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Archive by category "Languages" (Page 975)
सैनिक-शिक्षा और विद्यार्थी Compulsory Military Education निबंध नंबर : 01 जीवन में सफलता पाने के लिए हर प्रकार की शिक्षा अनिवार्य है। ‘शिक्षा’ शब्द का व्यापक अर्थ केवल कुछ किताबें पढक़र, एक के बाद एक परीक्षांए पास करते जाना ही नहीं है, बल्कि वास्तविक अर्थ है जहां से जो कुछ भी अच्छा और उपयोगी मिल सके, वह सब कुछ सीखना और अपना लेना। इस ्रव्यापक अर्थ और संदर्भ में ही ‘सैनिक-शिक्षा...
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June 25, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
विद्यार्थी और अनुशासन नियमित अर्थात समाज, संस्था द्वारा निर्धारित या स्वंय उसके नियमों का पालन करते हुए जीवन जीने का प्रयत्न ही अनुशासन है। अनुशासन किसी वर्ग या आयु-विशेष के लोगों के ही नहीं, बल्कि सभी के लिए परम आवश्यक हुआ करता है। जिस जाति, देश और राष्ट्र-जनों में अनुशासन का अभाव रहता है, वे अधिक समय तक अपना अस्तित्व नहीं बनाए रख सकते। यदि किसी अन्य कारण से अस्तित्व बना...
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June 25, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
विद्यार्थी और राजनीति Vidyarthi aur Rajniti निबंध नंबर : 01 आयु में अध्ययन का एक विशिष्ट भाग विद्यार्थी जीवन कहलाता है। इस अवस्था में जीवन को सफल बनोन के लिए अनेक प्रकार की विद्यांए प्राप्त करने का इच्छुक व्यक्ति ही सामान्यतया विद्यार्थी कहलाता है। इस कार्य के लिए प्राय: मानव-आयु का एक भाग अर्थात 25 वर्षो तक की आयु भी निर्धारित कर दी गई है। इस काल को भविष्य की तेयारी...
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June 25, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
विद्यार्थी जीवन : कर्तव्य और अधिकार आम बोलचाल की सामान्य परिभाषा में विद्या-प्राप्ति का इच्छुक विद्यार्थी कहा जाता है। इस दृष्टि से सामान्यतया शिक्षा-कला को विद्यार्थी-जीवन कहा जा सकता है। यों तो मनुष्य सारा जीवन ही कुछ-न-कुछ सीखता रहता है पर उसे विद्यार्थी नहीं कहा जात। जब तक वह स्कूल-कॉलेज जाता और उनके अनुरूप परीक्षांए देता रहता है, उसी कालावधि को विद्यार्थी काल कहते हैं। इस काल में अपने नाम के...
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June 25, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
साहित्य का अध्ययन क्यों साहित्य को साहित्य इसलिए कहा गया है कि उसमें बुनियादी तौर पर मानव-जीवन और समाज के ‘हित’ का भाव स्वत: ही अंतर्हित रहा करता है। वह मनुष्यों की आत्मा को एक करने वाली कोमल-कांत कड़ी का काम भी किया करता है। वह हमारी कोमल-कांत भावनाओं को सहलाया ही करता है, हमारे जीवन को सहज व्यवहारों की सीख भी दिया करता है। जीवन के सामने समय-समय पर आने...
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June 25, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
प्रगतिवाद हिंदी-साहित्य का इतिहास में आधुनिक काल में छायावाद के बाद आरंभ के चौथे चरण को प्रगतिवादी विचारधारा से प्रभावित साहित्य-रचना का युग स्वीकार किया गया है। इसका आरंभ सन 1936 के आस-पास से स्वीकारा जाता है। इससे पहले वाले छायावादी-युग की कविता कल्पना-प्रधान थी, पर अब कविगण कल्पना के आकाश से उतरकर जीवन के यथार्थ से प्रेरणा लेकर धरती पर पैर जमाने लगे। फलस्वरूप कविता की जो नई धारा चली,...
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June 25, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
Write an application regarding the grant of scholarship. The Principal Ankur Public School Agartala March 25, 2010 Sub: Application for seeking scholarship Sir, This is to draw your kind attention towards my son, Aman Deep, a student of class VI, who for the last three years has been doing well in his class. Also, his all round performance has been excellent. He had won many shields and trophies for Your esteemed...
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June 25, 2017 evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), Languages, Letter WritingNo Comment
Write a letter to the editor of a local newspaper, drawing the attention of the government to this basic need of Post Office in your area. The Editor Times of India Lucknow March 25, 2017 Sub: Absence of a post office Sir, Through the columns of your esteemed paper, I want to draw the attention of the authorities towards opening of a new post-office-cum-telegraph office in Char Minar. It is...
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June 25, 2017 evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), Languages, Letter WritingNo Comment