवश या भ्रमवश भारत को एक देश न कहकर इसे उपमहाद्वीप कहते हैं। इसे सिद्व करने के लिए वे नदियों की प्राकृतिक विभाजन-रेखाओं, अनेक भाषाओं, अनेक धर्मों तथा अलग-अलग प्रकार के रीति-रिवाजों का वर्णन करके बताया करते हैं-’’भारत कभी एक देश न था, न है और न ही हो सकता है। वह तो एक उपमहाद्वीप...
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Hindi Essay on “Abushasit Yuva Shakti” , ”अनुशासित युवा शक्ति” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

अनुशासित युवा शक्ति Abushasit Yuva Shakti                  प्रासाद की चिरस्थिरता और उसकी दृढ़ता जिस प्रकार आधारशिला की मजबूती पर आधारित है, लघु पादपों का विशाल वृक्षत्व जिस प्रकार बाल्यवस्था के सिंचन और संरक्षण पर आश्रित होता है, उसी प्रकार युवक की सुख-शांति में समृद्विशालिता का संसार छात्रावस्ता पर आधारित होता है। यह अवस्था नवीन वृक्ष की मृदु और कोमल शाखा हैं, जिसे अपनी मनचाही अवस्था में सरलता से मोड़ा जा सकता...
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Hindi Essay on “Sahitya Samaj ka Daran hai” , ”साहित्य समाज का दर्पण है” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

साहित्य समाज का दर्पण है अथवा साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं मार्गदर्शक भी है                   साहित्य का रचयिता साहित्यकार कहलाता है। साहित्यकार मस्तिष्क, बुद्धि और हदय से सम्पन्न प्राणी है। वह समाज से अलग हो ही नहीं सकता, क्योंकि उसकी अनुभूति का संपूर्ण विषय समाज, उसकी समस्याएँ, मानव जीवन और जीवन के मूल्य हैं, जिनमें वह साँस लेता है। जब कभी उसे घुटन की अनुभुूति होती है उसकी अभिव्यक्ति...
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Hindi Essay on “Rashtra Nirman me Sahityakar ki Bhumika” , ”राष्ट्र निर्माण में साहित्यकार की भूमिका” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

राष्ट्र निर्माण में साहित्यकार की भूमिका अथवा समाज के प्रति साहित्यकार का दायित्व                                 साहित्यकार भी समाज का अभिन्न अंग होता है। वह जिस समाज मे रहता है, उसके प्रति उसका विशेष दायित्व भी बनता हैं। साहित्यकार अपनी रचना के माध्यम से अपने विचारों की अभिव्यक्ति प्रदान करता है। वह अपने असंतोष के कारण को भी स्पष्ट करता है। यहाँ आकर उसका स्वरूप प्रजापति का हो जाता है।                 देशोत्थान...
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Hindi Essay on “Pragatisheel Bharat” , ”प्रगतिशील भारत” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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प्रगतिशील भारत Pragatisheel Bharat प्रस्तावना – कुछ दशक पूर्व आजादी के बाद भारत की प्रगति के बारे में एक अंग्रेजी लेखक द्वारा लिखे लेख में भविष्यवाणी की गयी थी कि ‘ इक्कीसवीं सदी में भारत औद्योगिक विकास की मंजिलें तय करते हुए उस जगह पहुंच जायेगा जहां आदमी शून्य और मशीनें आगे हों जायेंगी। ’ लेख में यह भी भविष्यवाणी की गयी थी कि भारत चांद पर पहुंचेगा और आकाश में...
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Hindi Essay on “Sanyukt Rashtra Sangh – Vishv Shanti mein Bhumika” , ”संयुक्त राष्ट्र संघ – विश्व शान्ति में भूमिका” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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संयुक्त राष्ट्र संघ – विश्व शान्ति में भूमिका Sanyukt Rashtra Sangh – Vishv Shanti mein Bhumika                     प्रस्तावना- बीसवीं शताब्दी का युग पूरे संसार के लिए स्पर्धा का, राजनैतिक उथल-पुथल का युग रहा। एक ओर गुलामी से आजादी के लिए अंगड़ाइयां लेते देश थे तो दूसरी ओर हथिहारों की होड़ मंे शामिल देश, हथियारों की बिक्री के लिए अपनी मण्डी बनाने के लिए प्रयासरत थे। प्रथम विश्वयुद्व के बाद...
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