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Hindi Essay on “Satya Ki Shakti” , ”सत्य की शक्ति ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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सत्य की शक्ति Satya ki Shakti या सत्यमेव जयते Satyamev Jayate निबंध नंबर :01   ‘सांच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। जाके हिरदय सांच है, ताकि हिरदय आप।।’ संत कबीर द्वाारा सचे गए इस सूक्ति परक दोहे का सीधा और सरल अर्थ इस प्रकार किया जा सकता है कि इस नाशवान और तरह-तरह की बुराईयों से भरे विश्व में सच बोलना सबसे बड़ी सहज-सरल तपस्या है। सत्य बोलने, सच्चा व्यवहार करने सत्य...
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Hindi Essay on “Aatamnirbhar” , ”आत्मनिर्भर” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

आत्मनिर्भर या स्वावलंबी   ‘खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर सं पहले खुदा बंदे से ये पूछे- बता तेरी रजा क्या है?’ शायर की उपर्युक्त पंक्तियां स्वावलंबी मनुष्य के बारे में है। जिनका आशय है कि स्वावलंबी या आत्मनिर्भर व्यक्तियों के सामने ईश्वर को भी झुकना पड़ता है। ऐसे व्यक्तियों का भाज्य लिखने से पहले ईश्वर को भी उनसे पूछना पड़ता है ‘बता तेरी रजा (इच्छा) क्या है।’ परमुखापेक्षी...
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Hindi Essay on “Karat-Karat Abhyas ke Jadmati hot Sujaan” , ”करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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निबंध नंबर : 01  करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान   कविवर वृंद के रचे दोहे की एक पंक्ति वास्तव में निरंतर परिश्रम का महत्व बताने वाली है। साथ ही निरंतर परिश्रम करने वाला व्यक्ति के लिए अनिवार्य सफलता प्रदान करने वाली है दोहे की यह पंक्ति। पूरा दोहा इस प्रकार है :- ‘करत -करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान। रसरी आवत-जात ते, सिल पर परत निसान।’ इसकी व्याख्या इस प्रकार...
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Hindi Essay on “Yadi mein Pradhan Mantri Hota” , ” यदि मैं प्रधानमंत्री होता” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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यदि मैं प्रधानमंत्री होता Yadi mein Pradhan Mantri Hota निबंध नंबर :-01  मानव संभवत : महत्वकांक्षी प्राणी है। अपने भविष्य के बारे में वह अनेक प्रकार के सपने देखा करता है तथा कल्पना की उड़ान में खोया रहता है। कभी-कभी मेरे मस्तिष्क में भी एक अभिलाषा होती है -यदि में देश का प्रधानमंत्री होता। पर यह अकांक्षा आकाश के तारे तोडऩे के समान है, तथापि फिर भी मन के किसी कोने...
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Hindi Essay on “Yadi mein Shiksha Mantri Hota” , ” यदि मैं शिक्षामंत्री होता” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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यदि मैं शिक्षामंत्री होता कल्पना करना और अपने भावी जीवन के लिए मधुर स्वप्न संजोना मानव की सहज प्रवृत्ति है। एक विद्यार्थी होने के कारण जब आज मैं देश में चल रही शिक्षा पद्धिति पर नजर डालता हूँ तो मन खिन्न हो उठता है। मुझे लगता है कि आज देश में जितनी दुर्दशा शिक्षा की हो रही है, उतनी संभवत: किसी अन्य वस्तु की नहीं। लार्ड मैकाले ने भारत में स्वार्थवृत्ति...
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Hindi Essay on “Yadi Mein Vegyanik Hota ” , ” यदि मैं वैज्ञानिक होता” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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यदि मैं वैज्ञानिक होता आज के युग को वैज्ञानिक युग कहा जाता है। इस युग में किसी व्यक्ति का वैज्ञानिक होना सचमुच बड़े गर्व और गौरव की बात है। वैसे तो अतीत-काल में भारत ने अनेक महान वैज्ञानिक पैदा किए हैं और आज भी विश्व-विज्ञान के क्षेत्र में अनेक भारतीय वैज्ञानिक क्रियाशील हैं। अपने तरह-तरह के अन्वेषणों और आविष्कारों से वे नए मान और मूल्य भी निश्चय ही स्थापित कर हरे हैं।...
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Hindi Essay on “Barat me Bhrashtachar” , “Bhrashtachar”, ”भारत में भ्रष्टाचार”, “भ्रष्टाचार” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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भ्रष्टाचार या भारत में भ्रष्टाचार आधुनिक युग को यदि भ्रष्टाचार का युग कहा जाए, तो अत्युक्ति न होगी। आज भ्रष्टाचार जीवन के प्रतेयेक क्षेत्र में फैल चूका है। इसकी जड़े इतनी गहरी छा चुकी हैं कि समाज का कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं रह पाया है। भ्रष्टाचार ने समाज से नैतिक मूल्यों को ध्वस्त कर दिया है स्वार्थ इर्ष्या, द्वेष तथा लोभ जैसे दुर्गुणों को बढ़ावा दिया है। ‘भ्रष्टाचार’ शब्द...
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Hindi Essay on “Aatankvad ki Samasya ”, “Aatankvad”, ”आतंकवाद की समस्या या आतंकवाद ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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आतंकवाद  या आतंकवाद की समस्या  “जहाँ भी जाता हूँ वीरान नज़र आता है खून में डूबा हर मैदान नज़र आता है कैसे है वक्त कि दिन के उजाले में भीन नहीं इंसान को इंसान नज़र आता है।” कवि भी उपर्युक्त पंक्तियाँ समाज में बढ़ते आतंकवाद की और इंगित करती हैं। आतंकवाद एक अत्यंत भयावह समस्या है जिसमें पूरा विश्व ही जूझ रहा है।  आतंकवाद केवल विकासशील या निर्धन राष्ट्रों की समस्या...
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